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क्या है Canada का वीजा ड्रामा? भारत से आए लाखों आवेदकों को डर, अमेरिका भी मिल गया पीछे

अंतरराष्ट्रीय ब्यूरो 4 नवंबर 2025

कनाडा में वीजा प्रक्रिया पर अचानक आई सख्त कार्रवाई ने भारतीय आवेदकों के लिए चिंता का माहौल बना दिया है। हाल-ही में सामने आए दस्तावेज बताते हैं कि कनाडा की सरकार ने एक प्रस्तावित विधेयक के ज़रिये समूहों में वीजा निरस्तीकरण (mass visa cancellation) का अधिकार माँगा है, जिसमें विशेष रूप से भारत और बांग्लादेश से आए वीजा धारकों को “देश-विशिष्ट चुनौतियों” के चलते निशाना बनाया गया है। इस कदम के पीछे एक बड़ा कारण बताया गया है—भारत से आने वाले छात्रों और वीजाधारकों में धोखाधड़ी और नकली दस्तावेज़ का बढ़ता प्रचलन। 

अंदरूनी प्रस्तुतियों के मुताबिक, Immigration, Refugees and Citizenship Canada (IRCC) और Canada Border Services Agency (CBSA) ने संयुक्त रूप से एक वर्किंग ग्रुप बनाया है, जिसमें अमेरिका के कुछ साझेदार भी शामिल हैं, ताकि भारत-बांग्लादेश जैसे देशों से आने वाले उच्च जोखिम वाले वीजा वर्गों की पहचान की जा सके। उदाहरण के लिए, अगस्त 2025 में भारत के लिए अध्ययन-परमिट (study permit) आवेदन में करीब 74 % तक की अस्वीकृति दर दर्ज की गई है — जो अगस्त 2023 में लगभग 32 % थी। इस तरह के नुमाइंदा आंकड़े दिखाते हैं कि कनाडा का इमिग्रेशन फ्रेमवर्क अब बदलाव की दहलीज पर खड़ा है और भारत इसके केंद्र में है।

इन नियमों से जुड़े तथ्यों ने लाखों भारतीय छात्रों, वीजा-आवेदकों और उनके परिवारों में चिंता की लहर दौड़ा दी है। अब सिर्फ व्यक्तिगत आवेदन नहीं, बल्कि समूह वीजा निरस्तीकरण की संभावना सामने आई है — यानी सरकार कुछ देशों के वीजा धारकों को एक साथ ही रद्द या निरस्त कर सकती है। इससे शिक्षा-निवेश के इच्छुक छात्र-परिवारों को अनिश्चितता का सामना करना पड़ रहा है: क्या उन्हें आवेदन करना जारी रखना चाहिए, क्या उनके दस्तावेज़ पर्याप्त हैं, क्या उनकी मंजूरी पहले की तरह मिलेगी? इन सवालों ने अब एक बड़े प्रश्न चिह्न में बदल गए हैं।

उपर्युक्त परिवर्तनों का प्रभाव सिर्फ स्थगन-महत्व का नहीं है — कई कनाडाई विश्वविद्यालयों में भारतीय छात्रों की संख्या में तेज गिरावट भी देखने को मिल रही है। उदाहरण के तौर पर, University of Waterloo ने पिछले तीन-चार वर्षों में भारतीय छात्र अंतःविभाग में दाखिले में लगभग दो-तिहाई की कटौती दर्ज की है। इसके पीछे मुख्य कारण ‘विश्वविद्यालय को अंतरराष्ट्रीय छात्रों से होने वाली आय’ का दृष्टिकोण नहीं, बल्कि नौकरी-स्थापन, वीजा-नियमों की अनिश्चितता और अफवाहें हैं कि “कनाडा में अब रहो-काम करो” का आकर्षण घट गया है।

देशों के बीच कूटनीतिक तनाव भी इस पूरे वीजा मसले को और जटिल बना रहा है। पिछले कुछ वर्षों में भारत-कनाडा संबंधों में कई उतार-चढ़ाव आए हैं, जिनमें सुरक्षा, प्रवासन और राजनीतिक फरमानों का असर रहा है। इस बीच, कनाडाई विदेश मंत्री ने भारतीय छात्रों के योगदान को स्वीकार किया है, लेकिन साथ ही इस बात पर बल भी दिया है कि “इमीग्रेशन सिस्टम की ईमानदारी” अब समझौते योग्य नहीं है। 

अभी यह स्पष्ट नहीं है कि कनाडा ने वीजा निरस्तीकरण की प्रक्रिया कब तक औपचारिक रूप से लागू करेगी और इसका सामना किस तरह किया जाएगा। लेकिन इतना तय है कि भारत से कनाडा जाने वाले छात्रों-परिवारों को अब — पहले से कहीं अधिक — सावधानी बरतनी होगी, आवेदन की तैयारी एवं वित्तीय हलकों को पुख्ता करना होगा और भविष्य-निरूपित विकल्पों पर भी विचार करना होगा। समय के साथ यह भी देखने योग्य होगा कि क्या यह प्रवासन-नीति केवल शिक्षा तक सीमित रहेगी या अन्य श्रेणियों-पर भी लागू होगी।

इस बीच, यदि आप कनाडा का वीजा प्रक्रिया, प्रस्तावित Bill C-12 के प्रावधान या भारत-कनाडा वीजा-आवेदन की रणनीति पर विस्तृत जानकारियाँ चाहते हैं, तो मैं उस बारे में भी जानकारी जुटा सकता हूँ।

 

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