खार्तूम, 2 नवंबर 2025
सूडान में लगातार बढ़ते हिंसा और मानवाधिकार उल्लंघन के बीच, कई देशों के विदेश मंत्रियों ने वहां की स्थिति को “प्रलयकारी” (Apocalyptic) बताते हुए गहरी चिंता व्यक्त की है। अंतरराष्ट्रीय मंचों से आ रही रिपोर्टों के अनुसार, पश्चिमी सूडान के दारफुर क्षेत्र में हो रहे भीषण अत्याचारों ने वैश्विक समुदाय को झकझोर दिया है।
विदेश मंत्रियों के संयुक्त बयान में कहा गया कि Rapid Support Forces (RSF) और सेना के बीच चल रहा संघर्ष अब आम नागरिकों के लिए “नरसंहार” जैसा रूप ले चुका है। उन्होंने बताया कि हजारों लोग मारे गए हैं, सैकड़ों गांव नष्ट हो चुके हैं और लाखों नागरिक अपने घरों से बेघर हो गए हैं। विशेष रूप से एल-फशर शहर में, नागरिक इलाकों में बमबारी, महिलाओं के साथ यौन हिंसा और अस्पतालों पर हमले जैसी घटनाओं ने पूरे विश्व को स्तब्ध कर दिया है।
जर्मनी, ब्रिटेन, जॉर्डन और कई अफ्रीकी देशों के विदेश मंत्रियों ने कहा कि यह स्थिति केवल एक क्षेत्रीय संघर्ष नहीं है, बल्कि मानवता के मूल मूल्यों पर सीधा हमला है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की, ताकि राहत एजेंसियों को सुरक्षित मार्ग मिल सके और नागरिकों तक भोजन, पानी और दवाइयां पहुंच सकें।
संयुक्त राष्ट्र के मानवीय मामलों के विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगर हिंसा नहीं रुकी, तो सूडान “21वीं सदी का सबसे बड़ा मानवीय संकट” बन सकता है। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों को तुरंत संघर्ष विराम लागू करना चाहिए और शांति वार्ता के लिए राजनयिक प्रयासों को समर्थन देना चाहिए।
दारफुर में जारी यह संघर्ष अप्रैल 2023 से शुरू हुआ था, जब सेना और अर्धसैनिक बलों के बीच सत्ता संघर्ष ने पूरे देश को युद्ध में झोंक दिया। तब से अब तक 30 लाख से अधिक लोग विस्थापित हो चुके हैं और हजारों की मौत हो चुकी है।
विदेश मंत्रियों ने संयुक्त बयान में कहा, “हमें अब निष्क्रिय नहीं रहना चाहिए। सूडान को बचाने का यही समय है। यह केवल एक देश का संघर्ष नहीं, बल्कि पूरी मानवता की परीक्षा है।”
अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों का कहना है कि यदि विश्व समुदाय ने अब निर्णायक कदम नहीं उठाए, तो सूडान का यह मानवीय संकट जल्द ही अफ्रीका और मध्य पूर्व के लिए अस्थिरता का नया केंद्र बन सकता है।




