शिमला 31 अक्टूबर 2025
हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला से एक बड़ा और संवेदनशील फैसला सामने आया है। ज़िला अदालत ने संजौली क्षेत्र में नगर निगम की जमीन पर बनी मस्जिद को अवैध ठहराते हुए उसके ध्वस्तीकरण (डिमॉलिशन) का आदेश जारी कर दिया है। अदालत ने साफ कहा है कि यह भूमि नगर निगम की संपत्ति है और वक्फ बोर्ड इस पर कानूनी स्वामित्व सिद्ध करने में विफल रहा है। इस फैसले ने एक बार फिर धार्मिक स्थलों और सरकारी भूमि पर कब्जे को लेकर देशभर में नई बहस छेड़ दी है।
अदालत में यह मामला कई वर्षों से लंबित था। वक्फ बोर्ड का दावा था कि संजौली स्थित यह मस्जिद दशकों पुरानी है और स्थानीय मुस्लिम समुदाय इसकी देखरेख करता आ रहा है। वहीं नगर निगम ने अदालत में दस्तावेज़ पेश कर कहा कि यह भूमि निगम की है और बिना अनुमति धार्मिक ढांचा खड़ा किया गया। न्यायालय ने सभी पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद अंततः यह निष्कर्ष निकाला कि मस्जिद के लिए कोई वैध स्वीकृति या रिकॉर्ड मौजूद नहीं है। अदालत ने आदेश में स्पष्ट किया कि निगम की भूमि पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण या निर्माण कानूनी अपराध की श्रेणी में आता है, चाहे वह किसी भी धर्म का ढांचा क्यों न हो।
निर्णय के बाद प्रशासनिक हलकों में हलचल मच गई है। स्थानीय प्रशासन ने अदालत के आदेश की प्रति मिलने के बाद मस्जिद को गिराने की तैयारी शुरू कर दी है। इस कार्रवाई से पहले इलाके में सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है ताकि कोई सांप्रदायिक तनाव न उत्पन्न हो। नगर निगम के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि “कानून सबके लिए समान है। अदालत के निर्देशों का पालन करना हमारी संवैधानिक जिम्मेदारी है।” वहीं वक्फ बोर्ड के स्थानीय प्रतिनिधियों ने संकेत दिए हैं कि वे इस आदेश के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील करेंगे।
इस पूरे प्रकरण ने हिमाचल प्रदेश की राजनीति में भी गर्मी ला दी है। कुछ स्थानीय संगठनों ने अदालत के फैसले का स्वागत करते हुए कहा है कि “सरकारी जमीनों पर वर्षों से चल रहे अतिक्रमण को खत्म करने के लिए यह फैसला मिसाल बनेगा।” दूसरी ओर, मुस्लिम समुदाय के कुछ प्रतिनिधियों ने इसे धार्मिक भावना को आहत करने वाला कदम बताया है और कहा है कि “मस्जिद को गिराना किसी विवाद का समाधान नहीं, बल्कि तनाव को बढ़ावा देगा।”
जानकारों का कहना है कि यह मामला केवल एक मस्जिद या एक इलाके का नहीं, बल्कि उन तमाम विवादित संपत्तियों से जुड़ा है जहां धार्मिक ढांचे सरकारी जमीनों पर बने हुए हैं और जिन पर स्वामित्व को लेकर अदालतों में मुकदमे चल रहे हैं। शिमला का यह फैसला भविष्य में ऐसे कई मामलों में कानूनी मिसाल बन सकता है। फिलहाल, जिला प्रशासन ने साफ कर दिया है कि अदालत के आदेश को जल्द से जल्द लागू किया जाएगा और किसी भी प्रकार की कानून-व्यवस्था की स्थिति को बिगड़ने नहीं दिया जाएगा।
यह फैसला ऐसे समय आया है जब देशभर में वक्फ संपत्तियों की जांच, सर्वे और विवादित दावों पर बहस जोरों पर है। संजौली मस्जिद विवाद इस बात का प्रतीक बन गया है कि अब अदालतें और प्रशासन पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में कड़े कदम उठा रहे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि वक्फ बोर्ड इस फैसले के खिलाफ क्या रणनीति अपनाता है और क्या इस विवाद का समाधान शांतिपूर्ण ढंग से निकल पाएगा या नहीं।




