जयपुर 30 अक्टूबर 2025
देश को झकझोर देने वाले रेप केस में आजीवन कारावास की सजा काट रहे आसाराम बापू को राजस्थान हाईकोर्ट ने 6 महीने की अग्रिम जमानत दे दी है। यह राहत उन्हें मेडिकल ग्राउंड पर दी गई है। अदालत के इस फैसले ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या धार्मिक वस्त्र ओढ़ने वाले अपराधियों के लिए न्याय व्यवस्था के अलग मापदंड हैं?
गौरतलब है कि 2018 में आसाराम को नाबालिग लड़की के यौन उत्पीड़न के मामले में दोषी ठहराया गया था, और जोधपुर की विशेष अदालत ने उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। अब, मेडिकल रिपोर्ट का हवाला देते हुए आसाराम ने जमानत की अर्जी लगाई, जिसे हाईकोर्ट ने स्वीकार कर लिया।
न्याय व्यवस्था पर उठते सवाल इसलिए भी गंभीर हैं क्योंकि इससे पहले भी डेरा सच्चा सौदा प्रमुख राम रहीम को कई बार ‘समान आधारों’ पर जमानत मिल चुकी है — और हर बार जेल से बाहर आने के बाद “सत्संग” के नाम पर राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन होता देखा गया है।
मानवाधिकार कार्यकर्ता और महिला संगठनों का कहना है कि “धर्म के नाम पर बलात्कार करने वालों को मेडिकल ग्राउंड की ढाल देना न्याय का मखौल है।” उन्होंने मांग की है कि रेप पीड़िताओं के न्याय और सिस्टम की विश्वसनीयता के लिए ऐसे मामलों में पारदर्शी निगरानी जरूरी है।
देश में यह सवाल अब और तेज़ हो गया है —
- क्या अदालतें आम नागरिक और तथाकथित ‘गॉडमैन’ के लिए अलग कानून चला रही हैं?
- क्या “बीमार” दिखना अब जेल से बाहर निकलने का सबसे आसान रास्ता बन चुका है?




