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तालिबान का दावा: सीमा झड़पों में 58 पाकिस्तानी सैनिक ढेर, अफगानिस्तान ने बंद की सीमा

काबुल/इस्लामाबाद/नई दिल्ली 13 अक्टूबर 2025

अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच तनाव एक बार फिर खूनी टकराव में बदल गया है। अफगान तालिबान ने दावा किया है कि हालिया सीमा झड़पों में 58 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए, जबकि कई घायल हुए हैं। इस हिंसक झड़प के बाद अफगानिस्तान ने पाकिस्तान से लगी सीमा को पूरी तरह बंद कर दिया है।

रिपोर्टों के मुताबिक, यह झड़प खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के पास स्थित दुरंड रेखा (Durand Line) पर हुई, जहां दोनों देशों की सेनाओं के बीच पिछले कई महीनों से लगातार तनाव और गोलीबारी हो रही है। तालिबान के रक्षा मंत्रालय ने अपने आधिकारिक बयान में कहा है, “पाकिस्तानी सेना ने हमारी सीमा चौकियों पर गोलाबारी की, जिसका हमने मुंहतोड़ जवाब दिया। 58 सैनिक मारे गए और दर्जनों घायल हुए।”

 पाकिस्तान सरकार ने तालिबान के दावे को “बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया झूठ” बताया है, लेकिन यह स्वीकार किया है कि दोनों ओर से गोलीबारी हुई थी और कुछ सैनिक हताहत हुए हैं।

जानकारों का कहना है कि यह झड़प दरअसल सीमा पार आतंकवाद और अवैध घुसपैठ को लेकर चल रहे विवाद की कड़ी है। पाकिस्तान लगातार तालिबान पर TTP (Tehrik-e-Taliban Pakistan) को शरण देने का आरोप लगाता रहा है, जबकि तालिबान का कहना है कि “TTP पाकिस्तान की आंतरिक समस्या है, अफगानिस्तान की नहीं।”

इस घटना के बाद तोर्खम और स्पिन बोल्डक बॉर्डर पूरी तरह बंद कर दिए गए हैं, जिससे सैकड़ों ट्रक, व्यापारी और आम नागरिक फंसे हुए हैं। व्यापारिक नुकसान करोड़ों डॉलर में बताया जा रहा है।

विश्लेषकों का कहना है कि यह झड़प तालिबान-पाकिस्तान रिश्तों में अब तक की सबसे बड़ी दरार को दिखाती है। पाकिस्तान, जो कभी तालिबान का प्रमुख संरक्षक था, आज उसी के निशाने पर है।

भारतीय रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटनाक्रम दक्षिण एशिया में शक्ति संतुलन को नया मोड़ दे सकता है। भारत ने फिलहाल इस पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है, लेकिन सूत्रों के अनुसार नई दिल्ली स्थिति पर बारीकी से नजर रख रही है।

सीमा संघर्ष के इस नए दौर ने पूरे क्षेत्र में अस्थिरता और सुरक्षा चिंताओं को गहरा दिया है। यदि स्थिति जल्द नहीं संभाली गई, तो यह संघर्ष एक खुले युद्ध में भी बदल सकता है।

 

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