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झारखंड में बिना MBBS बने 28 ‘डॉक्टर’! हेल्थ विभाग के नोटिफिकेशन पर बड़ा विवाद

राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 29 जून 2026

झारखंड सरकार के स्वास्थ्य विभाग का एक नोटिफिकेशन विवादों में आ गया है। आरोप है कि विभाग ने 28 सीनियर हॉस्पिटल मैनेजर (SHM) को उनके नाम के आगे “डॉ.” (Doctor) लिखने की अनुमति दे दी, जबकि उनके पास एमबीबीएस की डिग्री नहीं है। इस फैसले को लेकर चिकित्सा जगत और प्रशासनिक हलकों में गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ये अधिकारी अस्पताल प्रबंधन से जुड़े पदों पर कार्यरत हैं और इनकी नियुक्ति चिकित्सक के रूप में नहीं हुई थी। ऐसे में नोटिफिकेशन के बाद यह बहस छिड़ गई है कि बिना मेडिकल डिग्री वाले अधिकारियों को “डॉक्टर” संबोधन देने से आम लोगों में भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है।

आलोचकों का कहना है कि भारत में “डॉक्टर” शब्द आमतौर पर चिकित्सकीय योग्यता से जुड़ा माना जाता है। यदि प्रशासनिक पदों पर कार्यरत गैर-एमबीबीएस अधिकारियों को भी यही संबोधन दिया जाता है, तो मरीजों और आम नागरिकों के लिए यह समझना मुश्किल हो सकता है कि संबंधित व्यक्ति चिकित्सक है या केवल अस्पताल प्रबंधन से जुड़ा अधिकारी।

वहीं, इस मुद्दे पर स्वास्थ्य विभाग की मंशा और नोटिफिकेशन के कानूनी आधार को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। अब यह मांग की जा रही है कि सरकार स्पष्ट करे कि यह संबोधन किस नियम या नीति के तहत दिया गया और क्या इसका संबंध किसी शैक्षणिक उपाधि (जैसे पीएचडी या अन्य डॉक्टरेट) से है या केवल पदनाम के रूप में इसका इस्तेमाल किया गया है।

यह मामला अब केवल एक प्रशासनिक आदेश तक सीमित नहीं रह गया है। इससे चिकित्सा पेशे की परिभाषा, पेशेवर पहचान और सरकारी आदेशों की पारदर्शिता पर भी बहस तेज हो गई है।

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