संदिग्ध जीत के बाद श्मशान-सा सन्नाटा: क्या लोकतंत्र सिर्फ मशीनों और जालसाजी का खेल? जीतने वाले भी नहीं मानते जश्न
समी अहमद। पटना 16 नवंबर 2025 देश के राजनीतिक इतिहास में कभी ऐसा दौर नहीं आया था जब जीतते हुए दल भी इस कदर खामोश दिखाई दें, जैसे उन्हें अपनी ही जीत पर यकीन न हो। आज का भारत वही भयावह मोड़ देख रहा है — चुनाव हो रहे हैं, जनता बोल रही है, माहौल…
