मोदी राज में ‘रेवड़ी’ सुनामी: चुनाव से पहले ₹67,928 करोड़ बाँटे — महाराष्ट्र टॉप पर, बिहार दूसरे स्थान पर

नई दिल्ली, 23 अक्टूबर 2025 चुनावी रेवड़ियों की सुनामी और संस्थागत रिश्वत का नया मॉडल देश के आठ प्रमुख राज्यों में हालिया विधानसभा चुनावों से ठीक पहले, सत्तारूढ़ सरकारों ने जनकल्याण योजनाओं की आड़ में ₹67,928 करोड़ की चौंकाने वाली विशाल राशि खर्च कर दी है। आर्थिक और नीति विश्लेषकों का कहना है कि यह […]
रूस से तेल, अमेरिका से मेल — देश में लुका-छिपी का खेल, यही तो है नरेंद्र सरेंडर: कांग्रेस

नई दिल्ली, 23 अक्टूबर 2025 कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि भारत की विदेश नीति अब पारदर्शिता के बजाय “लुका-छिपी के खेल” में तब्दील हो गई है। कांग्रेस प्रवक्ता और वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने कहा कि रूस से तेल खरीद और अमेरिका से मेलजोल के बीच प्रधानमंत्री […]
सऊदी अरब में ऐतिहासिक बदलाव: 50 साल बाद खत्म हुआ ‘कफाला सिस्टम’, 1.3 करोड़ विदेशी वर्कर्स को मिली आज़ादी

सऊदी अरब ने श्रम जगत में ऐतिहासिक कदम उठाते हुए 50 साल पुराने कफाला सिस्टम को खत्म कर दिया है। इस निर्णय से अब 1.3 करोड़ से अधिक विदेशी वर्कर्स को आज़ादी और सम्मान के साथ काम करने का अधिकार मिलेगा। ◆ अब विदेशी कामगार बिना एग्जिट वीज़ा लिए देश छोड़ सकेंगे और अपनी इच्छा […]
बिहार मिशन पर गहलोत — लालू परिवार संग मुलाकात से बढ़ी कांग्रेस-राजद नजदीकी

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता श्री अशोक गहलोत ने बिहार की राजधानी पटना में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के प्रमुख लालू प्रसाद यादव, उनके पुत्र और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव, तथा पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी से बेहद महत्वपूर्ण मुलाकात की है। इस मुलाकात के बाद, गहलोत ने ‘इंडिया’ गठबंधन की एकजुटता […]
मी लॉर्ड, यही है ग्रीन पटाखा? भोपाल में 125 लोग अंधेपन की कगार पर, सिस्टम मौन

दीपावली के पावन पर्व की रौशनी के बीच, मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के अस्पतालों में एक भयावह और दुखद अंधेरा छा गया है। कारण है एक सस्ती, ₹200 की चीनी ‘कार्बाइड गन’ जिसे दुकानों पर खुलेआम और अवैध रूप से बेचा जा रहा था, और जो अब सौ से ज्यादा परिवारों के लिए जीवनभर […]
‘सरकारी मुसलमानों’ का भ्रम और संघतंत्र की विभाजनकारी सच्चाई
नई दिल्ली 23 अक्टूबर 2025 भारत के तेजी से बदलते सामाजिक और राजनीतिक परिदृश्य में एक अत्यंत विरोधाभासी और दुखद किरदार उभर रहा है, जिसे प्रायः ‘सरकारी मुसलमान’ कहकर संबोधित किया जाता है। यह वह वर्ग है जो एक खतरनाक भ्रम पाले बैठा है कि हिंदुत्ववादी विचारधारा के वर्चस्व के तहत स्थापित होने वाले ‘संघतंत्र’ […]