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वोटिंग से पहले ही हमारे 100 पार्षद जीत गए— Bharatiya Janata Party का महाराष्ट्र में बड़ा दावा

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अमरनाथ | मुंबई 22 नवंबर 2025

महाराष्ट्र की स्थानीय निकाय चुनावों की पृष्ठभूमि में भाजपा के राज्य अध्यक्ष Ravindra Chavan ने एक बड़ा राजनीतिक दावा किया है। उन्होंने कहा है कि राज्य में आयोजित हो रहे नगर-पंचायतों और नगर परिषदों के चुनावों से पूरी तरह पहले ही 100 भाजपा पार्षद निर्विरोध जीत चुके हैं। 

चаван के इस दावे के मुताबिक, इन निर्विरोध विजयों से भाजपा की स्थानीय­स्तर पर पकड़ मजबूत हुई है और आने वाले मतदान के मुकाबले में पार्टी को रणनीतिक बढ़त मिल सकती है। इसके अतिरिक्त, विवरणों में यह भी बताया गया है कि यह 100 पार्षद किस-किस इलाके से हैं: उत्तर महाराष्ट्र में करीब 49, पश्चिम महाराष्ट्र में 41, तटीय कोंकण में चार, तथा मराठवाड़ा और विदर्भ में तीन-तीन। 

हालाँकि, इस दावे का विरोधी दलों ने तुरंत विरोध किया है। Indian National Congress एवं Nationalist Congress Party ने भाजपा पर आरोप लगाया है कि स्थानीय निकायों में भाजपा समर्थित नामांकन-प्रक्रिया, उम्मीदवारों के नामांकन वापस लेने, और निर्विरोध मुकाबला सुनिश्चित करने जैसी रणनीतियाँ अपना रही है, जिससे लोकतांत्रिक प्रतिस्पर्धा प्रभावित हो रही है। 

विश्लेषकों के अनुसार, इतनी बड़ी संख्या में निर्विरोध जीत का मतलब केवल संगठनात्मक शक्ति नहीं बल्कि विपक्ष की कमज़ोरी, नामांकन प्रक्रिया में भागीदारी का कम होना, और स्थानीय राजनीति में पहले से बनी शक्ति संरचनाएं भी हो सकती हैं। इसका मतलब यह हो सकता है कि भाजपा को आगामी चुनाव में मनोवैज्ञानिक बढ़त मिल सकती है, लेकिन यह अभी तक सुनिश्चित नहीं कि यह बढ़त वोटिंग परिणाम में किस हद तक बदल पाएगी।

स्थानीय निकाय चुनावों के संदर्भ में यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि निर्विरोध जीतें लोकतांत्रिक प्रतिस्पर्धा को कम करके वोटिंग के दिन तक पार्टी को सहज स्थिति में डाल सकती हैं। पार्टी के लिए यह “पहले से जीत” जैसा संदेश देती हैं — जबकि विपक्ष के लिए यह चेतावनी है कि उन्हें सक्रिय होना होगा, नामांकन-प्रक्रिया में भागीदारी बढ़ानी होगी और स्थानीय स्तर पर रणनीति सुदृढ़ करनी होगी।

आगामी दिनों में यह देखना होगा कि इस दावे का चुनाव के वास्तविक परिणामों पर कितनी छाप पड़ती है। क्या इस “100 निर्विरोध जीत” की संख्या वास्तव में पार्टी को लाभ पहुंचाएगी, या मतदान-दिन तक विपक्ष उसे चुनौती देने में सफल होगा — यही अब चुनाव-दृष्टि से मुख्य सवाल बन गया है।

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