क्राइम | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 24 अगस्त 2026
दिल्ली में सामने आए बड़े कोकीन नेटवर्क की जांच में उस समय नया मोड़ आया, जब करीब दो साल तक फरार रहने के बाद वीरेंद्र सिंह बैसोया भारत लौट आया। बैसोया को इस ड्रग नेटवर्क का किंगपिन बताया गया है। यह नेटवर्क करीब ₹7,000 करोड़ की कोकीन जब्ती से जुड़ा है और इसकी जांच ने दिल्ली से लेकर दुबई तक फैले एक संगठित ड्रग कारोबार की तस्वीर सामने रखी है। मामला केवल भारी मात्रा में मादक पदार्थ की बरामदगी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे काम कर रहे लोगों, विदेश में मौजूद ठिकानों, वित्तीय लेन-देन और दिल्ली में फैले वितरण नेटवर्क की जांच भी महत्वपूर्ण हो गई है।
इस कहानी का एक अहम हिस्सा दक्षिण दिल्ली के पिलांजी गांव से जुड़ा है। फरवरी 2024 में गुरुग्राम में आयोजित एक शादी के रिसेप्शन में 28 वर्षीय आकाश बैसोया अपनी पत्नी के साथ मंच पर मौजूद था। समारोह में परिवार और रिश्तेदारों के साथ कारोबारी, राजनीतिक क्षेत्र से जुड़े लोग और लंबे समय से इस इलाके में रहने वाले परिवारों के सदस्य भी मौजूद थे। उस समय यह एक सामान्य पारिवारिक समारोह नजर आ रहा था, लेकिन बाद में सामने आए घटनाक्रम ने बैसोया परिवार और बड़े कोकीन नेटवर्क से जुड़े संपर्कों को जांच के केंद्र में ला दिया।
₹7,000 करोड़ की कोकीन ने खोली नेटवर्क की परतें
इस पूरे मामले की गंभीरता का सबसे बड़ा संकेत ₹7,000 करोड़ की कोकीन जब्ती है। इतनी बड़ी मात्रा में मादक पदार्थ की बरामदगी ने जांच एजेंसियों के सामने यह सवाल खड़ा किया कि इसके पीछे कितना बड़ा नेटवर्क काम कर रहा था और इसका संचालन किस स्तर पर किया जा रहा था। जांच आगे बढ़ने के साथ दिल्ली में मौजूद संपर्कों के साथ-साथ विदेशों में बने ठिकानों और नेटवर्क से जुड़े लोगों की भूमिका भी सामने आने लगी।
वीरेंद्र सिंह बैसोया का नाम इस मामले में इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि उसे इस नेटवर्क का मुख्य संचालक बताया गया है। जांच के अनुसार, नेटवर्क की गतिविधियों में दुबई का भी महत्वपूर्ण स्थान रहा। करीब दो वर्षों तक भारत से बाहर रहने के बाद बैसोया की वापसी ने जांच एजेंसियों को उसके संपर्कों और नेटवर्क की गतिविधियों से जुड़े कई सवालों के जवाब तलाशने का अवसर दिया है।
दुबई से दिल्ली तक फैला नेटवर्क
ड्रग तस्करी के बड़े नेटवर्क सामान्य तौर पर कई स्तरों पर काम करते हैं। विदेश में बैठे संचालकों से लेकर देश में मौजूद सप्लायर, डिलीवरी नेटवर्क, वित्तीय लेन-देन संभालने वाले लोग और स्थानीय संपर्क—हर स्तर की भूमिका जांच का हिस्सा बनती है। इस मामले में भी दुबई और दिल्ली के बीच संपर्कों की जांच महत्वपूर्ण है। एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि मादक पदार्थ भारत तक किस माध्यम से पहुंचा, इसके पीछे कौन लोग थे और दिल्ली तथा आसपास के इलाकों में इसकी आपूर्ति किस नेटवर्क के जरिए की जा रही थी।
इतनी बड़ी मात्रा में कोकीन की बरामदगी ने दिल्ली में सक्रिय ड्रग नेटवर्क की क्षमता को भी उजागर किया है। राजधानी और उसके आसपास के इलाकों में बड़े पैमाने पर मादक पदार्थों की आपूर्ति के लिए एक संगठित व्यवस्था की जरूरत होती है। इसी कारण जांच का दायरा केवल बरामद कोकीन और कुछ आरोपियों तक सीमित नहीं है, बल्कि नेटवर्क के आर्थिक और संपर्क तंत्र तक भी पहुंचने की कोशिश की जा रही है।
पिलांजी से शुरू हुई कहानी में कई बड़े नाम
दक्षिण दिल्ली के पिलांजी गांव का उल्लेख इस मामले में इसलिए सामने आया क्योंकि बैसोया परिवार की जड़ें इस इलाके से जुड़ी हैं। फरवरी 2024 में आकाश बैसोया की शादी का समारोह भी इसी सामाजिक और पारिवारिक नेटवर्क की झलक देता है। समारोह में कारोबारी और राजनीतिक क्षेत्र से जुड़े लोगों की मौजूदगी ने बाद की जांच के संदर्भ में इस कार्यक्रम को महत्वपूर्ण बना दिया।
हालांकि, किसी शादी या सामाजिक कार्यक्रम में किसी व्यक्ति की मौजूदगी अपने आप में किसी अपराध में उसकी संलिप्तता साबित नहीं करती। किसी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई या आरोप के लिए जांच एजेंसियों को उसके विरुद्ध ठोस साक्ष्य प्रस्तुत करने होते हैं। इसी आधार पर मामले में शामिल प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका अलग-अलग जांच का विषय है।
वीरेंद्र बैसोया की वापसी क्यों अहम?
करीब दो साल तक भारत से बाहर रहने के बाद वीरेंद्र बैसोया की वापसी इस मामले की जांच के लिए बड़ा घटनाक्रम है। जांच एजेंसियों के लिए उसके कथित विदेश संपर्क, दुबई में मौजूद ठिकाने, भारत में नेटवर्क से जुड़े लोगों और वित्तीय गतिविधियों से जुड़े सवाल महत्वपूर्ण होंगे। उसकी पूछताछ से नेटवर्क के अन्य सदस्यों, कथित वित्तीय चैनलों और ड्रग की सप्लाई से जुड़े रास्तों के बारे में जानकारी मिलने की उम्मीद है।
जांच में यह भी महत्वपूर्ण होगा कि ₹7,000 करोड़ की कोकीन की कथित जब्ती के पीछे पूरा नेटवर्क किस तरह काम करता था। मादक पदार्थ कहां से आया, भारत तक कैसे पहुंचा, किन लोगों ने इसे संभाला और दिल्ली में इसकी आपूर्ति किस तरीके से की जाती थी—इन सभी सवालों के जवाब नेटवर्क की पूरी तस्वीर सामने ला सकते हैं।
जांच के सामने कई बड़े सवाल
अब इस मामले में कई बड़े सवाल जांच एजेंसियों के सामने हैं। पहला सवाल यह है कि इस नेटवर्क का वास्तविक विस्तार कितना था और इसमें कितने लोग शामिल थे। दूसरा सवाल मादक पदार्थ की अंतरराष्ट्रीय सप्लाई लाइन से जुड़ा है। तीसरा सवाल दुबई और दिल्ली के बीच मौजूद संपर्कों का है। इसके अलावा यह भी पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि ड्रग कारोबार से हासिल रकम का इस्तेमाल कहां किया गया और इस पैसे को किस तरह आगे बढ़ाया गया।
इतने बड़े ड्रग नेटवर्क को खत्म करने के लिए केवल कोकीन की बरामदगी और आरोपियों की गिरफ्तारी पर्याप्त नहीं होगी। नेटवर्क के वित्तीय स्रोत, संपत्तियां, संपर्क, अंतरराष्ट्रीय कड़ियां और देश के भीतर वितरण व्यवस्था तक पहुंचना जांच का अहम हिस्सा होगा। यदि इन सभी स्तरों पर कार्रवाई होती है तो इस नेटवर्क की पूरी संरचना को तोड़ा जा सकता है।
वीरेंद्र बैसोया की भारत वापसी के साथ अब इस मामले की जांच एक महत्वपूर्ण चरण में पहुंच गई है। करीब ₹7,000 करोड़ की कोकीन जब्ती, दुबई का ठिकाना और दिल्ली में फैला नेटवर्क इस पूरे मामले को देश के सबसे बड़े ड्रग मामलों में शामिल करता है। अब जांच का केंद्र इस बात पर है कि इस नेटवर्क की जड़ें कितनी गहरी थीं, इसके पीछे कौन-कौन लोग थे और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसका संचालन किस तरह किया जा रहा था। आने वाले समय में जांच और अदालत की प्रक्रिया से इस पूरे नेटवर्क की तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है।




