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पेपर लीक पर बिहार का बड़ा कदम, जज की अध्यक्षता में बनेगी परीक्षा सुधार समिति

राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | पटना | 24 अगस्त 2026

परीक्षा पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं को लेकर उठते सवालों के बीच बिहार सरकार ने परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार पांच सदस्यीय विशेषज्ञ समिति गठित करेगी, जिसकी अध्यक्षता किसी कार्यरत या सेवानिवृत्त न्यायाधीश को सौंपी जाएगी। समिति का उद्देश्य परीक्षा प्रणाली की समीक्षा करना और पेपर लीक रोकने के लिए ठोस सुधारों की सिफारिश करना होगा।

तीन महीने में देनी होगी रिपोर्ट

बिहार सरकार ने समिति को गठन की तारीख से तीन महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने की समयसीमा तय की है। समिति माध्यमिक विद्यालयों की परीक्षाओं से लेकर विश्वविद्यालय, प्रतियोगी और प्रवेश परीक्षाओं तक की व्यवस्था की समीक्षा करेगी।

इसका दायरा केवल किसी एक परीक्षा या भर्ती तक सीमित नहीं रहेगा। राज्य के परीक्षा बोर्ड, आयोग, विश्वविद्यालय और भर्ती एजेंसियों की मौजूदा परीक्षा व्यवस्था की समीक्षा कर व्यापक सुधारों की सिफारिश की जाएगी।

सरकार ने जारी की अधिसूचना

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के अधीन आने वाले सामान्य प्रशासन विभाग ने रविवार को ‘Expert Committee on Examination Reforms’ गठित करने संबंधी अधिसूचना जारी की।

समिति मौजूदा परीक्षा ढांचे की समीक्षा करेगी और ऐसी व्यवस्था सुझाएगी जिससे परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़े, प्रश्नपत्रों की सुरक्षा मजबूत हो और पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।

छात्रों के विरोध के बाद बढ़ा दबाव

परीक्षा व्यवस्था में सुधार का यह फैसला ऐसे समय आया है जब पेपर लीक और परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर बिहार समेत कई राज्यों में छात्रों का आक्रोश सामने आया है। करीब एक महीने पहले दिल्ली के जंतर-मंतर सहित कई स्थानों पर छात्रों ने प्रदर्शन किया था।

परीक्षा व्यवस्था को लेकर उठे सवाल राष्ट्रीय स्तर पर भी राजनीतिक मुद्दा बने और इसी दौर में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था।

सिर्फ पेपर लीक नहीं, पूरी व्यवस्था की होगी समीक्षा

बिहार सरकार की समिति के सामने चुनौती केवल प्रश्नपत्र लीक रोकने की नहीं होगी। परीक्षा केंद्रों की निगरानी, प्रश्नपत्रों की सुरक्षित छपाई और ढुलाई, डिजिटल सुरक्षा, भर्ती एजेंसियों की जवाबदेही, परीक्षा परिणाम और शिकायत निवारण जैसी व्यवस्थाओं को भी मजबूत करना जरूरी होगा।

यदि समिति की सिफारिशों को प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है, तो इसका असर स्कूल से लेकर विश्वविद्यालय और सरकारी भर्ती परीक्षाओं तक दिखाई दे सकता है।

छात्रों के भरोसे की परीक्षा भी

पेपर लीक केवल एक परीक्षा रद्द होने या दोबारा परीक्षा कराने का मामला नहीं है। इसके पीछे लाखों छात्रों की मेहनत, समय और भविष्य जुड़ा होता है। एक परीक्षा में गड़बड़ी का असर उन अभ्यर्थियों पर भी पड़ता है जिन्होंने वर्षों तक तैयारी की होती है।

बिहार सरकार की नई समिति से अब उम्मीद है कि वह केवल पेपर लीक के बाद कार्रवाई का रास्ता नहीं बताएगी, बल्कि ऐसी व्यवस्था तैयार करने पर जोर देगी जिसमें पेपर लीक की गुंजाइश ही न्यूनतम हो और परीक्षा प्रक्रिया पर छात्रों का भरोसा कायम रहे।

तीन महीने में आने वाली रिपोर्ट अब यह तय करेगी कि बिहार की परीक्षा व्यवस्था में सुधार सिर्फ घोषणा बनकर रह जाता है या वास्तव में एक मजबूत और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली की नींव रखी जाती है।

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