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जंतर-मंतर पर युवाओं का हुंकार: शिक्षा मंत्री के इस्तीफे समेत 5 मांगों को लेकर CJP का शक्ति प्रदर्शन

राष्ट्रीय | पलक राज/ समा मेहरा | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 7 जून 2026

दिल्ली के जंतर-मंतर पर शनिवार को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके के नेतृत्व में हजारों छात्रों, युवाओं और अभिभावकों ने प्रदर्शन किया। आंदोलन का मुख्य मुद्दा पेपर लीक, भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताएं और शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही की मांग रहा प्रदर्शनकारियों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि लगातार सामने आ रहे परीक्षा घोटालों और पेपर लीक मामलों ने लाखों युवाओं के भविष्य को संकट में डाल दिया है। भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच हुए इस प्रदर्शन में देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे युवाओं ने भाग लिया।

सभा को संबोधित करते हुए अभिजीत दीपके ने कहा कि यह लड़ाई केवल एक मंत्री के इस्तीफे की नहीं, बल्कि देश की शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही और पारदर्शिता की है। उन्होंने आरोप लगाया कि सोशल मीडिया पर उठ रही आवाजों को दबाने की कोशिश की जा रही है, लेकिन युवाओं का आंदोलन रुकने वाला नहीं है।

प्रदर्शनकारियों ने सरकार के सामने पांच प्रमुख मांगें रखीं। इनमें शिक्षा क्षेत्र में डिजिटल व्यवस्था लागू करने से पहले शिक्षकों को पर्याप्त प्रशिक्षण देना, मणिपुर में शिक्षा संस्थानों का सामान्य संचालन सुनिश्चित करना, प्रतियोगी परीक्षाओं में निष्पक्षता और विश्वसनीयता बहाल करना, छात्रों और अभिभावकों से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता देना तथा छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जवाबदेही तय करना शामिल है।

कई छात्रों और अभिभावकों ने परीक्षा प्रणाली में सुधार की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि वर्षों की मेहनत पेपर लीक और अनियमितताओं की वजह से बर्बाद हो रही है। प्रदर्शन में शामिल मनोवैज्ञानिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी छात्रों पर बढ़ते मानसिक दबाव और आत्महत्या की घटनाओं को गंभीर चिंता का विषय बताया।

इस बीच प्रसिद्ध पर्यावरण कार्यकर्ता Sonam Wangchuk भी जंतर-मंतर पहुंचे और आंदोलन को अपना समर्थन दिया। उन्होंने युवाओं से लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाने का आह्वान किया।

जंतर-मंतर पर हुए इस प्रदर्शन ने शिक्षा, रोजगार और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को एक बार फिर राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि सरकार इन मांगों पर क्या प्रतिक्रिया देती है।

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