अवधेश कुमार । नई दिल्ली 5 दिसंबर 2025
भारत की सबसे बड़ी और कम किराए वाली एयरलाइन IndiGo इन दिनों गंभीर संचालन संकट से गुज़र रही है। देशभर के एयरपोर्ट्स पर यात्रियों की लंबी कतारें, बोर्डिंग गेट्स पर अफरा-तफरी, और अचानक रद्द होती उड़ानों ने हजारों लोगों की यात्रा योजनाओं को तहस-नहस कर दिया है। आंकड़ों के मुताबिक, पिछले कुछ दिनों में IndiGo ने 500 से ज्यादा उड़ानें रद्द की हैं, और लगभग इतनी ही उड़ानें गंभीर देरी का शिकार हुई हैं। आमतौर पर बेहद समयनिष्ठ और भरोसेमंद मानी जाने वाली इस कंपनी की वर्तमान स्थिति ने एयरलाइन सेक्टर और यात्रियों दोनों के लिए बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—आख़िर भारत की सबसे सफल एयरलाइन को यह संकट किसने और कैसे घेर लिया?
वास्तव में इस पूरे संकट की जड़ें FDTL (Flight Duty Time Limitations) के नए नियमों में छिपी हैं, जो हाल ही में लागू किए गए हैं। ये नियम पायलटों और केबिन क्रू के कार्य और विश्राम समय से जुड़े हैं, ताकि उनकी थकान कम हो और सुरक्षा में सुधार हो सके। इन नए प्रावधानों के चलते एयरलाइंस को शेड्यूल में भारी बदलाव करने पड़े हैं। पायलटों की ड्यूटी टाइमिंग पहले से काफी कम हो गई है, जिसके चलते एयरलाइन के पास पर्याप्त संख्या में उपलब्ध क्रू नहीं बच पा रहा है। इंडिगो जैसी विशाल एयरलाइन, जो रोज़ लगभग 2000 उड़ानें संचालित करती है, अचानक पायलटों की कमी से जूझ रही है। कंपनी के शेड्यूलिंग सिस्टम पर अचानक पड़ा यह दबाव उसकी पूरी संचालन क्षमता को अस्त-व्यस्त कर रहा है।
मौजूदा संकट को और जटिल इस वजह से भी बना दिया गया है कि पिछले कुछ महीनों में पायलटों ने अत्यधिक काम का दबाव, लगातार उड़ानें, और आराम के अपर्याप्त समय को लेकर आवाज उठाई थी। पायलटों के संगठनों ने भी कई बार चेतावनी दी थी कि अत्यधिक कार्य अवधि सुरक्षा के लिहाज से खतरनाक हो सकती है। DGCA ने इन्हीं शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए FDTL के नए नियम लागू किए। इन नियमों के अनुसार पायलट एक दिन में कम घंटे उड़ान भर सकेंगे, रात के समय उड़ानों की संख्या में भी कटौती हुई है, और लगातार उड़ानों के बीच आराम का समय बढ़ा दिया गया है। इन सुधारों का उद्देश्य तो सुरक्षा बढ़ाना है, लेकिन एयरलाइंस—खासकर IndiGo जैसी बेहद व्यस्त कंपनी—इसके लिए तैयार नहीं थी। परिणाम स्वरूप, उड़ानों का एक बड़ा हिस्सा बिना पायलट और क्रू के रह गया, और उड़ानें रद्द करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा।
हवाई यात्रियों के लिए इस संकट ने बेहिसाब परेशानियाँ पैदा कर दी हैं। देश के बड़े एयरपोर्ट—दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, कोलकाता—सभी पर यात्रियों को घंटों लंबी लाइनें झेलनी पड़ रही हैं। कई लोग अपनी अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिंग फ्लाइटें चूक गए, हजारों यात्रियों को अचानक होटल ढूँढने पड़े, और कई ने दोबारा टिकट कराने पर दोगुना-तिगुना खर्च किया। सोशल मीडिया पर शिकायतों की बाढ़ आ चुकी है, और लोग सवाल कर रहे हैं कि आखिर देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इतने बड़े स्तर पर संचालन संकट में कैसे फंस गई।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए DGCA ने IndiGo से विस्तृत रिपोर्ट माँगी है। विशेषज्ञों का मानना है कि एयरलाइन ने पिछले कुछ वर्षों में तेज विस्तार तो किया, लेकिन नए पायलटों की भर्ती और प्रशिक्षण में उतनी तेजी नहीं दिखाई। नतीजतन, जैसे ही FDTL नियम बदले, एयरलाइन की पूरी योजना ढह गई। कागज़ पर मौजूद उड़ानें चलाने के लिए पर्याप्त मानव संसाधन उपलब्ध ही नहीं थे। यह भी स्पष्ट है कि भारत का एविएशन सेक्टर लंबे समय से ओवर-एक्सपेंशन, पायलटों की कमी, और कंपनियों की लागत-कटौती नीतियों से जूझता रहा है। इंडिगो इस दबाव का सबसे बड़ा शिकार बन गई है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि स्थिति कब सामान्य होगी? इंडिगो का दावा है कि वह “कुछ ही दिनों” में फ्लाइट संचालन स्थिर कर लेगी, लेकिन विशेषज्ञों की राय इससे बहुत अलग है। उनका कहना है कि जब तक एयरलाइन पायलटों की संख्या नहीं बढ़ाती, और नया शेड्यूलिंग मॉडल पूरी तरह संतुलित नहीं बन जाता, तब तक हालात सुधरना मुश्किल है। यह भी संभव है कि आने वाले महीनों में एयरलाइन कई रूटों पर अपनी उड़ान क्षमता स्थायी रूप से कम कर दे। कुल मिलाकर, यह संकट केवल इंडिगो के लिए नहीं, बल्कि भारत के पूरे एविएशन ढाँचे के लिए एक चेतावनी है—अत्यधिक विस्तार, कम स्टाफ, और गलत योजना किसी भी समय बड़ा संकट पैदा कर सकती है।




