महेंद्र सिंह। नई दिल्ली 5 दिसंबर 2025
भारतीय राजनीति के सबसे रहस्यमयी अध्यायों में से एक—प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और माडी शर्मा—की कहानी एक बार फिर चर्चा में है। वह महिला जिसे 2019 में देश की राजनीति हिला देने वाली अंतरराष्ट्रीय कड़ी माना गया था, आज पूरी तरह गायब है। माडी शर्मा, जिन्हें दुनिया Madhu Sharma के नाम से भी जानती है, बेल्जियम–ब्रिटेन की नागरिक, एक अंतरराष्ट्रीय पावर ब्रोकर, लॉबिस्ट और NGO संचालक थीं। राजनीतिक विश्लेषक उन्हें ऐसी शख्सियत बताते हैं—“सुई की तरह प्रवेश करती हैं और तलवार की तरह बाहर निकलती हैं।” उनकी भूमिका, उनकी पहुंच और अचानक उनका गायब हो जाना—यह सब मिलकर एक ऐसी कहानी बनाता है जो आज भी भारत की सत्ता और कूटनीति के गलियारों में अनसुलझी गूंज की तरह तैरती रहती है।
2019 का वर्ष भारतीय राजनीति का सबसे नाटकीय कालखंड था। अनुच्छेद 370 हटाया जा चुका था और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की नीति की आलोचना और समर्थन दोनों तेज़ी से बढ़ रहे थे। इसी बीच एक ऐसा घटनाक्रम हुआ जिसने सबको चौंका दिया—EU के सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल कश्मीर पहुँचा, और यह यात्रा किसी सरकारी प्रेस नोट के ज़रिए नहीं, बल्कि माडी शर्मा नाम की एक महिला के ईमेल्स से दुनिया के सामने आई। बाद में लीक हुए ईमेल्स ने दिखाया कि यह पूरा दौरा माडी शर्मा द्वारा आयोजित कराया गया था। सवाल यह था कि किस अधिकार से?
सबसे बड़ा रहस्य यही था कि माडी शर्मा की पहुंच सीधे PMO तक कैसे थी? वह अचानक ऐसे प्रकट हुईं जैसे किसी अदृश्य शक्ति ने उन्हें भारतीय राजनीति के केंद्र में उतार दिया हो। PM मोदी के साथ उनकी कई तस्वीरें उस समय मीडिया में घूमने लगीं। ऐसा लगने लगा कि यह महिला भारत की विदेश नीति, आंतरिक सुरक्षा और संवेदनशील कश्मीर मुद्दे से जुड़े संवाद की एक अनौपचारिक लेकिन अत्यंत प्रभावशाली कड़ी बन चुकी है।
जब यह मामला गरमाया, राहुल गांधी ने संसद और सार्वजनिक मंचों पर सीधे प्रधानमंत्री से सवाल दागे—
माडी शर्मा कौन है? प्रधानमंत्री का माडी शर्मा से क्या संबंध है? सरकार ने माडी शर्मा को अधिकृत कैसे किया? जब भारतीय सांसदों को कश्मीर जाने की अनुमति नहीं थी, तब विदेशी सांसद कश्मीर कैसे गए?
इन सवालों के जवाब न उस समय मिले, न आज तक। लेकिन जो सबसे चौंकाने वाली बात हुई, वह थी—माडी शर्मा का अचानक गायब हो जाना। जिस महिला का नाम दिनों तक मीडिया हेडलाइंस में था, वह ऐसे ओझल हुई मानो जमीन फटकर निगल गई हो या आसमान गटक गया हो। भारतीय मीडिया ने धीरे-धीरे माडी शर्मा की चर्चा बंद कर दी। यह चुप्पी और भी लंबे सवाल छोड़ गई।
आज, जब भारत की राजनीति में पारदर्शिता, विदेशी प्रभाव और सत्ता–लॉबिंग जैसे मुद्दे गर्म हैं, माडी शर्मा का मामला और भी प्रासंगिक हो जाता है। कई विश्लेषक अब भी यह मानते हैं कि अनुच्छेद 370 हटाए जाने और माडी शर्मा की गतिविधियों के बीच की कड़ी एक बड़ी राजनीतिक पहेली है, जिसे कभी सुलझाया नहीं गया। क्या वह सिर्फ एक NGO कार्यकर्ता थीं? क्या वह किसी अंतरराष्ट्रीय एजेंडे का हिस्सा थीं? या वह भारत की सत्ता के सबसे ऊपरी स्तरों के साथ किसी गहन रणनीतिक भूमिका में थीं? किसी के पास कोई स्पष्ट जवाब नहीं।
मोदी सत्ता में आए तब से—यह भी एक दिलचस्प पैटर्न माना जाता है—कि समय-समय पर PMO या CMO से जुड़ी किसी महिला का नाम बड़ी राजनीतिक चर्चा का विषय बनता रहा है। हर बार एक नया नाम, एक नया विवाद और एक नई कहानी। लेकिन माडी शर्मा का प्रकरण उनमें सबसे रहस्यमयी रहा है—क्योंकि यह केवल किसी व्यक्ति का मामला नहीं था, बल्कि कश्मीर की अंतरराष्ट्रीय राजनीति से सीधा जुड़ा था।
आज, कई साल बाद, इस कहानी पर परतें फिर खुल रही हैं। इंटरनेट पर माडी शर्मा को खोजने वाले लोग अब भी वही सवाल पूछते हैं— वह कौन थी? कहाँ गई? और वह भारत की सत्ता संरचना के सबसे ऊंचे स्तर तक कैसे पहुँची थी? एक बात तो तय है—भारतीय राजनीति की यह रहस्यमयी महिला भले ही गायब हो चुकी हो, लेकिन उसकी कहानी अब भी वहीं खड़ी है, अपने जवाबों की प्रतीक्षा में।




