एबीसी नेशनल न्यूज | नई दिल्ली | 11 मार्च 2026
अंतरराष्ट्रीय मुद्दों और घरेलू राजनीति को लेकर एक नई बहस उस समय छिड़ गई जब कांग्रेस से जुड़े नेताओं और समर्थकों द्वारा सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा की गई। इस पोस्ट में दुनिया के अलग-अलग देशों के नेताओं द्वारा उठाए जा रहे बड़े वैश्विक और राष्ट्रीय मुद्दों की तुलना भारत की राजनीति से करते हुए प्रधानमंत्री पर व्यंग्य किया गया है। कांग्रेस से जुड़े कई सोशल मीडिया अकाउंट्स ने दावा किया कि जब दुनिया के कई देश सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और सामाजिक चुनौतियों जैसे गंभीर विषयों पर चर्चा कर रहे हैं, तब भारत में चुनावी भाषणों में राज्य के नाम बदलने जैसे मुद्दे सामने रखे जा रहे हैं।
वायरल पोस्ट में कहा गया है कि अमेरिका में पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ऊर्जा सुरक्षा और ऑयल रिफाइनरी जैसे रणनीतिक विषयों पर अपने देश को संबोधित कर रहे हैं। इसी तरह स्पेन के प्रधानमंत्री Pedro Sánchez स्वास्थ्य बीमा और सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था को लेकर देशवासियों से संवाद कर रहे हैं।
पोस्ट में पश्चिम एशिया के हालात का भी जिक्र किया गया है। इसमें कहा गया है कि क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच ईरान में सर्वोच्च नेता Ali Khamenei के बेटे Mojtaba Khamenei सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग Strait of Hormuz से जुड़े हालात पर देश को संबोधित कर रहे हैं। वहीं फ्रांस के राष्ट्रपति Emmanuel Macron बच्चों और युवाओं में इंटरनेट के बढ़ते उपयोग और उससे होने वाले संभावित दुष्प्रभावों को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस चला रहे हैं।
इन उदाहरणों के बीच पोस्ट में भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi को लेकर तंज किया गया है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि जब दुनिया के कई देशों में सरकारें बड़े नीतिगत और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा कर रही हैं, तब भारत में चुनावी राजनीति में राज्य के नाम बदलने जैसे मुद्दों को प्रमुखता दी जा रही है। पोस्ट में विशेष रूप से केरल का नाम बदलकर “केरलम” करने के संदर्भ का उल्लेख करते हुए कहा गया कि इसके लिए वोट मांगे जा रहे हैं।
यह पोस्ट सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से वायरल हो रही है और इसे लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं। कांग्रेस समर्थक इसे सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाने वाला उदाहरण बता रहे हैं, जबकि भारतीय जनता पार्टी के समर्थकों का कहना है कि यह तुलना भ्रामक और राजनीतिक रूप से प्रेरित है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि सोशल मीडिया अब राजनीतिक विमर्श का बड़ा मंच बन चुका है, जहां इस तरह की तुलनाएं और व्यंग्यात्मक टिप्पणियां तेजी से फैलती हैं और सार्वजनिक बहस को प्रभावित करती हैं। हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि ऐसे पोस्टों को पढ़ते समय उनके संदर्भ और तथ्यों की जांच करना भी उतना ही जरूरी है, क्योंकि कई बार व्यंग्य और वास्तविक घटनाओं के बीच की रेखा धुंधली हो जाती है।




