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जब पूरा कुनबा पहुंचा पानी के कुंड पर

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एबीसी नेशनल न्यूज | 13 फरवरी 2026

जंगल की सुबह अभी पूरी तरह जागी भी नहीं थी। धूप की हल्की किरणें पेड़ों की पत्तियों के बीच से छनकर ज़मीन पर बिखर रही थीं। हवा में मिट्टी और घास की सोंधी खुशबू थी। उसी शांत क्षण में जंगल का रास्ता एक अलग ही आहट से भर उठा—मुलायम कदमों की थाप, सूखी पत्तियों की सरसराहट और एक अदृश्य अनुशासन की छाप।

यह कोई साधारण आगमन नहीं था। यह था गोंठांगांव ज़ोन की प्रसिद्ध और अनुभवी माँ—एफ2—का अपने पूरे कुनबे के साथ जलकुंड पर पहुंचना। उमरेड करहांडला टाइगर रिज़र्व की इस जलधारा पर जैसे ही वह उतरी, पूरा माहौल बदल गया। आगे-आगे वही, पीछे उसके शावक और परिवार के अन्य सदस्य। उसकी चाल में आत्मविश्वास था, आंखों में सतर्कता और हर हरकत में नेतृत्व की स्पष्ट छाप।

पानी के किनारे पहुंचते ही शावकों की बेचैनी साफ झलक रही थी। लंबी सैर और उमस भरे जंगल ने उनकी प्यास बढ़ा दी थी। मगर मां की मौजूदगी में सब कुछ एक नियम के तहत होता है। पहले उसने चारों ओर नजर दौड़ाई—कहीं कोई खतरा तो नहीं। हवा को सूंघा, जंगल की खामोशी को परखा। जब उसे यकीन हो गया कि सब सुरक्षित है, तभी उसने हल्के से सिर झुकाकर पानी की ओर इशारा किया।

और फिर वह दृश्य बना, जिसे देख हर सफारी प्रेमी सांस थाम ले—पूरा परिवार एक कतार में बैठा, जीभ से पानी की सतह को छूता हुआ। शावकों की धारियां धूप में चमक रही थीं, उनके कान फड़क रहे थे, और हर घूंट के साथ उनकी थकान कम होती जा रही थी। मां बीच-बीच में सिर उठाकर निगरानी करती रही। उसका एक इशारा काफी था सबको अनुशासन में रखने के लिए।

जंगल में यह सिर्फ पानी पीने का पल नहीं था, यह जीवन का उत्सव था। यहां कोई शोर नहीं, कोई दिखावा नहीं—सिर्फ प्रकृति का संतुलन और एक मां का स्नेहिल, मगर दृढ़ नेतृत्व। एफ2 केवल एक बाघिन नहीं, इस क्षेत्र की पहचान है। उसने कई मौसम देखे हैं, कई चुनौतियों का सामना किया है और अपने शावकों को जीने का हुनर सिखाया है—सतर्क रहना, साथ रहना और सही समय पर आगे बढ़ना।

जब प्यास बुझ गई और सूरज थोड़ा ऊपर चढ़ आया, तो वह फिर उठी। एक नज़र अपने परिवार पर डाली और उसी शांति से जंगल की हरियाली में खो गई, जैसे आई थी। पीछे रह गया तो बस पानी की सतह पर हल्की-सी लहर और उन पलों की याद, जो जंगल की आत्मा को जीवित रखते हैं।

उमरेड करहांडला की उस सुबह ने फिर साबित कर दिया—जंगल में राज सिर्फ ताकत का नहीं, नेतृत्व और संतुलन का भी होता है। और उस दिन, उस जलकुंड पर, नेतृत्व स्पष्ट रूप से एफ2 के हाथ में था।

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