एबीसी नेशनल न्यूज | नई दिल्ली | 21 फरवरी 2026
वजन घटाने वाली नई दवाएं अब केवल स्वास्थ्य और फिटनेस तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि उनका प्रभाव वैश्विक अर्थव्यवस्था के कई क्षेत्रों में दिखाई देने लगा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इन दवाओं के बढ़ते उपयोग से लोगों की खान-पान की आदतें, यात्रा का पैटर्न और यहां तक कि कपड़ों की मांग भी बदल रही है।
रिपोर्टों के मुताबिक, मोटापा कम करने में प्रभावी मानी जा रही इन दवाओं के कारण खाद्य और पेय उद्योग पर सीधा असर पड़ सकता है। जब लोग कम कैलोरी और सीमित भोजन की ओर बढ़ते हैं, तो स्नैक्स, मीठे पेय और फास्ट फूड की मांग में गिरावट की आशंका जताई जा रही है। इससे बड़ी खाद्य कंपनियां अपने उत्पाद पोर्टफोलियो और रणनीतियों में बदलाव पर विचार कर रही हैं।
एयरलाइन उद्योग में भी इसका अप्रत्यक्ष प्रभाव देखने की चर्चा है। यदि बड़े पैमाने पर लोगों का औसत वजन कम होता है, तो ईंधन खपत और परिचालन लागत पर सकारात्मक असर पड़ सकता है। हालांकि यह प्रभाव धीरे-धीरे और सीमित स्तर पर ही दिखाई देगा, लेकिन लंबी अवधि में उद्योग के लिए यह महत्वपूर्ण कारक बन सकता है।
परिधान उद्योग भी इस बदलाव से अछूता नहीं है। वजन घटाने की प्रवृत्ति बढ़ने से कपड़ों के आकार और फैशन की मांग में बदलाव आने की संभावना है। कुछ ब्रांड पहले ही फिटनेस और एक्टिव लाइफस्टाइल से जुड़े उत्पादों पर ज्यादा ध्यान देने लगे हैं, जिससे बाजार की दिशा बदलती नजर आ रही है।
स्वास्थ्य क्षेत्र में इन दवाओं की बढ़ती लोकप्रियता ने दवा कंपनियों के शेयर और निवेश को भी प्रभावित किया है। निवेशकों की नजर अब उन कंपनियों पर है जो मोटापा और मेटाबोलिक बीमारियों के इलाज से जुड़ी दवाएं विकसित कर रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव केवल एक स्वास्थ्य ट्रेंड नहीं, बल्कि उपभोक्ता व्यवहार में गहरे परिवर्तन का संकेत है। जब लोगों की जीवनशैली बदलती है, तो उसके असर अर्थव्यवस्था के कई क्षेत्रों में दिखाई देते हैं।
फिलहाल वजन घटाने की दवाओं का प्रभाव धीरे-धीरे सामने आ रहा है, लेकिन यह साफ है कि आने वाले वर्षों में यह स्वास्थ्य, उद्योग और उपभोक्ता बाजार—तीनों के लिए एक महत्वपूर्ण आर्थिक कारक बन सकता है।




