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WATCH VIDEO — घर-घर मोदी’ से कैंपेन शुरू किया था, वो आज ‘थर-थर मोदी’ हो गया है : पवन खेड़ा

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एबीसी नेशनल न्यूज | नई दिल्ली | 13 फरवरी 2026

नई दिल्ली | एपस्टीन फाइल्स को लेकर देश की राजनीति में एक बार फिर सियासी पारा चढ़ गया है। कांग्रेस के मीडिया एवं पब्लिसिटी विभाग के चेयरमैन पवन खेड़ा ने केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि वे सच्चाई को तोड़-मरोड़ कर पेश कर रहे हैं और देश से अहम तथ्य छिपा रहे हैं।

खेड़ा ने आरोप लगाया कि पुरी केवल Reid Hoffman को भेजे गए ईमेल की चुनिंदा बातें सार्वजनिक कर रहे हैं, जबकि Jeffrey Epstein के साथ अपने संपर्क और संवाद को कमतर दिखाने की कोशिश कर रहे हैं। कांग्रेस का कहना है कि यह मामला सिर्फ व्यक्तिगत मुलाकातों का नहीं, बल्कि संभावित रूप से संवेदनशील सूचनाओं के आदान-प्रदान से जुड़ा हो सकता है, जिसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है।

डिजिटल इंडिया की टाइमलाइन पर सवाल

कांग्रेस ने 13 नवंबर 2014 के उस कथित ईमेल का मुद्दा उठाया है, जिसमें ‘Digital India’ से जुड़ी जानकारी साझा किए जाने की बात सामने आई है। जबकि इस पहल की औपचारिक शुरुआत जुलाई 2015 में हुई थी।

पवन खेड़ा ने सवाल उठाया कि यदि किसी निजी व्यक्ति को आधिकारिक लॉन्च से पहले ऐसी जानकारी मिली, तो वह किस माध्यम से और किस हैसियत से साझा की गई? उस समय हरदीप पुरी सरकार का औपचारिक हिस्सा भी नहीं थे—ऐसे में उन्हें यह जानकारी कैसे प्राप्त हुई? कांग्रेस का कहना है कि यह केवल संयोग नहीं हो सकता और इसकी गहन जांच होनी चाहिए।

बयानों में विरोधाभास का आरोप

हरदीप सिंह पुरी ने एक इंटरव्यू में कहा था कि उनकी एपस्टीन से “बहुत ज्यादा बातचीत नहीं हुई”, केवल कुछ ईमेल और तीन-चार मुलाकातें हुईं। वहीं एक अन्य बयान में उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी अपॉइंटमेंट नहीं मांगा।

कांग्रेस ने कथित ईमेल संदेश—“Jeff, Can I See You?” और “Are You In Town?”—का हवाला देते हुए इसे सीधा विरोधाभास बताया है। खेड़ा ने कहा कि यदि अपॉइंटमेंट नहीं मांगा गया, तो ये संदेश क्या दर्शाते हैं? क्या ये महज सामाजिक मुलाकातें थीं या किसी बड़े एजेंडे का हिस्सा?

नैतिकता और जवाबदेही का प्रश्न

कांग्रेस का तर्क है कि 2008 में अपने अपराध स्वीकार करने के बाद एपस्टीन का आपराधिक रिकॉर्ड सार्वजनिक था। ऐसे में 2014-16 के दौरान उससे किसी भी प्रकार का संपर्क गंभीर नैतिक सवाल खड़े करता है।

खेड़ा ने पूछा कि जब अमेरिका में उस समय भारत के तीन राजदूत तैनात थे, तो रिटायर हो चुके हरदीप पुरी को किस भूमिका में एपस्टीन से मिलने भेजा गया? क्या यह किसी आधिकारिक जिम्मेदारी के तहत हुआ या निजी स्तर पर?

प्रधानमंत्री से सीधा सवाल

कांग्रेस ने सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जवाब मांगा है। खेड़ा ने कहा, “देश जानना चाहता है कि क्या सरकार की नीतियों और योजनाओं की जानकारी निजी चैनलों से साझा की जा रही थी? क्या प्रधानमंत्री कार्यालय को इन मुलाकातों की जानकारी थी?”

इसी संदर्भ में खेड़ा ने तंज कसते हुए कहा, “जिन्होंने अपना कैंपेन ‘घर-घर मोदी’ से शुरू किया था, वो आज ‘थर-थर मोदी’ हो गया है।”

मीडिया की भूमिका पर भी सवाल

कांग्रेस ने मीडिया के एक हिस्से की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। खेड़ा का आरोप है कि कुछ मीडिया संस्थान इस मामले को हल्के में लेने या संदर्भ से हटाकर प्रस्तुत करने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे वास्तविक मुद्दे दब रहे हैं।

फिलहाल सरकार की ओर से विस्तृत प्रतिक्रिया का इंतजार है। लेकिन विपक्ष के तीखे हमलों ने इस विवाद को राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद और सियासत—दोनों में और गरमाने के संकेत दे रहा है।

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