अंतरराष्ट्रीय डेस्क | 19 दिसंबर 2025
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी इन दिनों पांच दिन की जर्मनी यात्रा पर हैं। इस दौरान वह बर्लिन से म्यूनिख तक कई बैठकों, संवाद कार्यक्रमों और मुलाकातों में शामिल हुए। हर मंच पर उनकी बात का केंद्र रहा—बदलती दुनिया में भारत की भूमिका, लोकतंत्र की मजबूती, जलवायु संकट और भारत-जर्मनी के रिश्तों को आगे बढ़ाना। यह यात्रा 15 दिसंबर से शुरू हुई है और 20 दिसंबर तक चलेगी।
जर्मनी में राहुल गांधी ने थिंक टैंक्स, शिक्षाविदों और नीति विशेषज्ञों से खुलकर बातचीत की। उन्होंने सरल शब्दों में कहा कि लोकतंत्र केवल सत्ता चलाने की व्यवस्था नहीं है, बल्कि यह जनता की भागीदारी, जवाबदेही और जिम्मेदारी से जुड़ा होता है। उनका कहना था कि आज के समय में लोकतांत्रिक मूल्यों और सच्चाई की रक्षा पहले से कहीं ज्यादा जरूरी हो गई है।
बर्लिन में आयोजित एक विशेष चर्चा “India in a Changing World” में राहुल गांधी ने छात्रों और शोधकर्ताओं से सीधा संवाद किया। उन्होंने अपने जीवन और राजनीति के अनुभव साझा किए और कहा कि शिक्षा, बराबरी के मौके और सामाजिक न्याय के बिना कोई भी लोकतंत्र मजबूत नहीं हो सकता। इस कार्यक्रम ने भारत और जर्मनी के बीच विचारों और समझ का सेतु मजबूत किया।
राहुल गांधी ने बर्लिन में भारतीय प्रवासी समुदाय को भी संबोधित किया। इंडियन ओवरसीज कांग्रेस के “Connecting Cultures” कार्यक्रम में उन्होंने भावुक शब्दों में कहा,
“हम भारत की सच्चाई की रक्षा करते हैं।”
उन्होंने विदेशों में रहने वाले भारतीयों को भारत का सच्चा दूत बताया और कहा कि वे दुनिया में भारत की छवि बनाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
इस यात्रा में राहुल गांधी की मुलाकात जर्मनी के पूर्व चांसलर ओलाफ शोल्ज से भी हुई। लंच मीटिंग के दौरान वैश्विक राजनीति, व्यापार और भारत-जर्मनी सहयोग पर विस्तार से चर्चा हुई। राहुल गांधी ने कहा कि ऐसे संवाद बदलती दुनिया में साझा समझ और सहयोग को मजबूत करते हैं।
राहुल गांधी ने जर्मनी के पर्यावरण और जलवायु संरक्षण मंत्री कार्स्टेन श्नाइडर से भी मुलाकात की। बातचीत में जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण सुरक्षा पर खास ध्यान रहा। राहुल गांधी ने कहा कि जलवायु संकट किसी एक देश की नहीं, बल्कि पूरी मानवता की चुनौती है और इससे निपटने के लिए सभी देशों को मिलकर काम करना होगा। दोनों पक्षों ने नवीकरणीय ऊर्जा और टिकाऊ विकास पर सहयोग बढ़ाने की बात कही।
यात्रा के दौरान राहुल गांधी म्यूनिख में बीएमडब्ल्यू की फैक्ट्री भी पहुंचे। वहां उन्होंने भारतीय इंजीनियरों के योगदान की सराहना की और कहा कि भारत में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को मजबूत करना जरूरी है, ताकि युवाओं के लिए ज्यादा रोजगार के अवसर पैदा हो सकें।
कुल मिलाकर, राहुल गांधी की जर्मनी यात्रा भारत की वैश्विक सोच और जिम्मेदारी को सामने रखने वाली रही। लोकतंत्र, पर्यावरण, व्यापार और प्रवासी भारतीयों से जुड़े मुद्दों पर उनकी साफ और मानवीय बातों ने यह संदेश दिया कि बदलती दुनिया में भारत एक समझदार, जिम्मेदार और मजबूत देश के रूप में आगे बढ़ रहा है।




