एबीसी नेशनल न्यूज | भोपाल | 24 फरवरी 2026
महाचौपाल से सीधे केंद्र पर निशाना
भोपाल में आयोजित कांग्रेस की किसान महाचौपाल में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने बेहद आक्रामक तेवर अपनाते हुए केंद्र सरकार पर एक साथ कई मोर्चों पर हमला बोला। उन्होंने भारत-अमेरिका ट्रेड डील को किसानों और छोटे उद्योगों के लिए खतरा बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खुली चुनौती दी कि अगर सरकार वास्तव में किसानों के हित में खड़ी है तो इस समझौते की समीक्षा कर उसे रद्द करके दिखाए। राहुल गांधी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई देशों ने अपने व्यापार समझौतों की शर्तों पर दोबारा बातचीत की है, लेकिन भारत की चुप्पी यह संकेत देती है कि सरकार घरेलू हितों की तुलना में बाहरी दबावों को ज्यादा महत्व दे रही है। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल तुरंत गरमा गया और महाचौपाल राष्ट्रीय बहस का केंद्र बन गई।
सीमा सुरक्षा के मुद्दे पर सरकार से जवाब की मांग
अपने संबोधन के दौरान राहुल गांधी ने पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे की पुस्तक का हवाला देते हुए सीमा सुरक्षा से जुड़े फैसलों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि संवेदनशील हालात में सैन्य नेतृत्व को स्पष्ट राजनीतिक दिशा मिलना बेहद जरूरी होता है और यदि इस प्रक्रिया में कोई भ्रम या देरी की स्थिति सामने आती है तो उस पर संसद और जनता के बीच खुली चर्चा होनी चाहिए। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे अहम मुद्दों पर पारदर्शिता की कमी लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ है और सरकार को इन सवालों से बचने के बजाय स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर गहरा फोकस
राहुल गांधी ने अपने भाषण का बड़ा हिस्सा किसानों की समस्याओं पर केंद्रित रखते हुए कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था का आधार किसान हैं और किसी भी अंतरराष्ट्रीय व्यापार नीति का सबसे ज्यादा असर उन्हीं पर पड़ता है। उन्होंने दावा किया कि असंतुलित आयात नीति से कपास, खाद्यान्न और अन्य कृषि उत्पादों की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है, जिससे किसानों की आय और ग्रामीण बाजार दोनों प्रभावित होंगे। राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस किसानों के हितों पर किसी भी तरह का समझौता नहीं होने देगी और यदि जरूरत पड़ी तो इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर आंदोलन का रूप दिया जाएगा।
टेक्सटाइल और घरेलू उद्योग को लेकर चेतावनी
सभा में राहुल गांधी ने कपड़ा उद्योग और छोटे-मध्यम उद्यमों की स्थिति पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि यदि व्यापार समझौतों के कारण विदेशी उत्पादों को आसान प्रवेश मिलता है तो देश के पारंपरिक उद्योगों और रोजगार पर सीधा असर पड़ सकता है। उनके अनुसार भारत जैसे देश में जहां बड़ी आबादी कृषि और छोटे उद्योगों पर निर्भर है, वहां व्यापारिक फैसलों का संतुलन बेहद सावधानी से करना जरूरी है, अन्यथा रोजगार और उत्पादन दोनों पर दबाव बढ़ सकता है।
डेटा और डिजिटल संप्रभुता पर सवाल
राहुल गांधी ने डिजिटल अर्थव्यवस्था और डेटा सुरक्षा को भविष्य की सबसे बड़ी चुनौती बताते हुए कहा कि डेटा आज की दुनिया में रणनीतिक संपत्ति बन चुका है। उन्होंने आशंका जताई कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग के नाम पर यदि डेटा सुरक्षा से समझौता किया गया तो घरेलू टेक उद्योग और रोजगार के अवसर प्रभावित हो सकते हैं। राहुल गांधी ने सरकार से मांग की कि वह स्पष्ट रूप से बताए कि वैश्विक साझेदारी के साथ-साथ देश की तकनीकी संप्रभुता और नागरिकों की डेटा सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जा रही है।
सत्तापक्ष का पलटवार और राजनीतिक टकराव
राहुल गांधी के तीखे आरोपों के बाद सत्तारूढ़ पक्ष ने तुरंत पलटवार करते हुए उनके बयानों को राजनीतिक बताया। सरकार से जुड़े नेताओं ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय व्यापार से जुड़े फैसले विशेषज्ञों की सलाह और दीर्घकालिक रणनीति के आधार पर लिए जाते हैं और विपक्ष तथ्यों की अनदेखी कर माहौल बनाने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत की वैश्विक साझेदारियां निवेश, तकनीक और निर्यात के अवसर बढ़ाने के लिए जरूरी हैं और किसानों के हितों की अनदेखी का सवाल ही नहीं उठता।
राजनीतिक असर और आगे की संभावित बहस
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भोपाल की किसान महाचौपाल ने आने वाले समय की राजनीतिक बहस का स्वर तय कर दिया है। किसान, व्यापार, डेटा सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दे अब चुनावी विमर्श के केंद्र में बने रहेंगे और सत्ता-विपक्ष के बीच टकराव और तेज होने की संभावना है। राहुल गांधी के आक्रामक रुख और सरकार के जवाबी तेवरों के बीच यह स्पष्ट है कि इन मुद्दों पर बहस लंबी चलेगी, जबकि किसानों और उद्योग जगत की नजर सरकार की नीतिगत प्रतिक्रिया और संभावित फैसलों पर बनी रहेगी।




