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WATCH VIDEO — इंडिया–यूएस ट्रेड डील पर घमासान: कांग्रेस पर राष्ट्रहित की अनदेखी का आरोप, सरकार ने मंत्रियों को उतारा मैदान में

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एबीसी नेशनल न्यूज | नई दिल्ली | 15 फरवरी 2026

भारत–अमेरिका ट्रेड डील को लेकर सियासी संग्राम तेज हो गया है। एक ओर कांग्रेस नेता Rahul Gandhi लगातार समझौते की शर्तों पर सवाल उठा रहे हैं, तो दूसरी ओर सरकार अब अपने कई मंत्रियों को सामने लाकर डील के पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश कर रही है।

केंद्रीय मंत्री Shivraj Singh Chouhan ने कांग्रेस पर राष्ट्रहित की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। सोशल मीडिया पर जारी बयान में उन्होंने कहा कि देश इस समय आर्थिक विकास के महत्वपूर्ण दौर से गुजर रहा है और वैश्विक मंच पर भारत की स्थिति लगातार मजबूत हो रही है। ऐसे समय में, उनके अनुसार, कांग्रेस और राहुल गांधी “झूठ और भ्रम फैलाने” की राजनीति कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब देश बड़े अंतरराष्ट्रीय समझौते कर रहा है, तब विपक्ष को रचनात्मक भूमिका निभानी चाहिए, न कि विकास प्रक्रिया पर संदेह पैदा करना चाहिए।

राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि राहुल गांधी द्वारा संसद और सार्वजनिक मंचों पर ट्रेड डील को लेकर उठाए गए सवालों के बाद सरकार ने रणनीति बदली है। प्रधानमंत्री की ओर से लोकसभा में विस्तृत बयान न आने के बाद अब अलग-अलग मंत्री मीडिया और सोशल मीडिया के माध्यम से सरकार का पक्ष रख रहे हैं।

इसी क्रम में केंद्रीय मंत्री Pralhad Joshi ने भारत–अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते को भारत के टेक्सटाइल सेक्टर के लिए “नए विकास अध्याय” की शुरुआत बताया। उन्होंने कहा कि इस समझौते से भारतीय वस्त्र उद्योग को अमेरिकी बाजार में बेहतर पहुंच मिलेगी, निर्यात बढ़ेगा और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। जोशी ने यह भी दावा किया कि सरकार ने किसानों, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों (MSME) तथा निर्यातकों के हितों को ध्यान में रखकर ही समझौते को आगे बढ़ाया है।

वहीं कांग्रेस का कहना है कि सरकार पारदर्शिता नहीं बरत रही और समझौते के कुछ प्रावधान किसानों, छोटे व्यापारियों और घरेलू उद्योगों के लिए नुकसानदेह हो सकते हैं। पार्टी संसद में विस्तृत चर्चा और दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग कर रही है।

सत्ता पक्ष इसे भारत की आर्थिक मजबूती और वैश्विक स्वीकार्यता का संकेत बता रहा है, जबकि विपक्ष इसे संभावित जोखिमों से जोड़कर देख रहा है।

स्पष्ट है कि इंडिया–यूएस ट्रेड डील आने वाले दिनों में संसद, मीडिया और सोशल मीडिया—तीनों जगह सियासी बहस का बड़ा मुद्दा बनी रहेगी।

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