अंतरराष्ट्रीय ब्यूरो 10 नवंबर 2025
“सात समुंदर पार वोट चोरी का सफ़र : मोदी–ECI–BJP का गठजोड़ ब्राज़ील में विकास पैदा कर रहा है” — यह हेडलाइन किसी अतिशयोक्ति का परिणाम नहीं, बल्कि भारत के चुनावी फर्जीवाड़े की उस कड़वी सच्चाई को उजागर करती है जिसने अब सात समंदर पार तक अपनी “पहुँच” साबित कर दी है। जिस तरह विश्वात्मा के गाने में प्रेमिका अपने प्रेमी के पीछे-पीछे सात समंदर पार चली जाती है, ठीक उसी तरह भारत की वोट चोरी—मोदी शासन, चुनाव आयोग और बीजेपी के गठजोड़ के सहारे—ब्राज़ील जैसी दूरस्थ धरती तक पहुँच चुकी है। हरियाणा की मतदाता सूची में एक ब्राज़ीलियन मॉडल की फोटो का इस्तेमाल सिर्फ एक तकनीकी भूल नहीं, बल्कि इस “विकास मॉडल” की अंतरराष्ट्रीय शाखा है, जहाँ चुनाव आयोग की चुप्पी, सत्ता की ठंडी मुस्कान और बीजेपी की रहस्यमय जवाबदेही मिलकर ऐसा प्रभाव पैदा कर रहे हैं जैसे भारत के चुनावी घोटाले ने अब विदेशों में भी पैर पसारने शुरू कर दिए हों। ब्राज़ील का टीवी चैनल इस फर्जीवाड़े को रिपोर्ट कर रहा है, मॉडेल नाराज़ होकर बयान दे रही है, और दुनिया पूछ रही है—क्या यही है नया भारत, जिसके लोकतांत्रिक ‘विकास’ का असर अब सात समंदर पार भी दिखाई दे रहा है? यह वह क्षण है जब भारत का लोकतंत्र प्रेमगीत की छवि नहीं, बल्कि एक अंतरराष्ट्रीय शर्मिंदगी के रूप में पुनर्परिभाषित हो रहा है।
भारत में जिस “वोट चोरी” का आरोप विपक्ष लगाता रहा, वह अब दुनिया के सामने एक ठोस उदाहरण के रूप में उभर चुका है। ब्राज़ील के सबसे प्रमुख टीवी न्यूज़ चैनलों में से एक ने खुलकर शो प्रसारित किया, जिसमें नरेंद्र मोदी, भारतीय चुनाव आयोग (ECI) और बीजेपी पर गंभीर सवाल उठाते हुए बताया गया कि हरियाणा की मतदाता सूची में एक ब्राज़ीलियन मॉडल की फोटो डालकर वोटर लिस्ट फर्जी बनाने की कोशिश हुई। यह घटना सिर्फ भारतीयों को ही नहीं, बल्कि ब्राज़ील के नागरिकों को भी दंग कर गई।
ब्राज़ीलियन टीवी रिपोर्टर ने भारत की राजनीति में छाए तूफ़ान को दिखाते हुए राहुल गांधी की वह प्रेस कॉन्फ्रेंस भी चलाई, जिसमें वे तस्वीर दिखाकर पूछ रहे थे —
“Who is that model?”
राहुल गांधी के यही सवाल अब ब्राज़ील के लोग भी पूछ रहे हैं—कि हरियाणा की मतदाता कैसे बन गई वह युवती, जो असल में ब्राज़ील की सोशल मीडिया मॉडल Larissa Nery है?
Larissa Nery अब चुप नहीं है। वह बेहद नाराज़ है कि उसकी तस्वीर को बिना अनुमति भारत की वोटर लिस्ट में इस्तेमाल किया गया। उसने साफ़ कहा कि वह हैरान और क्रोधित है कि उसका चेहरा एक विदेशी देश के चुनाव में फर्जी पहचान के साथ जोड़ा गया। उसका बयान साफ़-साफ़ यह दर्शाता है कि यह सिर्फ एक तकनीकी गलती नहीं, बल्कि बेहद गैर-ज़िम्मेदाराना और संदिग्ध चुनावी प्रक्रिया है जिसे भारत का चुनाव आयोग नियंत्रित करने में पूरी तरह नाकाम रहा है।
ब्राज़ील में चल रही टीवी डिबेट में एंकरों ने कहा कि भारत का यह मामला सीधा चुनावी धांधली की श्रेणी में आता है—जहाँ मतदाता सूचियों में फर्जी नाम, चोरी की तस्वीरें और अब विदेशी नागरिकों तक की फोटो का उपयोग शामिल है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत में सत्ता पक्ष और चुनाव आयोग की चुप्पी इसे और अधिक संदिग्ध बनाती है, क्योंकि यह वही देश है जो दुनिया को लोकतंत्र का पाठ पढ़ाता है लेकिन अपनी ही मतदाता सूची को सुरक्षित रखने में विफल हो रहा है।
भारत में यह सवाल दिनों से पूछा जा रहा है कि चुनाव आयोग इस फर्जीवाड़े पर पूरी तरह चुप क्यों है? वही चुनाव आयोग जो तमिलनाडु, बंगाल जैसे राज्यों में एक-एक रुपये की मुफ्त योजना पर रोक लगा देता है, वही आयोग हरियाणा के इस बेशर्म और हद पार कर चुके फर्जीवाड़े पर मौन क्यों है? क्या वह सिर्फ भाजपा के इशारे पर चलने वाली राजनीतिक इकाई बन चुका है? क्या यह वही चुनाव आयोग है जिसने कभी अपनी निष्पक्षता के लिए देश-विदेश में सम्मान पाया था?
अब जबकि ब्राज़ील की मीडिया में यह मामला तहलका मचा रहा है, भारत की अंतरराष्ट्रीय साख को भारी चोट पहुँची है। लोकतंत्र की पवित्रता का दावा करने वाले देश की मतदाता सूची में एक विदेशी मॉडल की तस्वीर मिलना किसी तकनीकी ‘गड़बड़ी’ से नहीं, बल्कि एक गंभीर संस्थागत पतन का संकेत है। और उस पतन के दोषियों में अब भाजपा, चुनाव आयोग और उनकी मिलीभगत पर खुले तौर पर उंगली उठ रही है।
यह स्पष्ट हो चुका है— वोट चोरी अब सिर्फ भारत का घरेलू मुद्दा नहीं रहा। यह वैश्विक स्तर पर मोदी सरकार, बीजेपी और ECI की छवि पर सबसे बड़ा धब्बा बन चुका है।
सात समंदर पार भी अब दुनिया पूछ रही है —“Modi’s India, what is happening to your democracy?”




