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अमेरिका में साल में दो बार घड़ी बदलने की परंपरा खत्म करने की तैयारी, प्रतिनिधि सभा ने विधेयक किया पारित

अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | वॉशिंगटन | 16 जुलाई 2026

अमेरिका में साल में दो बार घड़ियां आगे-पीछे करने की दशकों पुरानी व्यवस्था अब समाप्त हो सकती है। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) ने मंगलवार को ‘सनशाइन प्रोटेक्शन एक्ट’ (Sunshine Protection Act) को भारी बहुमत से पारित कर दिया। इस विधेयक के पक्ष में 308 सांसदों ने मतदान किया, जबकि 117 सांसदों ने इसका विरोध किया।

यदि यह विधेयक सीनेट से भी पारित होकर राष्ट्रपति के हस्ताक्षर प्राप्त कर लेता है, तो अमेरिका में डेलाइट सेविंग टाइम (Daylight Saving Time) पूरे साल लागू रहेगा और लोगों को हर साल मार्च और नवंबर में अपनी घड़ियां बदलने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

विधेयक को फ्लोरिडा के रिपब्लिकन सांसद वर्न बुकानन ने पेश किया था। उन्होंने कहा कि साल में दो बार घड़ी बदलने की व्यवस्था लोगों की दिनचर्या, कारोबार और स्वास्थ्य पर अनावश्यक असर डालती है। उनके अनुसार, अब इस पुरानी व्यवस्था को समाप्त करने का समय आ गया है।

प्रतिनिधि सभा में मतदान के दौरान एक दिलचस्प दृश्य भी देखने को मिला। मतदान की अंतिम गिनती के समय सदन की कार्यवाही का संचालन कर रहे रिपब्लिकन सांसद स्कॉट डेसजारलाइस ने अपने मोबाइल फोन पर मशहूर ब्रिटिश बैंड द बीटल्स का प्रसिद्ध गीत “Here Comes the Sun” बजाया, जिससे सदन में हल्का-फुल्का माहौल बन गया।

अब यह विधेयक अमेरिकी सीनेट में जाएगा, जहां इसे मंजूरी मिलना अभी तय नहीं माना जा रहा है। सीनेट में रिपब्लिकन सांसद जॉन बरासो ने कहा कि विधेयक आने के बाद उस पर विचार किया जाएगा। वहीं फ्लोरिडा के सीनेटर रिक स्कॉट पहले ही इसी नाम का समान विधेयक सीनेट में पेश कर चुके हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी लंबे समय से साल में दो बार घड़ियां बदलने की व्यवस्था खत्म करने के पक्ष में रहे हैं। उन्होंने हाल ही में कहा था कि सरकार इस कानून को लागू करने के लिए पूरी कोशिश करेगी ताकि लोगों को इस “बेवजह और महंगी प्रक्रिया” से राहत मिल सके।

अमेरिका में प्रथम विश्व युद्ध के दौरान बिजली और ईंधन की बचत के उद्देश्य से डेलाइट सेविंग टाइम की शुरुआत की गई थी। इसके तहत गर्मियों में घड़ियों को एक घंटा आगे कर दिया जाता है, जबकि सर्दियों में फिर एक घंटा पीछे कर दिया जाता है। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद भी यह व्यवस्था जारी रही और 1966 में पूरे देश के लिए इसे कानून के जरिए मानकीकृत किया गया। हालांकि हवाई, एरिजोना, प्यूर्टो रिको और यूएस वर्जिन आइलैंड्स जैसे कुछ राज्य और क्षेत्र इस व्यवस्था का पालन नहीं करते।

हालांकि इस प्रस्ताव के विरोध में भी कई विशेषज्ञ सामने आए हैं। उनका कहना है कि यदि पूरे साल डेलाइट सेविंग टाइम लागू रहा तो सर्दियों में सुबह काफी देर तक अंधेरा रहेगा, जिससे सड़क दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ सकता है। कुछ स्वास्थ्य विशेषज्ञों का भी मानना है कि सुबह प्राकृतिक रोशनी मिलने से लोगों की जैविक घड़ी (बॉडी क्लॉक) बेहतर तरीके से काम करती है और नींद की गुणवत्ता भी अच्छी रहती है।

प्यू रिसर्च सेंटर के अनुसार, दुनिया के केवल लगभग एक-तिहाई देश ही किसी न किसी रूप में डेलाइट सेविंग टाइम का पालन करते हैं। यूरोप के अधिकांश देशों में यह व्यवस्था लागू है, जबकि एशिया और अफ्रीका के अधिकांश देशों में इसका इस्तेमाल नहीं किया जाता।

अब सभी की नजर अमेरिकी सीनेट पर है। यदि वहां भी यह विधेयक पारित हो जाता है, तो अमेरिका में दशकों पुरानी घड़ी बदलने की परंपरा इतिहास बन जाएगी और देश पूरे वर्ष एक ही समय प्रणाली का पालन करेगा।

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