लखनऊ 13 नवंबर 2025
उत्तर प्रदेश के सहारनपुर ज़िले के देवबंद थाना क्षेत्र में तैनात पुलिस इंस्पेक्टर नरेंद्र कुमार शर्मा को उनके हालिया बयान के बाद तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में शर्मा यह कहते दिखाई दिए कि “आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता” और उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि आतंकवादी गतिविधियों में शामिल लोग विभिन्न पृष्ठभूमियों से आते हैं, जिनमें हिंदू समुदाय से जुड़े आरोपी, नक्सली और यहां तक कि सेना से जुड़े लोग भी शामिल रहे हैं। यह बयान ऐसे समय में सामने आया, जब दिल्ली धमाकों के बाद पूरे देश में सुरक्षा एजेंसियाँ हाई अलर्ट पर थीं और माहौल बेहद संवेदनशील था।
वीडियो वायरल होते ही X (पूर्व में ट्विटर) पर दक्षिणपंथी समूहों और कुछ संगठनों ने शर्मा के बयान पर कड़ी आपत्ति जताई और इसे “धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाला” तथा “भ्रामक” बताया। बढ़ते राजनीतिक दबाव और ऑनलाइन शिकायतों के बाद साहिबाबाद के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) ने इंस्पेक्टर शर्मा को लाइन अटैच कर दिया और उनके खिलाफ विभागीय जांच के आदेश जारी कर दिए। आदेश में कहा गया है कि वीडियो में दिए गए कथनों की तथ्यात्मक और कानूनी जांच जरूरी है, क्योंकि यह बयान संवेदनशील समय में कानून-व्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।
30 साल की सेवा पूरी कर चुके वरिष्ठ अधिकारी नरेंद्र शर्मा उस बयान में यह भी कहते सुने गए कि किसी भी जांच में व्यक्ति के कर्म और उसके व्यक्तिगत कार्य को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, न कि उसके धर्म या जातीय पहचान को। उन्होंने जोर दिया कि पुलिस की दृष्टि में अपराधी केवल अपराधी होता है, न कि उसकी धार्मिक पहचान। यह वीडियो लगभग ढाई मिनट का है और 13 नवंबर को सोशल मीडिया पर शेयर किया गया था।
फिलहाल विभागीय जांच जारी है। पुलिस विभाग ने स्पष्ट किया है कि किसी भी अधिकारी द्वारा दिए गए सार्वजनिक बयान को संवेदनशीलता, तथ्यों और सरकारी आचार संहिता के अनुरूप होना चाहिए। यह मामला न सिर्फ़ पुलिस अधिकारियों की जिम्मेदारियों पर सवाल उठाता है, बल्कि उस राजनीतिक-सामाजिक माहौल को भी दर्शाता है जिसमें आज भारत में सुरक्षा और पहचान से जुड़े मुद्दे कितनी जल्दी विवाद का रूप ले लेते हैं।
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