महेंद्र कुमार | नई दिल्ली 23 दिसंबर 2025
उन्नाव रेप केस में दोषी ठहराए जा चुके पूर्व बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने उनकी आजीवन कारावास की सजा को फिलहाल निलंबित कर दिया है और उन्हें सशर्त जमानत भी दे दी है। यह आदेश सेंगर द्वारा दायर अपील पर सुनवाई के दौरान आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि उनकी अपील लंबित है और इस दौरान सजा पर रोक लगाई जाए। हाईकोर्ट ने उनकी दलीलों पर विचार करते हुए कहा कि अपील के अंतिम निपटारे तक सजा को स्थगित किया जा सकता है, लेकिन इसके साथ सख्त शर्तें भी जरूरी होंगी।
अदालत ने साफ किया कि जमानत का मतलब यह नहीं है कि दोष खत्म हो गया है। कोर्ट ने कहा कि यह राहत केवल कानूनी प्रक्रिया के तहत दी जा रही है और पीड़िता की सुरक्षा और सम्मान से किसी भी तरह का समझौता नहीं होगा। इसी कारण सेंगर को कई कड़ी शर्तों के साथ जमानत दी गई है। उन्हें 15 लाख रुपये का निजी मुचलका और समान राशि के जमानतदार देने होंगे। इसके अलावा उन्हें निर्देश दिया गया है कि वे पीड़िता के घर के पांच किलोमीटर के दायरे में नहीं जाएंगे, न ही किसी तरह से पीड़िता या उसके परिवार से संपर्क करेंगे। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी तरह की धमकी, दबाव या नियम उल्लंघन की स्थिति में उनकी जमानत तुरंत रद्द की जा सकती है।
दिल्ली हाईकोर्ट ने सेंगर को यह भी आदेश दिया है कि जमानत अवधि के दौरान वे दिल्ली में ही रहेंगे और नियमित रूप से पुलिस के सामने हाजिरी देंगे। उनका पासपोर्ट अदालत में जमा रहेगा ताकि वे देश छोड़कर न जा सकें। अदालत का यह रुख इस बात को दिखाता है कि भले ही सजा निलंबित की गई हो, लेकिन मामले की गंभीरता को देखते हुए किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरती जाएगी।
हालांकि, इस फैसले के बावजूद कुलदीप सेंगर फिलहाल जेल से बाहर नहीं आ पाएंगे। इसकी वजह यह है कि उन्नाव मामले से जुड़े एक अन्य केस में, पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत के मामले में उन्हें अलग से 10 साल की सजा सुनाई जा चुकी है। उस सजा के चलते उन्हें अभी भी जेल में रहना होगा। यानी हाईकोर्ट से राहत मिलने के बाद भी उनकी तत्काल रिहाई संभव नहीं है।
गौरतलब है कि उन्नाव रेप केस देश के सबसे चर्चित और संवेदनशील मामलों में से एक रहा है। 2017 में पीड़िता ने आरोप लगाया था कि सत्ता के प्रभाव का इस्तेमाल कर उसके साथ बलात्कार किया गया। इसके बाद पीड़िता और उसके परिवार को लगातार धमकियां मिलीं, पिता की हिरासत में मौत हुई और परिवार सड़क हादसे का भी शिकार हुआ। इन घटनाओं ने पूरे देश को झकझोर दिया था। दिसंबर 2019 में दिल्ली की विशेष अदालत ने कुलदीप सेंगर को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
दिल्ली हाईकोर्ट का यह ताजा आदेश एक बार फिर इस मामले को चर्चा के केंद्र में ले आया है। एक तरफ यह फैसला कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है, तो दूसरी ओर यह सवाल भी खड़े करता है कि पीड़ितों को न्याय का भरोसा कैसे बनाए रखा जाए। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि सेंगर की अपील पर हाईकोर्ट का अंतिम फैसला कब आता है और न्याय की यह लंबी प्रक्रिया किस मोड़ पर जाकर पूरी होती है।




