एबीसी नेशनल न्यूज | लेह | 15 फरवरी 2026
केंद्र शासित प्रदेश Ladakh में आज से दो प्रमुख बौद्ध मठ उत्सव—लेह दोस्मोचे और लिकिर मठ स्ट्रोमोचे—धार्मिक आस्था और पारंपरिक वैभव के साथ शुरू हो गए। इन उत्सवों में स्थानीय लोग, लामा समुदाय और पर्यटक बड़ी संख्या में भाग ले रहे हैं।लेह में आयोजित दोस्मोचे उत्सव सर्दियों के कठिन मौसम के अंत का प्रतीक माना जाता है। यह पर्व नकारात्मक शक्तियों को दूर करने और क्षेत्र में शांति व समृद्धि की कामना के लिए मनाया जाता है। मठों में विशेष प्रार्थनाएं, पारंपरिक मुखौटा नृत्य (चाम डांस) और धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जा रहे हैं।
इसी तरह लिकिर मठ में मनाया जा रहा स्ट्रोमोचे उत्सव भी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। यह आयोजन समुदाय को एक साथ जोड़ने और नए कृषि सत्र की तैयारियों का संकेत देने वाला माना जाता है।
लद्दाख में सर्दियां बेहद कठोर होती हैं। ऐसे में इन उत्सवों को केवल धार्मिक कार्यक्रम ही नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और नई शुरुआत के प्रतीक के रूप में भी देखा जाता है। स्थानीय प्रशासन ने श्रद्धालुओं और पर्यटकों की सुविधा के लिए विशेष इंतजाम किए हैं।
इन मठ उत्सवों के साथ ही लद्दाख में सर्दियों के अंत और आने वाले कृषि मौसम की तैयारियों का औपचारिक आगाज हो गया है।




