राष्ट्रीय / राजनीति | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 6 अप्रैल 2026
दिल्ली की बहुचर्चित शराब नीति मामले में सोमवार को Delhi High Court में सुनवाई के दौरान तीखी बहस देखने को मिली। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल Tushar Mehta ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि “यह कोर्ट है, कोई नाटक का मंच नहीं है।” उनके इस बयान ने अदालत में चल रही बहस को और ज्यादा गर्म कर दिया। दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री Arvind Kejriwal ने इस मामले में खुद अपनी पैरवी करने की बात कही। उन्होंने अदालत से कहा कि वह अपने पक्ष को सीधे तौर पर रखना चाहते हैं और अपनी दलीलें स्वयं पेश करेंगे। केजरीवाल का यह रुख इस मामले को और ज्यादा राजनीतिक और कानूनी रूप से अहम बना रहा है।
दरअसल, केजरीवाल सरकार की आबकारी (Excise) नीति को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब एक बड़े कानूनी और राजनीतिक संघर्ष का रूप ले चुका है। इस मामले में पहले भी कई बार अदालत में तीखी नोकझोंक देखने को मिल चुकी है। केंद्र और दिल्ली की पूर्व सरकार के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर लंबे समय से जारी रहा है।
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता और अदालत की गरिमा बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने साफ कहा कि अदालत में पेश होने वाले सभी पक्षों को न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान करना चाहिए।
केजरीवाल की ओर से यह संकेत भी दिया गया कि वह इस पूरे मामले को केवल कानूनी लड़ाई नहीं, अपनी साख और राजनीतिक विश्वसनीयता से भी जोड़कर देख रहे हैं। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि वह हर सवाल का जवाब अदालत में देंगे और अपनी बात मजबूती से रखेंगे।
दिल्ली की शराब नीति को लेकर यह मामला पहले से ही देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। अब जब पूर्व मुख्यमंत्री खुद अदालत में अपनी दलीलें रखने की बात कर रहे हैं, तो आने वाले दिनों में इस केस की सुनवाई और भी अहम हो सकती है।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि यह मामला सिर्फ एक नीति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके राजनीतिक मायने भी गहरे हैं। अदालत में अगली सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।




