Home » National » उम्मीद पोर्टल ठप! देशभर में हज़ारों लोग परेशान—समय सीमा बढ़ाने की माँग को लेकर लोकसभा में गरजे इमरान मसूद

उम्मीद पोर्टल ठप! देशभर में हज़ारों लोग परेशान—समय सीमा बढ़ाने की माँग को लेकर लोकसभा में गरजे इमरान मसूद

Facebook
WhatsApp
X
Telegram

समी अहमद। नई दिल्ली 4 दिसंबर 2025

देशभर के कोने-कोने से एक ही शिकायत लगातार उठ रही है—उम्मीद पोर्टल ठीक से काम ही नहीं कर रहा! यह पोर्टल, जिसे प्रॉपर्टीज से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियाँ अपलोड करने के लिए बनाया गया था, बीते कई दिनों से तकनीकी खामियों से जूझ रहा है। नतीजा यह कि हज़ारों आवेदक घंटों कोशिश करने के बावजूद न तो लॉग-इन कर पा रहे हैं, न ही अपनी प्रॉपर्टी संबंधी जानकारियाँ अपलोड कर पा रहे हैं। कई जगहों पर सिस्टम फ़्रीज़ होने, डेटा सेव न होने और सर्वर एरर जैसी दिक्कतों की वजह से लोग पूरी तरह त्रस्त हो चुके हैं। तकनीकी समस्या का यह सिलसिला इतना बढ़ गया है कि कई राज्यों में अधिकारियों तक ने इसकी पुष्टि की है कि सामान्य उपयोगकर्ता ही नहीं, विभागीय कर्मचारी भी पोर्टल की खराबी से परेशान हैं।

इसी गंभीर समस्या को उठाते हुए लोकसभा में आज इमरान मसूद ने तीखा सवाल खड़ा कर दिया। उन्होंने कहा कि जब हज़ारों लोग समय पर अपने आवेदन पूरे करना चाहते हैं, लेकिन पोर्टल ही काम नहीं कर रहा, तो फिर निर्धारित समय सीमा का पालन कैसे संभव है? मसूद ने साफ शब्दों में कहा कि यह सिर्फ तकनीकी दिक्कत नहीं, बल्कि आम लोगों के अधिकारों और अवसरों पर सीधा प्रहार है। उन्होंने सरकार से सख्त लहज़े में मांग की कि जब तक उम्मीद पोर्टल पूरी तरह दुरुस्त न हो जाए, तब तक आवेदन की अंतिम तिथि को अनिवार्य रूप से बढ़ाया जाए, ताकि कोई भी नागरिक केवल पोर्टल की विफलता की वजह से वंचित न रह जाए।

इमरान मसूद ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार जनता से डिजिटल सुविधाओं के नाम पर बड़ी-बड़ी बातें करती है, लेकिन ज़मीन पर व्यवस्थाएँ बार-बार फेल हो जाती हैं। उन्होंने कहा कि यह स्थिति बताती है कि टेक्निकल इंफ़्रास्ट्रक्चर मज़बूत किए बिना डिजिटल इंडिया के दावे खोखले ही रहेंगे। उनकी मांग है कि सरकार तुरंत तकनीकी टीम गठित करे, पोर्टल की खामियों को दूर करे और साथ ही अंतिम तिथि बढ़ाकर लोगों को राहत दे। मसूद ने चेतावनी भरे स्वर में कहा कि यदि सरकार ने जल्द कदम नहीं उठाया, तो यह असंतोष आगे चलकर बड़ा जन मुद्दा बन सकता है।

लोकसभा में उठी यह आवाज़ अब ज़मीन पर उन लाखों लोगों की उम्मीद का केंद्र बन गई है, जो कई दिनों से पोर्टल की त्रुटियों से परेशान होकर सरकार के किसी ठोस कदम का इंतज़ार कर रहे हैं। सरकार की अगली प्रतिक्रिया अब तय करेगी कि वह इस डिजिटल अव्यवस्था को कितना गंभीरता से लेती है।

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments