अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | तेहरान/नई दिल्ली | 25 अप्रैल 2026
दुनिया की अर्थव्यवस्था की धड़कन कहे जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य पर इस समय तनाव अपने चरम पर है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े टकराव के बाद ईरान ने इस अहम समुद्री रास्ते को लगभग बंद कर दिया है। हालात इतने गंभीर हैं कि इस पूरे इलाके को अब “बारूदी ढेर” कहा जा रहा है। यहां से दुनिया के करीब पांचवें हिस्से का तेल गुजरता है, इसलिए इसका असर सिर्फ खाड़ी देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत समेत पूरी दुनिया पर पड़ रहा है। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) ने इस इलाके में समुद्री माइंस बिछा दी हैं, जिससे जहाजों की आवाजाही बेहद खतरनाक हो गई है। कुछ समय के लिए संघर्ष विराम के दौरान थोड़ी राहत जरूर दिखी, जब कुछ टैंकर इस रास्ते से निकल पाए, लेकिन हालात जल्द ही फिर बिगड़ गए और रास्ता दोबारा बंद कर दिया गया। दूसरी ओर अमेरिकी नौसेना भी इस इलाके में सक्रिय हो गई है और उसने ईरान की ओर जाने वाले जहाजों पर कड़ी निगरानी शुरू कर दी है।
इस पूरे घटनाक्रम ने वैश्विक तेल बाजार को हिला कर रख दिया है। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी ने इसे इतिहास का सबसे बड़ा सप्लाई शॉक बताया है। ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर होर्मुज स्ट्रेट बंद रहता है, तो खाड़ी से निकलने वाला तेल दुनिया तक कैसे पहुंचेगा? इसी वजह से अब वैकल्पिक रास्तों की तलाश तेज़ हो गई है।
सबसे पहला विकल्प सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन है, जो खाड़ी से तेल को सीधे लाल सागर तक पहुंचाती है। यह पाइपलाइन रोजाना करीब 70 लाख बैरल तेल भेजने की क्षमता रखती है, लेकिन फिलहाल इससे कम ही तेल भेजा जा पा रहा है। इसके अलावा यमन के पास बाब- अल- अंदेब जलडमरूमध्य में भी खतरा बना रहता है, जहां हूथी विद्रोहियों के हमले का डर है।
दूसरा अहम रास्ता अबू धाबी की हबशान – फुजैरा पाइपलाइन है, जो तेल को ओमान की खाड़ी तक पहुंचाती है और होर्मुज को बाईपास करती है। हालांकि, हाल के महीनों में इस पाइपलाइन पर भी ड्रोन हमलों का असर पड़ा है, जिससे इसकी क्षमता प्रभावित हुई है।
इराक से निकलने वाली किरकुक – सेहान पाइपलाइन भी एक विकल्प के रूप में सामने आई है, जो तेल को तुर्की के रास्ते भूमध्य सागर तक पहुंचाती है। लेकिन इसकी क्षमता सीमित है और यह पूरी तरह से होर्मुज का विकल्प नहीं बन सकती। वहीं ईरान खुद गोरेह – जास्क पाइपलाइन के जरिए एक नया रास्ता तैयार कर रहा है, लेकिन यह प्रोजेक्ट अभी पूरी तरह से तैयार नहीं हुआ है।
इसके अलावा कुछ बड़े और लंबे समय के प्रोजेक्ट भी चर्चा में हैं, जैसे इराक से जॉर्डन तक पाइपलाइन या खाड़ी से ओमान सागर तक एक नई नहर बनाना। लेकिन ये योजनाएं अभी शुरुआती चरण में हैं और इन्हें पूरा होने में सालों लग सकते हैं।
साफ है कि होर्मुज स्ट्रेट का बंद होना सिर्फ एक क्षेत्रीय संकट नहीं, बल्कि वैश्विक चुनौती बन चुका है। अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो पेट्रोल-डीजल की कीमतों से लेकर रोजमर्रा की चीजों तक सब कुछ महंगा हो सकता है। आम आदमी पर इसका असर सीधा पड़ेगा—चाहे वह महंगाई के रूप में हो या फिर आर्थिक दबाव के रूप में।इसलिए अब दुनिया की नजर सिर्फ इस बात पर टिकी है कि हालात कब सामान्य होंगे। लेकिन जब तक ऐसा नहीं होता, तब तक तेल के वैकल्पिक रास्तों की खोज और उस पर निर्भरता बढ़ती ही जाएगी।




