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पतन की कहानी: अडानी के मालिक बनते ही कैसे ‘गोदी मीडिया’ बना NDTV? अभिसार शर्मा की जुबानी

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एबीसी नेशनल न्यूज | नई दिल्ली | 13 फरवरी 2026

वरिष्ठ पत्रकार Abhisar Sharma ने सोशल मीडिया पर एक लंबा और तीखा पोस्ट लिखकर अपने पूर्व संस्थान NDTV की बदलती संपादकीय दिशा पर गंभीर सवाल उठाए हैं। शर्मा ने दावा किया कि जिस चैनल को कभी सत्ता से सवाल पूछने और स्वतंत्र पत्रकारिता के लिए जाना जाता था, वही आज स्वामित्व परिवर्तन के बाद पूरी तरह अलग रास्ते पर चलता दिख रहा है। उनका इशारा उद्योगपति Gautam Adani के समूह द्वारा NDTV में हिस्सेदारी लेने के बाद आए बदलावों की ओर था।

शर्मा ने लिखा कि यह केवल प्रबंधन परिवर्तन का मामला नहीं, बल्कि पत्रकारिता के मूल चरित्र और आत्मा में आए बदलाव का संकेत है। उनके अनुसार, चैनल की प्राथमिकताएं, खबरों की प्रस्तुति और राजनीतिक मुद्दों पर रुख पहले जैसा नहीं रहा।

एस.के. श्रीवास्तव प्रकरण: एक पुरानी चुप्पी का जिक्र

अपने पोस्ट में अभिसार शर्मा ने भारतीय राजस्व सेवा के पूर्व अधिकारी S. K. Srivastava का उल्लेख किया। उनका कहना है कि एक समय श्रीवास्तव ने उन्हें और NDTV प्रबंधन को सार्वजनिक रूप से निशाने पर लिया था। सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में उस दौर में तीखी बयानबाज़ी हुई।

शर्मा के अनुसार, बाद में जब श्रीवास्तव को सेवा से हटाया गया और जांच एजेंसियों की कार्रवाई हुई, तब NDTV ने इस घटनाक्रम को प्रमुखता से नहीं दिखाया। उनका दावा है कि चैनल के भीतर कुछ पत्रकार इस पर खबर चलाना चाहते थे, लेकिन प्रबंधन ने यह कहते हुए मना कर दिया कि किसी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई को प्रतिशोध की भावना से पेश करना उचित नहीं होगा।

इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और NDTV की ओर से इस विषय पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

‘सिद्धांत’ से ‘चयनात्मकता’ तक का सफर?

अभिसार शर्मा का आरोप है कि जिस सिद्धांत के आधार पर पहले संयम बरता गया, वही सिद्धांत आज लागू नहीं होते दिखते। उन्होंने लिखा कि अब चैनल कुछ मामलों को आक्रामक ढंग से चलाता है और राजनीतिक रूप से संवेदनशील मुद्दों पर उसका रुख पहले जैसा संतुलित नहीं दिखता।

उनके अनुसार, यही बदलाव NDTV के पतन की कहानी कहता है। उनका दावा है कि स्वामित्व परिवर्तन के बाद संपादकीय प्राथमिकताओं में स्पष्ट बदलाव आया है और चैनल का चरित्र धीरे-धीरे “गोदी मीडिया” जैसा होता गया।

रवि नायर, महुआ मोइत्रा और राहुल गांधी पर कवरेज का जिक्र

अपने पोस्ट में शर्मा ने कहा कि आज NDTV पत्रकार Ravi Nair से जुड़े जेल प्रकरण को प्रमुखता से चला रहा है। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि Mahua Moitra से जुड़े विवाद को भी चैनल ने व्यापक कवरेज दी।

शर्मा ने यह भी लिखा कि राहुल गांधी के खिलाफ खबरों को प्रमुखता देने और आलोचनात्मक प्रस्तुति करने का चलन बढ़ा है। उनका कहना है कि पहले जिस तरह की संपादकीय सतर्कता और संतुलन दिखता था, वह अब दिखाई नहीं देता। हालांकि यह उनके निजी विचार हैं और NDTV या उसके प्रबंधन की ओर से इन आरोपों पर कोई सार्वजनिक बयान जारी नहीं किया गया है।

कितना बदल गया है मीडिया का चेहरा

अभिसार शर्मा का यह पोस्ट ऐसे समय सामने आया है जब भारतीय मीडिया की स्वतंत्रता, निष्पक्षता और स्वामित्व संरचना को लेकर बहस जारी है। बड़े कॉरपोरेट समूहों के मीडिया संस्थानों में प्रवेश के बाद संपादकीय रुख में बदलाव की चर्चा पहले भी होती रही है। लेकिन पिछले 11 साल से भारत में पत्रकारिता सबसे निम्न स्तर पर है। सत्ता की चापलूसी को ही आज पत्रकारिता माना जाता है। सवाल विपक्ष से पूछे जाते हैं और सत्ता में बैठे अपने आकाओं के तलवे चाटने का काम किया जाता है।

फिलहाल NDTV या संबंधित पक्षों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। लेकिन इस पोस्ट ने एक व्यापक विमर्श को जन्म दिया है—क्या मीडिया संस्थान समय के साथ अपने मूल मूल्यों से दूर हो जाते हैं? क्या स्वामित्व परिवर्तन संपादकीय दिशा को प्रभावित करता है? यह सवाल केवल NDTV तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे भारतीय मीडिया परिदृश्य की विश्वसनीयता और दिशा से जुड़ा हुआ है।

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