एबीसी नेशनल न्यूज | रियाद/नई दिल्ली | 2 मार्च 2026
पर्शियन गल्फ के समुद्री मार्ग पर बढ़ते तनाव के बीच तेल टैंकर ‘स्काइलाइट’ पर हुए हमले ने भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस जहाज़ पर 15 भारतीय और 5 ईरानी नाविक सवार थे। ओमान के मुसंदम प्रायद्वीप के पास हुए इस हमले के बाद समुद्री मार्ग की सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ गई है। बताया जा रहा है कि हाल के टकराव शुरू होने के बाद अब तक तीन जहाज़ों को निशाना बनाया जा चुका है।
समुद्री व्यापार के लिहाज़ से यह मार्ग बेहद महत्वपूर्ण है। होर्मुज़ जलडमरूमध्य से हर दिन बड़ी संख्या में तेल टैंकर और मालवाहक जहाज़ गुजरते हैं। लेकिन 1 मार्च 2026 को हालात इतने बिगड़ गए कि जहाज़ों की आवाजाही लगभग रुक गई। इससे एक दिन पहले तक 60 से 70 जहाज़ इस रास्ते से गुज़रे थे। जहाज़ों की आवाजाही रुकने का सीधा असर तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय बाज़ार पर पड़ सकता है।
‘स्काइलाइट’ उन जहाज़ों में शामिल बताया जा रहा है जिन्हें अमेरिका ने “शैडो फ्लीट” यानी प्रतिबंधित बेड़े से जोड़ा है। ऐसे जहाज़ों पर काम करने वाले नाविकों के सामने अतिरिक्त जोखिम होता है, क्योंकि इन पर निगरानी ज्यादा रहती है और टकराव की स्थिति में ये जल्दी निशाने पर आ सकते हैं। भारतीय नाविक बड़ी संख्या में अंतरराष्ट्रीय जहाज़ों पर काम करते हैं, इसलिए ऐसे हमले उनके परिवारों के लिए भी चिंता का कारण बनते हैं।
सरकारी सूत्रों के अनुसार भारतीय दूतावास और संबंधित एजेंसियां स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। जरूरत पड़ने पर नाविकों की सुरक्षित वापसी की व्यवस्था की जाएगी। पहले भी खाड़ी क्षेत्र में तनाव के समय भारत ने अपने नागरिकों को सुरक्षित निकालने के लिए अभियान चलाए हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष का असर सिर्फ क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता। इसका प्रभाव वैश्विक तेल कीमतों, व्यापार और समुद्री सुरक्षा पर पड़ता है। अगर हालात लंबे समय तक तनावपूर्ण रहे तो भारतीय नाविकों और जहाज़रानी कंपनियों को वैकल्पिक मार्ग अपनाने पड़ सकते हैं, जिससे लागत बढ़ेगी।
फिलहाल सबसे बड़ी चिंता उन नाविकों की सुरक्षा है जो इस संवेदनशील समुद्री मार्ग पर काम कर रहे हैं। सरकार और समुद्री एजेंसियां स्थिति पर नजर रखे हुए हैं, लेकिन हालिया हमलों ने साफ कर दिया है कि पर्शियन गल्फ मार्ग अब पहले जैसा सुरक्षित नहीं रहा।




