Home » National » न्यायपालिका के पास न तलवार, न शब्दों की ताकत — CJI गवई बोले: लोकतंत्र तभी सुरक्षित जब संस्थाएँ मिलकर काम करें

न्यायपालिका के पास न तलवार, न शब्दों की ताकत — CJI गवई बोले: लोकतंत्र तभी सुरक्षित जब संस्थाएँ मिलकर काम करें

Facebook
WhatsApp
X
Telegram

मुंबई 6 नवंबर 2025

भारत के प्रधान न्यायाधीश (CJI) बी.आर. गवई ने एक महत्वपूर्ण और स्पष्ट टिप्पणी करते हुए कहा कि न्यायपालिका अकेले लोकतंत्र को सुरक्षित नहीं रख सकती। मुंबई स्थित महाराष्ट्र नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (MNLU) में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने बताया कि लोकतंत्र के तीनों स्तंभ — कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका — नागरिकों की भलाई के लिए एक-दूसरे के पूरक हैं, न कि विरोधी। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता, समानता और न्याय का भाव तभी सशक्त हो सकता है, जब ये तीनों अंग एक साथ मिलकर काम करें।

सीजेआई गवई ने यह भी कहा कि न्यायपालिका के पास न तो प्रशासनिक ताकत है और न ही कार्यपालिका जैसी ‘तलवार’। उनके अनुसार अदालतें न तो खुद अपने आदेश लागू कर सकती हैं और न ही सरकारी ढांचे पर प्रत्यक्ष नियंत्रण रखती हैं। इसलिए न्यायिक व्यवस्था को सक्षम और प्रभावी बनाने के लिए सरकार के सहयोग की जरूरत हमेशा रहती है। उन्होंने साफ कहा कि जब तक कार्यपालिका सक्रिय रूप से योगदान नहीं करेगी, तब तक न्यायपालिका के लिए बुनियादी ढांचे का सुधार और गुणवत्तापूर्ण कानूनी शिक्षा उपलब्ध कराना बेहद कठिन होगा। यह बयान न्यायपालिका की सीमाओं और कार्यपालिका की जिम्मेदारी को मजबूती से सामने रखता है।

न्यायमूर्ति गवई ने महाराष्ट्र सरकार की सराहना करते हुए कहा कि राज्य ने न्यायिक संरचना को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने उन आलोचनाओं को गलत बताया जिनमें कहा गया था कि महाराष्ट्र न्यायिक इंफ्रास्ट्रक्चर देने के मामले में पिछड़ गया है। CJI के अनुसार महाराष्ट्र में न्यायपालिका को उपलब्ध संसाधन देश में सर्वोत्तम में से एक हैं और इन प्रयासों का सकारात्मक परिणाम कानूनी शिक्षा और न्यायिक सेवाओं में दिख रहा है।

उन्होंने यह भी कहा कि आज कानून की पढ़ाई सिर्फ सिद्धांतों तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह एक जीवंत और प्रगतिशील शिक्षा बन चुकी है जिसमें व्यावहारिक प्रशिक्षण बेहद जरूरी है। इसलिए आधुनिक, उन्नत और वैश्विक मानकों पर आधारित विधि शिक्षा का ढांचा तैयार करना अनिवार्य है। CJI ने बाबासाहेब आंबेडकर के विचार को याद किया—”एक वकील सिर्फ कानून का रक्षक नहीं, बल्कि समाज को रूपांतरित करने वाला इंजीनियर है।”

यह कथन साफ दर्शाता है कि न्यायपालिका सिर्फ न्याय नहीं देती, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का माध्यम भी बनती है।

कार्यक्रम में मौजूद उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि महाराष्ट्र में तीन राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय होना इस बात का प्रमाण है कि राज्य कानून की शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि MNLU जल्द ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त संस्था बन जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि नवी मुंबई में एजुसिटी प्रोजेक्ट के तहत दुनिया के 12 शीर्ष विश्वविद्यालयों को आमंत्रित किया गया है और आने वाले कुछ वर्षों में उनमें से सात विश्वविद्यालय अपना संचालन भी शुरू कर देंगे।

कुल मिलाकर CJI गवई के इस बयान ने लोकतंत्र के भीतर संस्थाओं के संतुलन, जिम्मेदारी और सहयोग की आवश्यकता पर गहरी रोशनी डाली है। उन्होंने याद दिलाया कि लोकतंत्र की मजबूती केवल अदालतों या सरकार के भरोसे नहीं, बल्कि साझा दायित्व और पारदर्शी साझेदारी के सिद्धांत पर टिकी होती है। उनका यह संदेश बेहद महत्वपूर्ण है — न्याय तभी मजबूत होगा जब संस्थाएँ एक-दूसरे के साथ खड़ी हों, न कि एक-दूसरे से अलग।

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments