एबीसी डेस्क 15 दिसंबर 2025
फुटबॉल के इतिहास के सबसे बड़े नामों में शुमार लियोनेल मेसी जब हाथ में भारतीय तिरंगा थामे वांखेडे स्टेडियम पहुंचे, तो यह दृश्य केवल खेल का नहीं था—यह उस भारत का प्रतिबिंब था जो असली प्रतिभा, सादगी और गरिमा को सिर आंखों पर बैठाता है। #MessiInMumbai सिर्फ एक इवेंट नहीं रहा, बल्कि यह जनता के मूड, सत्ता के अहंकार और ‘VIP कल्चर’ की असलियत का लाइव ऑडिट बन गया। दो लाख से ज्यादा लोगों की भीड़, हर चेहरे पर उत्साह, हर आवाज़ में सम्मान—मुंबई ने साबित किया कि वह दिग्गजों का स्वागत करना जानती है। यही वजह है कि मेसी इस शहर में सचमुच खुश और सहज नज़र आए।
लेकिन इसी मंच पर राजनीति का वह चेहरा भी दिखा, जो तालियों का आदी है—और जब तालियां न मिलें तो असहज हो जाता है। एक साल पहले “फुल मैंडेट” का दावा करने वाली सत्ता के प्रतिनिधि देवेंद्र फडणवीस को जब ‘नमस्कार मुंबई’ के जवाब में ‘बू’ सुनने को मिला, तो यह किसी एक व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि जनभावना का संकेत था। यह दृश्य बताता है कि सत्ता और जनता के बीच दूरी बढ़ी है। बार-बार की हूटिंग के बीच अंततः “गणपति बप्पा मोरया” का सहारा लेकर माहौल संभालने की कोशिश की गई—धार्मिक आस्था का सम्मान अपनी जगह, लेकिन सवाल यह है कि क्या अब राजनीतिक वैधता के लिए भी यही आख़िरी औज़ार बचा है?
विडंबना यहीं नहीं रुकी। मंच पर बॉलीवुड सितारों का अभिनंदन चल रहा था, और बगल में खड़े मेसी और रोड्रिगो डी पॉल के चेहरे पर हल्की-सी हैरानी साफ़ पढ़ी जा सकती थी—मानो वे सोच रहे हों, “यह सब क्या चल रहा है?” खेल का मंच कब से राजनीतिक PR का बैकड्रॉप बन गया? यह वह क्षण था जब खेल की गरिमा और सत्ता का प्रदर्शन आमने-सामने खड़े दिखे—और खेल, हमेशा की तरह, ऊंचा रहा।
सबसे ज्यादा आलोचना उस VIP एटिट्यूड की हुई, जिसने इवेंट की गरिमा को ठेस पहुंचाई। मुख्यमंत्री की पत्नी अमृता फडणवीस का व्यवहार सोशल मीडिया पर तीखी बहस का विषय बना—मेसी से औपचारिक शिष्टाचार का अभाव, डी पॉल को एक ओर हटने का इशारा, सेल्फी के दौरान च्युइंगम चबाना—ये सब ‘अमृत काल’ के VIP कल्चर की प्रतीक तस्वीरें बन गईं। बार-बार सेल्फी लेते हुए “परफेक्ट फ्रेम” की तलाश और फिर ट्वीट—“A moment with legend”—ने सवाल खड़ा किया: क्या क्लास सत्ता के साथ आती है, या संस्कार के साथ? मेसी भारत आए थे ‘GOAT टूर’ पर, लेकिन यहां उन्हें यह ‘बोध’ भी मिला कि असली VIP कौन होता है—जो मंच को छोटा नहीं करता, बल्कि खुद को छोटा रखकर मंच को बड़ा करता है।
मुंबई पुलिस ने ट्रैफिक और क्राउड मैनेजमेंट में जो काम किया, वह काबिल-ए-तारीफ है। दो लाख से ज्यादा लोगों की भीड़ के बावजूद अनुशासन, सुरक्षा और सुचारु व्यवस्था—यह प्रोफेशनलिज़्म हर शहर के लिए मिसाल है। JSW ग्रुप की ओर से मेसी को मेसी-एंटोनेला का फ्रेम्ड पोस्टर भेंट करना भी एक सुंदर और संवेदनशील इशारा रहा—कॉर्पोरेट भारत जब शालीनता दिखाता है, तो वह सच्चे ब्रांड वैल्यू बनाता है।
खेल की आत्मा का सबसे खूबसूरत पल तब आया, जब सुनील छेत्री और लियोनेल मेसी आमने-सामने हुए—और मेसी ने अपनी साइन की हुई जर्सी भारत के कप्तान को सौंपी। यह पल बताता है कि महानता विनम्रता से मिलती है। 157 अंतरराष्ट्रीय मुक़ाबलों में 95 गोल के साथ, सुनील छेत्री अंतरराष्ट्रीय मैचों में चौथे सबसे ज्यादा गोल करने वाले खिलाड़ी हैं। वह केवल पुर्तगाली स्टार क्रिस्टियानो रोनाल्डो, ईरान के अली डेई और अर्जेंटीना के लियोनेल मेसी से पीछे हैं।
क्रिकेट के भगवान सचिन तेंदुलकर और फुटबॉल के सम्राट लियोनेल मेसी का मिलन केवल दो महान खिलाड़ियों की औपचारिक मुलाकात नहीं था, यह खेल इतिहास का दुर्लभ और भावनात्मक क्षण बन गया। एक ओर 2011 विश्व कप जीतकर भारत को गौरव दिलाने वाले सचिन ने अपनी यादगार जर्सी मेसी को भेंट की, तो दूसरी ओर फुटबॉल विश्व कप जीतने वाले मेसी ने वर्ल्डकप फुटबॉल सचिन को सौंपकर सम्मान का उत्तर सम्मान से दिया। यह आदान-प्रदान ट्रॉफी या कपड़ों का नहीं, दो खेलों, दो संस्कृतियों और दो युगों के बीच बने उस सेतु का प्रतीक था, जहां प्रतिस्पर्धा नहीं, महानता एक-दूसरे के सामने सिर झुकाती है। यह दृश्य बताता है कि खेल सीमाओं से ऊपर होते हैं, और सच्चे दिग्गज वही होते हैं जो उपलब्धियों से ज्यादा विनम्रता और सम्मान को अपनी पहचान बनाते हैं।
13 दिसंबर 2025 को अर्जेंटीना के महान फुटबॉलर लियोनेल मेसी के GOAT India Tour 2025 के दूसरे चरण में हैदराबाद पहुंचने पर लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से उनकी मुलाकात हुई, जो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई। इस मुलाकात के दौरान मेसी ने राहुल गांधी को अपनी साइन की हुई अर्जेंटीना की नंबर 10 जर्सी गिफ्ट की, दोनों ने फोटो खिंचवाई और कुछ देर बातचीत की, जिसमें आयोजकों के करीबी सूत्रों के अनुसार स्पेनिश भाषा का इस्तेमाल हुआ, क्योंकि मेसी स्पेनिश में सहज हैं और राहुल गांधी ने भी उसमें बात की। राहुल गांधी ने इस मुलाकात का एक रील इंस्टाग्राम पर शेयर किया, जिसमें वे मेसी, उनके इंटर मियामी साथी लुइस सुआरेज और रोड्रिगो डि पॉल के साथ नजर आ रहे हैं, कैप्शन था “Viva Football With the GOAT @leomessi”, और यह रील तेजी से वायरल हुई, हालांकि शुरुआती घंटों में ही लाखों व्यूज और लाइक्स मिले, जबकि कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि इससे जुड़ी रील्स ने 40 मिलियन से ज्यादा व्यूज पार कर रिकॉर्ड तोड़े। इस बातचीत की सबसे ज्यादा सराहना हुई क्योंकि यह दिखाती है कि शिक्षा, भाषाई तैयारी और संवाद की क्षमता किसी भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर आत्मविश्वास से पहचान बनाती है, खासकर जब मेसी जैसे वैश्विक आइकन से सीधे संवाद हो। समर्थकों ने इसे संस्कार और शिष्टाचार की मिसाल बताया, जो सत्ता की बजाय व्यक्तिगत विकास और संस्कृति से आते हैं, जबकि कुछ लोगों ने तंज कसा कि शिक्षा की कमी से नेता अक्सर ट्रांसलेटर या टेलीप्रॉम्प्टर पर निर्भर नजर आते हैं। यह मुलाकात तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी की मौजूदगी में राजीव गांधी इंटरनेशनल स्टेडियम में हुई, जहां मेसी ने बच्चों के साथ फुटबॉल खेला, पेनल्टी शूटआउट में हिस्सा लिया और फैंस का अभिवादन किया, जो कोलकाता के विवादास्पद कार्यक्रम के बाद एक सकारात्मक आयोजन साबित हुआ। कुल मिलाकर, यह घटना न केवल खेल और राजनीति के मिलन का प्रतीक बनी, बल्कि सोशल मीडिया पर शिक्षा व संवाद के महत्व पर एक व्यापक चर्चा छेड़ गई, जहां तारीफें परिवारवाद से हटकर व्यक्तिगत गुणों पर केंद्रित रहीं।
बात बिलकुल सीधी है।
आप अमीर हो सकते हैं।
आप मशहूर हो सकते हैं।
आप ताक़तवर हो सकते हैं।
आप मुख्यमंत्री की पत्नी भी हो सकते हैं।
लेकिन क्लास और ग्रेस खरीदी नहीं जाती—वह निभाई जाती है।
मुंबई और हैदराबाद ने मेसी को ही नहीं, भारत की असली पहचान को भी मंच दिया—जहां जनता तय करती है कि किसे तालियां मिलेंगी, और किसे आत्ममंथन।










