राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | मुंबई | 7 अगस्त 2026
महाराष्ट्र में स्कूलों और कॉलेजों को मिलने वाले अल्पसंख्यक दर्जे (Minority Status) की प्रक्रिया अब पहले से कहीं ज्यादा सख्त होने जा रही है। राज्य सरकार ऐसी नई व्यवस्था लाने की तैयारी में है, जिसमें केवल आवेदन देकर अल्पसंख्यक दर्जा हासिल करना आसान नहीं होगा। अब इस पूरी प्रक्रिया पर वरिष्ठ IAS अधिकारी की निगरानी होगी, विशेषज्ञों की बहु-विभागीय समिति हर आवेदन की जांच करेगी और दर्जा मिलने के बाद भी संस्थानों की समय-समय पर समीक्षा की जाएगी।
यह बदलाव ऐसे समय किया जा रहा है जब इस साल की शुरुआत में अल्पसंख्यक दर्जा देने को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हुआ था। उसी विवाद के बाद सरकार ने अतिरिक्त मुख्य सचिव बी. वेणुगोपाल रेड्डी की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति बनाई थी। समिति ने अपनी रिपोर्ट में मौजूदा व्यवस्था की कई कमियां गिनाईं और पूरी प्रक्रिया में बड़े सुधार की सिफारिश की।
मौजूदा व्यवस्था पर उठे सवाल
समिति ने पाया कि अभी अल्पसंख्यक दर्जे के आवेदन मुख्य रूप से अल्पसंख्यक विकास विभाग के एक डेस्क पर निपटाए जाते हैं, जिसकी जिम्मेदारी अक्सर गैर-IAS अधिकारी के पास होती है। सबसे बड़ी कमी यह बताई गई कि एक बार किसी संस्था को अल्पसंख्यक दर्जा मिल जाने के बाद उसकी दोबारा कोई समीक्षा नहीं होती। यानी संस्था बाद में भी तय शर्तों का पालन कर रही है या नहीं, इसकी जांच की कोई प्रभावी व्यवस्था नहीं है।
अब IAS अधिकारी करेंगे निगरानी
नई सिफारिशों के मुताबिक पूरी प्रक्रिया की निगरानी विभाग के वरिष्ठ IAS अधिकारी, संभव हो तो विभाग के सचिव, करेंगे। इसके साथ ही आवेदन केवल एक विभाग नहीं देखेगा, बल्कि वित्त, सामान्य प्रशासन, स्कूल शिक्षा, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा और अल्पसंख्यक विकास विभाग के अधिकारियों वाली विशेषज्ञ समिति हर आवेदन की जांच करेगी। इससे किसी भी फैसले में अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही लाने की कोशिश की जा रही है।
दर्जा मिलने के बाद भी होगी जांच
नई व्यवस्था का सबसे बड़ा बदलाव यह होगा कि अल्पसंख्यक दर्जा मिलने के बाद भी संस्थानों की समय-समय पर समीक्षा होगी। सरकार यह देखेगी कि संस्था अब भी उन शर्तों का पालन कर रही है या नहीं, जिनके आधार पर उसे यह दर्जा दिया गया था। साथ ही यह भी जांच होगी कि अल्पसंख्यक संस्थानों को मिलने वाली रियायतों और सरकारी लाभों का इस्तेमाल कानून के मुताबिक हो रहा है या नहीं और उनका फायदा वास्तव में पात्र लोगों तक पहुंच रहा है या नहीं।
अगस्त के अंत तक आ सकती है नई SOP
रेड्डी समिति ने करीब एक महीने पहले अपनी रिपोर्ट मुख्य सचिव राजेश अग्रवाल को सौंप दी थी। इसके बाद 15 जुलाई को सरकार ने अल्पसंख्यक मामलों की सचिव माधवी खोड़े चव्हारे की अध्यक्षता में एक नई कार्यान्वयन समिति बनाई। यह समिति अब नई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) तैयार कर रही है। अधिकारियों के मुताबिक इसका मसौदा अंतिम चरण में है और अगस्त के अंत तक नई SOP जारी की जा सकती है।
19 ट्रस्टों के विवाद के बाद उठाया गया कदम
नई व्यवस्था की पृष्ठभूमि इसी साल फरवरी में सामने आए उस विवाद से जुड़ी है, जब 20 शैक्षणिक ट्रस्टों में से 19 को अल्पसंख्यक दर्जा दिए जाने पर सवाल उठे थे। आरोप लगे थे कि बड़ी संख्या में प्रमाणपत्र एक साथ पोर्टल पर अपलोड किए गए और पूरी प्रक्रिया में अनियमितताएं हुईं। विवाद बढ़ने पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इन मंजूरियों पर रोक लगाते हुए समीक्षा के आदेश दिए थे, जबकि उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने विस्तृत जांच के निर्देश दिए थे।
हालांकि अल्पसंख्यक विकास विभाग ने बाद में सरकार को बताया कि प्रमाणपत्र जारी करने में कोई अनियमितता नहीं हुई थी। विभाग का कहना था कि तकनीकी कारणों से पोर्टल पर अपलोडिंग में देरी हुई थी, जबकि अधिकांश ट्रस्टों की सुनवाई और मंजूरी पहले ही पूरी हो चुकी थी।
पारदर्शिता बढ़ाने की कोशिश या सख्ती का नया दौर?
सरकार का कहना है कि नई व्यवस्था का उद्देश्य किसी समुदाय के अधिकारों को सीमित करना नहीं, बल्कि पूरी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और कानूनी रूप से मजबूत बनाना है। यदि नई SOP लागू होती है तो महाराष्ट्र में अल्पसंख्यक दर्जा पाने और उसे बनाए रखने के नियम पहले के मुकाबले कहीं अधिक सख्त हो जाएंगे। इससे भविष्य में होने वाले विवादों पर भी रोक लगाने की कोशिश की जाएगी।




