मुंबई 28 सितंबर 2025
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बॉलीवुड की दुनिया से जुड़े एक बड़े नाम पर शिकंजा कस दिया है। अभिनेता शिल्पा शेट्टी के पति और उद्यमी राज कुंद्रा के खिलाफ ED ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) के तहत चार्जशीट दाखिल कर दी है। इस चार्जशीट में दावा किया गया है कि कुंद्रा के पास 285 बिटकॉइन हैं, जिनकी कीमत लगभग ₹150 करोड़ है। यह रकम कथित तौर पर क्रिप्टो किंग अमित भारद्वाज के घोटाले से जुड़ी हुई है, जिसने 2017-18 के दौरान हजारों लोगों को बिटकॉइन निवेश का लालच देकर करोड़ों रुपये का घोटाला किया था। ED का कहना है कि कुंद्रा इन बिटकॉइनों के “लाभार्थी स्वामी” (Beneficial Owner) हैं और उन्होंने इनकी जानकारी देने से बचने की कोशिश की।
घोटाले की पृष्ठभूमि — अमित भारद्वाज का साम्राज्य
अमित भारद्वाज भारत के शुरुआती बिटकॉइन प्रचारकों में से एक थे, जिन्होंने GainBitcoin और GB Miners नामक स्कीमें चलाईं। उनके नेटवर्क ने भारत और विदेशों में हजारों निवेशकों से पैसे जुटाए, यह वादा करके कि उन्हें हर महीने 10% तक रिटर्न मिलेगा। लेकिन बाद में यह खुलासा हुआ कि यह पूरी योजना एक पोंज़ी स्कीम थी। ED और पुलिस की जांच में सामने आया कि भारद्वाज ने निवेशकों का पैसा क्रिप्टोकरेंसी खरीदने और अपनी निजी संपत्तियां बनाने में लगाया। यहीं पर राज कुंद्रा का नाम सामने आता है, जिन पर आरोप है कि उन्होंने इस घोटाले से मिले बिटकॉइन अपने पास रखे और बाद में उन्हें छिपाने की कोशिश की।
ED की चार्जशीट और सबूत
ED ने अपनी चार्जशीट में लिखा है कि कुंद्रा ने न केवल बिटकॉइन वॉलेट एड्रेस की जानकारी छिपाई बल्कि कई अहम दस्तावेज़ देने से भी बचते रहे। जांच एजेंसी ने कुंद्रा और भारद्वाज के बीच हुए “टर्म शीट” को सबूत के रूप में पेश किया है, जो यह साबित करता है कि यह केवल मध्यस्थता का मामला नहीं बल्कि प्रत्यक्ष लाभ लेने का सौदा था। इसके अलावा ED ने कुंद्रा की कई संपत्तियों को अटैच कर लिया है — जिसमें मुंबई में आलीशान फ्लैट, पुणे में एक बंगला और करोड़ों के शेयर निवेश शामिल हैं। चार्जशीट में यह भी दावा है कि कुंद्रा ने अपनी पत्नी शिल्पा शेट्टी को कुछ प्रॉपर्टी बाजार मूल्य से बहुत कम कीमत पर ट्रांसफर की, ताकि अवैध आय को सफेद किया जा सके।
मनी लॉन्ड्रिंग के नए पैटर्न — डिजिटल दुनिया का अंधेरा
यह मामला इस बात का सबूत है कि क्रिप्टोकरेंसी किस तरह से अपराधियों के लिए पैसा छुपाने और ट्रांसफर करने का आसान माध्यम बन रही है। डिजिटल वॉलेट और ब्लॉकचेन की तकनीक भले ही पारदर्शिता का दावा करती हो, लेकिन जब तक नियमन सख्त न हो, अपराधी इनका इस्तेमाल करके कानून से बच निकलने की कोशिश करते रहेंगे। ED का यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह संकेत देता है कि एजेंसी अब डिजिटल एसेट्स को लेकर भी गंभीर है और इस सेक्टर में छिपे अवैध पैसों पर कार्रवाई के लिए तैयार है।
अदालत की सुनवाई और आने वाला कानूनी संघर्ष
मामला अब विशेष PMLA अदालत में है, जहां कुंद्रा को अपना बचाव पेश करना होगा। उनकी कानूनी टीम यह साबित करने की कोशिश करेगी कि ये संपत्तियां वैध आय से खरीदी गई थीं और बिटकॉइन पर उनका कोई नियंत्रण नहीं था। लेकिन यदि ED अपने आरोपों को ठोस सबूतों के साथ पेश करती है, तो कुंद्रा को लंबी कानूनी लड़ाई का सामना करना पड़ सकता है। मनी लॉन्ड्रिंग कानून के तहत दोषी पाए जाने पर सजा कड़ी हो सकती है, जिसमें लंबी अवधि की कैद और भारी आर्थिक दंड शामिल है।
उद्योग और निवेशकों के लिए चेतावनी
यह मामला न केवल एक सेलिब्रिटी बिजनेसमैन को कटघरे में खड़ा करता है बल्कि भारत के क्रिप्टो इकोसिस्टम पर भी सवाल खड़े करता है। निवेशकों के लिए यह सबक है कि बिना नियमन और उचित जांच-पड़ताल के किसी भी डिजिटल स्कीम में निवेश करना खतरनाक हो सकता है। सरकार के लिए भी यह केस एक संकेत है कि क्रिप्टोकरेंसी के लिए कानूनी और रेगुलेटरी फ्रेमवर्क को और मजबूत बनाने की जरूरत है।
₹150 करोड़ का क्रिप्टो फ्रॉड: अमित भारद्वाज से राज कुंद्रा तक”ल
2017-18 में अमित भरद्वाज ने GainBitcoin और GB Miners नामक स्कीमें शुरू कीं, जिनमें हजारों निवेशकों से क्रिप्टो निवेश के नाम पर करोड़ों रुपये जुटाए गए और हर महीने 10% तक रिटर्न का वादा किया गया। कुछ सालों में यह योजना ध्वस्त हो गई और पता चला कि यह एक पोंज़ी स्कीम थी, जिसमें निवेशकों का पैसा गलत तरीके से बिटकॉइन में डाइवर्ट किया गया था। जैसे-जैसे शिकायतें बढ़ीं, प्रवर्तन निदेशालय (ED) और पुलिस ने जांच शुरू की और भारद्वाज समेत कई आरोपियों की संपत्तियां अटैच कीं।
इसी जांच में राज कुंद्रा का नाम सामने आया, जिनके पास कथित रूप से 285 बिटकॉइन थे। ED ने दावा किया कि यह बिटकॉइन भारद्वाज से जुड़ी धोखाधड़ी की कमाई का हिस्सा हैं और कुंद्रा इनके “लाभार्थी स्वामी” हैं। पिछले कुछ सालों में ED ने कुंद्रा की संपत्तियों को ट्रैक किया, उनके बयान दर्ज किए और मुंबई-पुणे स्थित फ्लैट, बंगला और शेयर निवेश सहित करीब ₹98 करोड़ की संपत्ति जब्त की। जांच में यह भी सामने आया कि कुंद्रा ने अपनी पत्नी शिल्पा शेट्टी को कुछ प्रॉपर्टी बाजार दर से बहुत कम कीमत पर ट्रांसफर की, जिससे मनी लॉन्ड्रिंग का शक और गहरा हो गया। अंततः 2025 में ED ने विशेष PMLA अदालत में एक विस्तृत चार्जशीट दाखिल की, जिसमें आरोप लगाया गया कि कुंद्रा ने सबूत छिपाए और जांच में सहयोग नहीं किया। अब मामला अदालत में है और आने वाले महीनों में यह तय होगा कि क्या ED अपने आरोपों को ठोस सबूतों से साबित कर पाती है या राज कुंद्रा अपनी बेगुनाही साबित कर पाते हैं। यह पूरी कहानी भारत में क्रिप्टोकरेंसी के अनियमित बाजार और उसके दुरुपयोग की एक मिसाल बन चुकी है।




