एबीसी नेशनल न्यूज | नई दिल्ली | फरवरी 2026
कांग्रेस नेता अजय कुमार लल्लू ने “एप्सटीन फाइल्स” को लेकर बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे द्वारा संसद के भीतर दिए गए बयानों पर तीखा हमला करते हुए एक पुराने लेकिन अत्यंत संवेदनशील राजनीतिक अध्याय—स्नूपगेट—को फिर से केंद्र में ला खड़ा किया है। यह वही मामला है, जिसमें गुजरात में मुख्यमंत्री रहते हुए नरेंद्र मोदी के कार्यकाल के दौरान एक युवा महिला वास्तुकार मानसी सोनी की कथित अवैध जासूसी के आरोप लगे थे।
लल्लू ने सोशल मीडिया पर एक पुरानी तस्वीर साझा करते हुए लिखा कि “एप्सटीन फाइल्स किसी धार्मिक ग्रंथ की तरह पवित्र नहीं हैं,” और निशिकांत दुबे से सवाल किया कि वे किन संदर्भों और किन पुस्तकों के आधार पर आरोप लगा रहे हैं। उन्होंने अपने पोस्ट में यह भी पूछा—“मानसी सोनी कौन है, क्या यह आपको पता है?”—और कहा कि सत्ता के आचरण से जुड़े सवालों से ध्यान भटकाने की कोशिश की जा रही है।
स्नूपगेट और 2013 के टेप्स का संदर्भ
अजय कुमार लल्लू ने 2013 में सामने आए उन ऑडियो टेप्स का हवाला दिया, जिन्हें उस समय गुलाइल और कोबरा पोस्ट ने सार्वजनिक किया था। इन टेप्स में तत्कालीन गृह राज्य मंत्री अमित शाह को वरिष्ठ पुलिस अधिकारी जी.एल. सिंघल को एक युवती की 24 घंटे निगरानी के निर्देश देते सुना गया था। विपक्ष ने इन निर्देशों में प्रयुक्त “साहेब” शब्द को उस समय के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी से जोड़ा था—हालांकि सत्ता पक्ष ने इन आरोपों को खारिज किया था।
“वुमेनाइज़र” टिप्पणी और पुराने सार्वजनिक बयान
लल्लू ने अपने बयान में यह भी कहा कि बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद सुब्रमण्यम स्वामी द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए “Womanizer” जैसे शब्द के प्रयोग का उल्लेख सार्वजनिक रूप से हुआ था, लेकिन इस पर सत्ताधारी दल की ओर से कोई औपचारिक जवाब नहीं आया। लल्लू ने इस संदर्भ को सत्ता की नैतिकता पर सवाल के रूप में पेश किया।
अफसरों के दावों का हवाला
कांग्रेस नेता ने दावा किया कि गुजरात कैडर के कुछ आईएएस और आईपीएस अधिकारियों ने समय-समय पर सार्वजनिक मंचों या रिकॉर्ड पर आकर उस दौर के घटनाक्रम को लेकर सवाल उठाए थे। उन्होंने यह भी कहा कि स्नूपगेट प्रकरण में एक युवती को अपनी निजता की रक्षा के लिए सर्वोच्च न्यायालय तक जाना पड़ा—हालांकि इन दावों को लेकर सत्ता पक्ष का रुख पहले भी अलग रहा है।
स्नूपगेट: वे बिंदु जिन पर विवाद कायम है
लल्लू ने अपने बयान में उन तथ्यों को दोहराया, जिन पर आज भी राजनीतिक विवाद बना हुआ है—
2001 के भुज भूकंप के बाद पुनर्वास परियोजनाओं के दौरान मानसी सोनी का गुजरात आना और तत्कालीन मुख्यमंत्री से मुलाकात।
2009 में गुजरात पुलिस की कई इकाइयों द्वारा एक ही महिला की निगरानी।
अहमदाबाद से मुंबई तक फिजिकल फॉलो-अप और गतिविधियों की रिपोर्टिंग।
बिना न्यायिक अनुमति फोन टैपिंग के आरोप, जिन्हें विपक्ष ने कानून का उल्लंघन बताया।
लल्लू का कहना है कि यदि यह केवल “सुरक्षा” का मामला था, तो इतनी व्यापक निगरानी की आवश्यकता क्यों पड़ी।
निशिकांत दुबे के संसदीय बयानों पर पलटवार
अजय कुमार लल्लू ने कहा कि “एप्सटीन फाइल्स” को लेकर निशिकांत दुबे द्वारा संसद में दिए गए बयानों का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय संदर्भों का सहारा लेकर घरेलू सवालों से ध्यान हटाना है। उनके अनुसार, दूसरों पर आरोप लगाते समय नैतिकता की दुहाई दी जाती है, लेकिन सत्ता के अपने आचरण पर सवाल उठते ही चुप्पी साध ली जाती है।
बीजेपी का पक्ष
बीजेपी का कहना है कि स्नूपगेट के आरोप तथ्यहीन हैं और निगरानी सुरक्षा कारणों से की गई थी। पार्टी ने इसे विपक्ष की राजनीतिक रणनीति बताया है। सोनी परिवार की ओर से भी पूर्व में सरकार के समर्थन में बयान सामने आए थे।
आज का संदर्भ
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, एप्सटीन फाइल्स को लेकर शुरू हुई बहस अब केवल अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम तक सीमित नहीं रही। स्नूपगेट जैसे पुराने विवादों को जोड़कर यह सत्ता के दुरुपयोग, निजता के अधिकार और सार्वजनिक जीवन में नैतिक जवाबदेही का बड़ा प्रश्न बन गया है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक टकराव और तीखा होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
(यह रिपोर्ट सार्वजनिक बयानों, 2013 में प्रकाशित ऑडियो टेप्स, आधिकारिक जांचों और दोनों पक्षों की दलीलों के संदर्भ पर आधारित है। आरोपों की सत्यता पर अलग-अलग दावे मौजूद हैं।)




