Home » National » ‘सेवा तीर्थ’ या सत्ता का नया दरबार? साउथ ब्लॉक छोड़ नए महल में शिफ्ट पीएम मोदी

‘सेवा तीर्थ’ या सत्ता का नया दरबार? साउथ ब्लॉक छोड़ नए महल में शिफ्ट पीएम मोदी

Facebook
WhatsApp
X
Telegram

एबीसी नेशनल न्यूज | नई दिल्ली | 13 फरवरी 2026

प्रधानमंत्री Narendra Modi का कार्यालय अब साउथ ब्लॉक से हटकर नए परिसर ‘सेवा तीर्थ’ में शिफ्ट किया जा रहा है। सरकार इसे प्रशासनिक आधुनिकीकरण और बेहतर समन्वय की दिशा में बड़ा कदम बता रही है, लेकिन विपक्ष और आलोचकों का कहना है कि यह बदलाव प्रतीकों की राजनीति का एक और उदाहरण है—जहां नाम में ‘सेवा’ है, लेकिन फैसलों में केंद्रीकरण और दिखावे की झलक दिखाई देती है।

केंद्रीय विस्टा परियोजना के तहत तैयार इस नए परिसर को अत्याधुनिक तकनीक, उच्च स्तरीय सुरक्षा और आधुनिक कार्यस्थल सुविधाओं से लैस बताया जा रहा है। समर्थकों का दावा है कि इससे निर्णय प्रक्रिया और तेज होगी। मगर सवाल उठ रहा है कि क्या प्रशासन की रफ्तार भवन बदलने से बढ़ती है या जवाबदेही और पारदर्शिता से?

साउथ ब्लॉक, जिसने स्वतंत्र भारत की कई ऐतिहासिक नीतियों और निर्णयों को देखा, अब पीछे छूट जाएगा। आलोचकों का कहना है कि ऐतिहासिक इमारत छोड़कर नए परिसर में जाना सिर्फ “नई छवि” गढ़ने का प्रयास है। उनका तर्क है कि जब देश में बेरोजगारी, महंगाई और बुनियादी सुविधाओं के मुद्दे सामने हों, तब प्रशासनिक भवनों के भव्य निर्माण को प्राथमिकता देना जनभावनाओं से दूरी दिखाता है।

‘सेवा तीर्थ’ नाम अपने आप में बड़ा प्रतीकात्मक है। लेकिन विपक्ष का कहना है कि सेवा का असली पैमाना जनता की जिंदगी में सुधार है—न कि सत्ता के गलियारों का विस्तार। उनका सवाल है कि क्या यह बदलाव शासन को अधिक संवेदनशील बनाएगा या सत्ता को और अधिक केंद्रीकृत करेगा?

सरकार का पक्ष साफ है—यह आधुनिक भारत की प्रशासनिक जरूरत है। मगर राजनीति में हर बदलाव के साथ संदेश भी जुड़ा होता है। ‘सेवा तीर्थ’ का उद्घाटन एक नए अध्याय की शुरुआत बताया जा रहा है। अब देखना यह है कि यह अध्याय सेवा का होगा या सिर्फ सत्ता के नए पते का।

5 1 vote
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments