पटना 4 नवंबर 2025
बिहार विधानसभा चुनाव के रण में नेताओं के वादे और घोषणाएं तेज होती जा रही हैं। इसी कड़ी में राजद नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने किसानों और सरकारी कर्मचारियों को साधने के लिए बड़े ऐलान किए हैं। उन्होंने वादा किया कि उनकी सरकार आने पर किसानों को मुफ्त बिजली दी जाएगी और Minimum Support Price (MSP) की कानूनी गारंटी सुनिश्चित की जाएगी ताकि राज्य का अन्नदाता मंडी और बिचौलियों की मनमानी से पूरी तरह मुक्त हो सके। तेजस्वी ने स्पष्ट कहा कि किसान हमारी रीढ़ हैं, और उनकी समृद्धि ही बिहार के विकास की सबसे मज़बूत बुनियाद है।
तेजस्वी यादव ने चुनावी सभा में बताया कि बिहार में कृषि आधारित अर्थव्यवस्था होने के बावजूद किसानों को आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ता है। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार के कार्यकाल में बिजली दरों में बढ़ोतरी, सिंचाई के साधनों की कमी और MSP की अनिश्चितता ने किसानों की कमर तोड़ दी है। तेजस्वी ने कहा कि जबतक खेतों तक सस्ती और निर्बाध बिजली नहीं पहुंचेगी, तब तक कृषि उत्पादन बढ़ नहीं सकता और न ही किसान अपनी मेहनत का पूरा फल पा सकते हैं। उन्होंने घोषणा की कि किसानों को बिजली बिल से पूरी तरह राहत दी जाएगी और हर वर्ग के किसान को उसका न्यूनतम मूल्य कानूनन मिलेगा, यह हमारा पक्का वादा है।
सिर्फ किसानों पर ही नहीं, बल्कि सरकारी कर्मचारियों पर भी तेजस्वी यादव ने ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने कहा कि बिहार में ट्रांसफर और पोस्टिंग भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा अड्डा बन चुका है। कर्मचारियों को अक्सर अपनी तैनाती बदलवाने या मनचाही पोस्टिंग पाने के लिए दलालों और राजनीतिक पकड़ रखने वालों के चक्कर काटने पड़ते हैं। तेजस्वी ने इसका सीधा समाधान रखते हुए कहा कि राजद की सरकार आते ही एक पारदर्शी ऑनलाइन सिस्टम लागू किया जाएगा, जिसमें ट्रांसफर-पोस्टिंग पूरी तरह मेरिट और आवश्यकता के आधार पर होगी। इससे न केवल भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी बल्कि कर्मचारियों की कार्यक्षमता और प्रशासनिक जवाबदेही में भी वृद्धि होगी।
तेजस्वी ने मंच से बीजेपी-जेडीयू सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि 20 साल का शासन सिर्फ जुमलों और छलावे में बीता है। किसानों के खाते में सम्मान राशि भेजकर दिखावा किया गया, लेकिन उनकी लागत की भरपाई और आय दोगुनी करने का वादा हवा-हवाई साबित हुआ। उन्होंने कहा कि बिहार के युवा रोजगार के लिए पलायन को मजबूर हैं और किसान अपनी फसल का दाम न मिल पाने पर हताश हैं। यह सब बताता है कि सरकार ने विकास की असल तस्वीर से मुंह मोड़ लिया है।
बिहार की जनता के सामने अब विकल्प साफ है — एक ओर वादों की लम्बी लिस्ट लेकिन हकीकत में शून्य, और दूसरी ओर तेजस्वी यादव का ऐसा एजेंडा जिसमें किसान, कर्मचारी, युवा, मजदूर सबकी सीधी और सुनिश्चित हिस्सेदारी हो। तेजस्वी का यह चुनावी मास्टरस्ट्रोक आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति की दिशा और दशा दोनों तय कर सकता है।




