एबीसी डेस्क 12 दिसंबर 2025
अल्पसंख्यक स्कूलों को Right to Education (RTE) Act से छूट देने के मौजूदा प्रावधान को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अगर इस तरह के मामलों में बिना गहराई से सोचे-समझे निर्णय दिए गए, तो यह पूरी न्याय व्यवस्था और संविधान की मूल भावना के खिलाफ होगा। कोर्ट ने याचिकाकर्ता से यह भी पूछा कि वह किस आधार पर यह दावा कर रहा है कि अल्पसंख्यक स्कूलों को मिली छूट शिक्षा के अधिकार को कमजोर करती है। न्यायालय ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में समानता जरूरी है, लेकिन संविधान में अल्पसंख्यकों को दिए गए अधिकार भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं, जिन्हें संतुलित तरीके से लागू करना होता है।
पीठ ने टिप्पणी की कि ऐसे मुद्दों पर जल्दबाजी में कोई भी फैसला देना न तो छात्रों के हित में होगा और न ही देश की शिक्षा प्रणाली के लिए अच्छा रहेगा। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि यह मामला केवल RTE अधिनियम की व्याख्या तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे जुड़े संवैधानिक अधिकार, अल्पसंख्यकों की स्वायत्तता और शिक्षा की गुणवत्ता जैसे बड़े मुद्दे भी सामने आते हैं। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि वह किसी भी परिस्थिति में ऐसी स्थिति नहीं बनने देगी, जहाँ कानून की भावना पर प्रतिकूल असर पड़े या न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल उठे।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने केंद्र सरकार से भी जवाब मांगा कि आखिर अल्पसंख्यक स्कूलों को RTE के तहत छूट देने का क्या तर्क है और इसका व्यावहारिक असर क्या पड़ता है। अदालत ने कहा कि यह मामला लाखों बच्चों की शिक्षा और उनके भविष्य से जुड़ा है, इसलिए इसे बेहद गंभीरता और संवेदनशीलता से समझना होगा। सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणियों से साफ है कि वह इस याचिका को हल्के में नहीं ले रहा और आने वाले समय में इस मुद्दे पर विस्तृत और गहन बहस देखने को मिल सकती है।




