राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 19 अगस्त 2026
कोयला ब्लॉक आवंटन घोटाले से जुड़े मामलों की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को महत्वपूर्ण निर्देश दिया। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने दिल्ली हाईकोर्ट से कहा कि इन मामलों में चल रहे ट्रायल पर रोक लगाने से बचा जाए और आरोपियों की लंबित अपीलों का चार सप्ताह के भीतर निपटारा किया जाए।
सुप्रीम कोर्ट ने यह निर्देश उस समय दिया, जब अदालत को बताया गया कि कोयला घोटाले से जुड़े कुछ मामलों में आरोपियों ने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया है, जबकि कुछ मामलों में राहत के लिए सीधे सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दायर की गई हैं।
पीठ में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के अलावा न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना शामिल थे। अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि मामलों की सुनवाई में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए। साथ ही आरोपियों के कानूनी अधिकार भी प्रभावित नहीं होने चाहिए।
कोयला ब्लॉक आवंटन मामले देश के चर्चित भ्रष्टाचार मामलों में रहे हैं। वर्ष 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने 1993 से 2010 के बीच केंद्र सरकार द्वारा आवंटित 214 कोयला ब्लॉकों के आवंटन रद्द कर दिए थे। अदालत ने इसके साथ ही मामलों की सुनवाई के लिए विशेष CBI अदालत में ट्रायल का रास्ता साफ किया था।
CBI ने कोयला ब्लॉक आवंटन से जुड़े 57 मामले दर्ज किए थे। इनमें से कई मामलों से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के मामले भी सामने आए और प्रवर्तन निदेशालय ने अलग से कार्रवाई की।
अब सुप्रीम कोर्ट के ताजा निर्देश के बाद दिल्ली हाईकोर्ट में लंबित अपीलों पर तेजी से सुनवाई की उम्मीद है। अदालत का स्पष्ट संदेश है कि इतने पुराने और गंभीर मामलों में न्यायिक प्रक्रिया अनिश्चितकाल तक लंबित नहीं रहनी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने चार सप्ताह की समयसीमा तय करते हुए एक तरफ ट्रायल में अनावश्यक रोक से बचने को कहा है, तो दूसरी तरफ आरोपियों को उपलब्ध कानूनी उपायों पर समयबद्ध फैसला सुनिश्चित करने की दिशा भी दिखाई है।




