खार्तूम / एल फाशर, 29 अक्टूबर 2025
सूडान के पश्चिमी दरफुर क्षेत्र के एल फाशर शहर में हालात बेहद भयावह हो चुके हैं। पिछले 18 महीनों से जारी गृहयुद्ध के बीच अब Rapid Support Forces (RSF) नामक शक्तिशाली मिलिशिया ने शहर पर पूर्ण नियंत्रण हासिल कर लिया है। संयुक्त राष्ट्र (UN) और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि शहर में “सामूहिक नरसंहार (Mass Killing)” की आशंका गहराती जा रही है।
घेराबंदी के बीच मौत का साया
एल फाशर शहर, जो दरफुर क्षेत्र की आखिरी बड़ी सैन्य चौकी थी, अब RSF के कब्ज़े में है। शहर में करीब 5 लाख नागरिक फंसे हुए हैं — जिनके पास न तो खाने का सामान है, न दवा, और न भागने का कोई रास्ता।
स्थानीय नागरिकों के अनुसार, RSF के लड़ाके घर-घर तलाशी ले रहे हैं और जातीय आधार पर लोगों की हत्या कर रहे हैं। “हम बाहर निकलते हैं तो गोली लगती है, अंदर रहते हैं तो भूख मारती है,” — एक नागरिक ने बीबीसी को बताया।
संघर्ष की जड़ें
सूडान में अप्रैल 2023 में सत्ता संघर्ष शुरू हुआ था। देश की सेना (SAF) और RSF — दोनों ने मिलकर पहले तानाशाह उमर अल-बशीर को हटाया था, लेकिन जल्द ही सत्ता पर नियंत्रण की लड़ाई भड़क उठी। दरफुर क्षेत्र पहले भी 2003 से 2008 के बीच जातीय नरसंहार का केंद्र रह चुका है, और अब वही इतिहास फिर दोहराने का खतरा मंडरा रहा है।
संभावित मानवीय संकट
- भूख और बीमारी: संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि शहर में भूखमरी स्तर 5 तक पहुंच गया है, यानी लोग घास और पत्ते खाकर जिंदा हैं।
- बच्चों पर कहर: UNICEF ने चेतावनी दी है कि “एल फाशर अब बच्चों के कष्ट का केंद्र (Epicentre of child suffering)” बन गया है।
- स्वास्थ्य सेवाएँ ठप: शहर का मुख्य अस्पताल नष्ट हो चुका है, और मेडिकल स्टाफ को RSF ने शहर से बाहर निकाल दिया है।
अंतरराष्ट्रीय अपील
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने तत्काल मानवीय गलियारा (Humanitarian Corridor) बनाने की अपील की है ताकि नागरिकों को सुरक्षित निकाला जा सके।
अमेरिका और यूरोपीय संघ ने RSF पर युद्ध अपराधों के आरोप लगाए हैं। वहीं अफ्रीकी संघ (African Union) ने कहा है कि अगर हालात नहीं सुधरे तो “यह सूडान का दूसरा विभाजन साबित हो सकता है।”
संभावित परिणाम
अगर अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने अब भी दखल नहीं दिया, तो स्थिति रवांडा जैसे नरसंहार की ओर बढ़ सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, RSF द्वारा दरफुर पर कब्ज़ा सूडान के स्थायी विभाजन की नींव रख सकता है, जिससे अफ्रीका का अब तक का सबसे बड़ा मानवीय संकट जन्म ले सकता है।
सूडान का एल फाशर अब युद्ध, भूख और बेबसी का प्रतीक बन गया है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए यह केवल एक समाचार नहीं, बल्कि मानवता की अग्नि-परीक्षा है। यदि अब भी हस्तक्षेप नहीं हुआ, तो इतिहास “एल फाशर” को एक और “दारफुर नरसंहार” के रूप में याद करेगा।




