राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | अयोध्या/लखनऊ | 23 जून 2026
अयोध्या राम मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे में कथित अनियमितताओं की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट उत्तर प्रदेश सरकार को सौंप दी है। इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद देश के सबसे चर्चित धार्मिक संस्थानों में से एक राम मंदिर की वित्तीय पारदर्शिता को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो गई है।
सूत्रों के अनुसार SIT ने मंगलवार को अपर मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपी। हालांकि सरकार या जांच एजेंसियों की ओर से अभी रिपोर्ट की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। अधिकारियों का कहना है कि यह केवल प्रारंभिक रिपोर्ट है और मामले में आगे भी विस्तृत जांच की आवश्यकता पड़ सकती है।
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर SIT का गठन किया था। ट्रस्ट को प्राप्त दान और चढ़ावे के प्रबंधन को लेकर उठे सवालों तथा कथित गड़बड़ियों के आरोपों के बाद यह जांच शुरू की गई थी।
राम मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था और देश की सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक माना जाता है। ऐसे में चढ़ावे के उपयोग और प्रबंधन को लेकर उठने वाले सवाल स्वाभाविक रूप से राष्ट्रीय चर्चा का विषय बन जाते हैं। यही कारण है कि SIT की जांच को लेकर राजनीतिक गलियारों से लेकर सामाजिक संगठनों तक सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
सूत्रों का कहना है कि जांच के दौरान दान संग्रह प्रणाली, नकद और डिजिटल चढ़ावे के रिकॉर्ड, लेखा-जोखा और प्रबंधन प्रक्रियाओं की समीक्षा की गई है। जांच एजेंसियां यह भी देख रही हैं कि कहीं दान की राशि के प्रबंधन में किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन या वित्तीय अनियमितता तो नहीं हुई।
हालांकि अभी तक किसी व्यक्ति या संस्था को दोषी नहीं ठहराया गया है और न ही रिपोर्ट के निष्कर्ष सार्वजनिक किए गए हैं। लेकिन प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद यह संकेत जरूर मिला है कि मामला केवल आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रहेगा और आवश्यक हुआ तो जांच का दायरा और बढ़ाया जा सकता है।
राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों की ओर से भी इस मामले पर प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। विपक्षी दल लंबे समय से मंदिर ट्रस्ट के वित्तीय लेन-देन में पारदर्शिता की मांग करते रहे हैं, जबकि ट्रस्ट का कहना है कि सभी प्रक्रियाएं नियमानुसार संचालित की जा रही हैं और जांच में पूरा सहयोग दिया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि धार्मिक संस्थानों में आने वाले चढ़ावे और दान की राशि का पारदर्शी प्रबंधन केवल कानूनी नहीं बल्कि नैतिक जिम्मेदारी भी है। श्रद्धालु अपनी आस्था और विश्वास के आधार पर दान देते हैं, इसलिए उस धन के उपयोग को लेकर किसी भी प्रकार का संदेह पैदा होना संस्थान की विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकता है।
अब सबकी निगाहें SIT की विस्तृत रिपोर्ट और सरकार की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है। वहीं यदि आरोप निराधार साबित होते हैं तो इससे मंदिर ट्रस्ट को बड़ी राहत मिलेगी।
फिलहाल इतना तय है कि राम मंदिर चढ़ावा मामला अब प्रशासनिक जांच के महत्वपूर्ण चरण में प्रवेश कर चुका है और आने वाले दिनों में इस रिपोर्ट के निष्कर्ष राष्ट्रीय बहस का केंद्र बन सकते हैं।




