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“SIR नहीं, Silent Invisible Rigging : TMC

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कोलकाता/ नई दिल्ली 6 नवंबर 2025

देश की राजनीति में इन दिनों लोकतंत्र की पारदर्शिता और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर एक गहरा और तीखा संघर्ष चल रहा है। यह टकराव तब और उग्र हो गया जब राहुल गांधी ने “H-Bomb”—जिसे उन्होंने ‘वोट चोरी मॉडल’ नाम दिया—का खुलासा किया, जिसने राजनीतिक गलियारों में एक बड़ा तूफान खड़ा कर दिया है। इसी कड़ी में, तृणमूल कांग्रेस (TMC) की प्रभावशाली सांसद सागरिका घोष ने एक बड़ा और सीधा हमला बोलते हुए चुनाव आयोग (ECI) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका स्पष्ट दावा है कि भारत की मतदाता सूचियों में बड़े पैमाने पर चल रही गड़बड़ियां कोई नई बात नहीं, बल्कि एक सुनियोजित धोखा है, जिसका पर्दाफाश अब तेज़ी से देश के सामने हो रहा है।

फर्जी वोटिंग की साज़िश पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और स्टालिन का शुरुआती संकेत

सागरिका घोष ने अपने हमले में इस बात को रेखांकित किया कि फर्जी वोटिंग और डुप्लीकेट EPIC कार्ड की साज़िश की ओर पहली बार ध्यान खींचने वालों में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी थीं, जिन्होंने फरवरी 2025 में ही इस खतरे के प्रति आगाह कर दिया था। इसके तुरंत बाद, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने भी इसी तरह की चुनावी अनियमितताओं के खिलाफ अपनी आवाज़ बुलंद की थी। लेकिन, घोष के अनुसार, राहुल गांधी के हालिया खुलासे ने इस मुद्दे को एक राष्ट्रीय संकट का रूप दे दिया है। राहुल गांधी का यह दावा कि एक ही चुनाव में 25 लाख तक फर्जी वोट डाले जा सकते हैं, लोकतंत्र और जनता के वोटिंग अधिकार पर एक विशाल और संगठित हमले की ओर इशारा करता है, जिसने पूरे देश को सकते में डाल दिया है।

“MASSIVE FRAUD on Citizens”: SIR की जल्दबाज़ी पर टीएमसी सांसद का सवाल

टीएमसी सांसद सागरिका घोष ने इस पूरी गतिविधि को नागरिकों के अधिकारों पर किया गया “MASSIVE FRAUD on Citizens”—यानी नागरिकों के साथ एक बड़ी धोखाधड़ी—करार दिया है। उन्होंने चुनाव आयोग (ECI) की कार्रवाई पर तीखे प्रश्न खड़े किए हैं। उनका सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतनी गंभीर अनियमितताओं की जाँच और जवाबदेही सुनिश्चित करने के बजाय, ECI ने इतनी जल्दबाज़ी में SIR (Special Intensive Revision) यानी विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया क्यों शुरू कर दी? घोष ने संदेह व्यक्त किया कि क्या विश्वसनीयता की मांग कर रहे विपक्षी दलों की आवाज़ को दबाना ही इस प्रक्रिया का असली और एकमात्र उद्देश्य था, जिससे फर्जीवाड़े के आरोपों को जल्द से जल्द ठंडा किया जा सके।

SIR का मतलब: Silent Invisible Rigging – ‘झूठे वादों की पार्टी’ को फायदा

सागरिका घोष ने चुनाव आयोग द्वारा दिए गए SIR (Special Intensive Revision) शब्द को खारिज़ करते हुए उसकी अपनी एक व्याख्या प्रस्तुत की। उन्होंने जनता की भाषा में कहा कि SIR का मतलब Special Revision नहीं, बल्कि “Silent Invisible Rigging” है! यानी यह मतदाता सूची में चुपचाप, अदृश्य तरीके से और बड़े पैमाने पर हेरफेर करने की एक गुप्त कोशिश है। उनका स्पष्ट आरोप है कि इस ‘चुपचाप चोरी’ का सीधा लाभ भारतीय जनता पार्टी (BJP) को पहुँचाने की साज़िश रची जा रही है। उन्होंने इसे “Bharatiya Jumla Party की छल और धोखे की रणनीति” बताया। घोष ने ECI से दो टूक शब्दों में जवाब माँगा और कहा कि अगर चुनाव आयोग वाकई निष्पक्ष है, तो वह इन आरोपों पर तत्काल जवाब दे और कम से कम अपनी वेबसाइट से ‘ब्राजीलियन मॉडल’ से संबंधित पेज हटाने की जल्दबाज़ी न करे।

ब्राजीलियन मॉडल और लोकतंत्र की हत्या: जनता का बढ़ता संदेह

राहुल गांधी ने जिस “Brazilian Model of Vote Fraud” से संबंधित वेबसाइट पेज को सार्वजनिक किया था, उसे कुछ ही घंटों के भीतर ECI की वेबसाइट से हटा दिए जाने को लेकर देशभर में गंभीर सवाल उठ रहे हैं। कांग्रेस प्रवक्ता आलोक शर्मा ने इस कार्रवाई पर टिप्पणी करते हुए कहा कि “अगर सब सही था, तो इतनी घबराहट क्यों?” यह प्रश्न अब केवल विपक्षी दल ही नहीं, आम जनता भी पूछ रही है, जिससे चुनाव आयोग की मंशा पर संदेह गहराता जा रहा है। यह सिर्फ वोट चोरी नहीं, लोकतंत्र की हत्या है।

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