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मनरेगा बचाओ संग्राम: कांग्रेस का 45 दिन का देशव्यापी आंदोलन, पंचायत से संसद तक संघर्ष का ऐलान

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सुमन कुमार | नई दिल्ली 3 जनवरी 2026

कांग्रेस पार्टी ने मनरेगा को “कमज़ोर और केंद्रीकृत” किए जाने के आरोपों के बीच ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ नाम से एक बड़े, चरणबद्ध और देशव्यापी आंदोलन का ऐलान किया है। यह अभियान 10 जनवरी से 25 फरवरी 2026 तक चलेगा और करीब 45 दिनों तक पंचायत, ब्लॉक, जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर जनआंदोलन का रूप लेगा। कांग्रेस महासचिव (संचार) जयराम रमेश ने साफ कहा कि यह कोई दिल्ली-केंद्रित आंदोलन नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत की आवाज़ है।

कांग्रेस का कहना है कि मनरेगा कोई सरकारी योजना भर नहीं, बल्कि कानूनी और संवैधानिक अधिकार है, जिसकी जिम्मेदारी केंद्र सरकार की है। पार्टी का आरोप है कि नए कानून के जरिए केंद्र ने 60:40 फंडिंग फॉर्मूला अपनी मर्जी से लागू कर दिया, जो संविधान के अनुच्छेद 258 का उल्लंघन है। जयराम रमेश ने कहा कि इस तरह का फैसला राज्यों की सहमति के बिना लिया गया और इसे न्यायालय में चुनौती दी जाएगी।

तीन चरणों में चलेगा आंदोलन

अभियान के पहले चरण में 8 जनवरी को PCC स्तर पर तैयारी बैठकें होंगी, 10 जनवरी को जिला कांग्रेस कार्यालयों में प्रेस कॉन्फ्रेंस और 11 जनवरी को जिलों में एकदिवसीय उपवास कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

दूसरे चरण (12–29 जनवरी) में ग्राम पंचायतों में चौपालें, नुक्कड़ सभाएं, पर्चा वितरण और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे व नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के पत्रों का वितरण किया जाएगा।

तीसरे चरण में जिला स्तर पर धरने, राज्य स्तर पर विधानसभा घेराव और अंत में चार ज़ोनल AICC मनरेगा बचाओ रैलियां होंगी।

कांग्रेस का आरोप: अधिकार से योजना, योजना से केंद्रीकरण

कांग्रेस ने कहा कि 2005 में मनरेगा सर्वसम्मति से संसद में पारित हुआ था और इसे स्थायी समिति की सिफारिशों के बाद लागू किया गया। इस योजना से पिछले 17 वर्षों में करोड़ों मज़दूरों और परिवारों को राहत मिली, खासकर कोविड-19 के दौरान। लेकिन नए कानून में न रोजगार की गारंटी है, न राज्यों को वित्तीय सुरक्षा—सिर्फ केंद्रीकरण की गारंटी है।

“यह अभियान नहीं, संग्राम है”

जयराम रमेश ने कहा कि ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ का साफ संदेश है—मनरेगा को वापस लाओ, ग्रामीण भारत को बचाओ। कांग्रेस का दावा है कि जिस तरह से मनरेगा को बदला गया है, वह देशहित में नहीं है और इससे गरीब, मज़दूर और ग्रामीण भारत सबसे ज़्यादा प्रभावित होगा। पार्टी ने साफ किया कि यह लड़ाई सड़क से संसद और अदालत तक लड़ी जाएगी।

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