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सऊदी में विदेशी निवेशकों को खींचने की कोशिश: जेद्दा–दमाम में अब कबाब के साथ शराब भी

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अंतरराष्ट्रीय डेस्क 27 नवंबर 2025

सऊदी अरब—जहां कभी “एक बूंद शराब” का नाम लेना भी गुनाह माना जाता था—आज अपने इतिहास के सबसे दिलचस्प मोड़ पर खड़ा है। बीते 73 सालों से चला आ रहा सख्त शराब प्रतिबंध अब धीरे-धीरे पिघलता दिख रहा है, और किंगडम इतनी तेजी से अपनी नीतियों में बदलाव कर रहा है कि दुनिया हैरान है और विदेशी कंपनियां उत्साहित। विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने के लिए सऊदी अब सिर्फ अपने तेल, बड़े प्रोजेक्ट्स और चमचमाती गगनचुंबी इमारतों का ही सहारा नहीं ले रहा—बल्कि अब जेद्दा और दमाम में “कबाब के साथ शराब” का कॉम्बो भी तैयार किया जा रहा है। यह बदलाव सिर्फ कोई साधारण नीति संशोधन नहीं, बल्कि एक ऐसा संकेत है कि किंगडम अब पूरी योजना के साथ वैश्विक बिज़नेस केंद्र बनने की तरफ बढ़ रहा है।

नई योजना के अनुसार, जेद्दा और दमाम में विशेष शराब आउटलेट्स बनाने की तैयारी जोरों पर है—जहां प्रवेश किसी “VIP क्लब” जैसा होगा और खरीदारी केवल गैर-मुस्लिम विदेशी कर्मचारियों, अंतरराष्ट्रीय राजनयिकों और प्रीमियम रेजिडेंसी धारकों तक सीमित रहेगी। धहरान स्थित अरामको कैंपस में बन रहा नया शराब स्टोर इस कहानी का सबसे बड़ा किरदार है—जहां दुनिया भर से आए इंजीनियर, साइंस रिसर्चर, AI विशेषज्ञ और तकनीकी दिग्गज हजारों की संख्या में काम करते हैं। जेद्दा में राजनयिकों के लिए बनाया जा रहा आउटलेट भी किंगडम की अंतरराष्ट्रीय छवि को नया आकर्षण देने वाला है। और रियाध का मशहूर “बूज़ बंकर”—जो पहले सिर्फ राजनयिकों के लिए खुला था—अब चुनिंदा प्रीमियम रेजिडेंसी धारकों को भी शराब बेच रहा है। यह चुपचाप, लेकिन बेहद रणनीतिक संकेत है कि सऊदी अब शराब नीति को सीमित दायरे से निकालकर व्यापक एक्सपैट कम्युनिटी तक फैलाने की तैयारी में है।

यही नहीं—नीति में इस बड़े बदलाव पर सरकार का कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, और अरामको भी मीडिया के हर सवाल से बचते हुए शांति बनाए रखे हुए है, लेकिन जमीनी स्तर पर चल रही तेज गतिविधियों ने स्पष्ट कर दिया है कि ‘किंगडम के भीतर बदलाव की मशीन’ तेज़ी से चल रही है। रॉयटर्स की रिपोर्ट में एक वरिष्ठ अधिकारी ने दावा किया कि नए स्टोर 2026 तक पूर्ण रूप से शुरू हो जाएंगे। Bloomberg की एक रिपोर्ट में एक विदेशी निवासी ने रियाध के स्टोर से आधिकारिक रूप से शराब खरीदने की पुष्टि भी कर दी—जिससे पता चलता है कि बदलाव सिर्फ कागज़ों पर नहीं, वास्तविकता में उतर चुका है।

यह पूरा परिवर्तन क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की महत्वाकांक्षी Vision 2030 का हिस्सा है—जिसका लक्ष्य सऊदी को तेल-निर्भरता से निकालकर पर्यटन, टेक्नोलॉजी, निवेश और सेवाओं पर आधारित आधुनिक अर्थव्यवस्था बनाना है। पिछले कुछ वर्षों में सऊदी ने जिस गति से सामाजिक सुधार लागू किए हैं—महिलाओं को ड्राइविंग की अनुमति, जेंडर सेग्रिगेशन में ढील, धार्मिक पुलिस की शक्ति में कटौती, सिनेमाघरों का खुलना, म्यूजिक फेस्टिवल और रेव पार्टियों की मंजूरी—उन्हें देखकर किसी को भी यह मानना पड़ेगा कि “न्यू सऊदी” एक अलग ही अध्याय लिख रहा है। अब शराब नीति में यह नियंत्रित ढील उसी कहानी की अगली कड़ी है।

पर्यटन बढ़ाने के लिए सऊदी 2026 तक 17 नए होटल खोलने की योजना बना चुका है, और वैश्विक यात्री किस तरह के अनुभव चाहते हैं—इसका बहुत ही सावधानी से अध्ययन किया जा रहा है। जब पर्यटन मंत्री अहमद अल-खतीब ने बयान दिया—“अभी तक कोई बदलाव नहीं हुआ है… अभी तक”—तो इस अभी तक ने दुनिया भर के विश्लेषकों को यह संकेत दे दिया कि आने वाले समय में सऊदी शराब नीति को और भी खोल सकता है।

समग्र रूप से देखें तो सऊदी एक बेहद नाजुक संतुलन साध रहा है—एक तरफ दुनिया का सबसे पवित्र इस्लामी केंद्र, और दूसरी तरफ तेजी से आधुनिक होती वैश्विक अर्थव्यवस्था का प्रतिस्पर्धी खिलाड़ी। शराब नीति में ढील इस संतुलन का सबसे संवेदनशील हिस्सा है, इसलिए इसे बेहद नियंत्रित, सीमित और चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जा रहा है।

अब दुनिया की निगाहें इस बात पर हैं कि क्या आने वाले वर्षों में सऊदी इन आउटलेट्स को सिर्फ राजनयिकों और प्रीमियम निवासियों तक सीमित रखेगा, या फिर एक्सपैट कम्युनिटी का दायरा और विस्तृत करेगा। इतना तय है—किंगडम बदल रहा है, और यह बदलाव अब दुनिया से छिपा नहीं रहा।

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