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संजय सिंह ने खोली अयोध्या जमीन घोटाले की पोल: 4 लाख की जमीन 1.77 करोड़ में बेचने का खेल

लखनऊ 14 नवंबर 2025

अयोध्या में विकास के नाम पर गरीब किसानों के साथ हुआ कथित महाघोटाला अब राष्ट्रीय बहस का मुद्दा बन चुका है। आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने विस्तार से दस्तावेज़ों के साथ यह खुलासा कर दिया है कि कैसे अयोध्या विकास प्राधिकरण (ADA) और एक बड़े प्राइवेट रियल एस्टेट ग्रुप के बीच योजनाबद्ध तरीके से किसानों की जमीन औने-पौने दाम पर हड़पने का खेल खेला गया।

संजय सिंह के अनुसार, अयोध्या विकास प्राधिकरण ने सबसे पहले गरीब किसानों को यह कहकर डरा-धमकाया कि जल्द ही अयोध्या का बड़ा विकास होने वाला है और इस विकास के लिए उनकी जमीन सरकार जबरन ले लेगी। किसानों को यह भी बता दिया गया कि अधिग्रहण होने पर प्रति बिस्वाह केवल 4 लाख रुपये ही मिलेंगे। प्रशासनिक दबाव और नोटिसों की भाषा ने मासूम किसानों को अंदर तक डरा दिया।

किसान अभी सदमे और घबराहट से उबर भी नहीं पाए थे कि तभी अचानक लोधा ग्रुप मैदान में उतर आया। जो जमीन प्राधिकरण 4 लाख की बता रहा था, उसे लोधा ग्रुप ने किसानों से 5 लाख रुपये प्रति बिस्वाह में खरीदना शुरू कर दिया। किसानों को लगा कि सरकार जबरन 4 लाख देगी ही, तो इससे 1 लाख ज्यादा यानी 5 लाख पाना ही बेहतर है। डर और असहायता के बीच अधिकांश किसानों ने अपनी पुश्तैनी जमीन लोधा को बेच दी।

इस पूरी प्रक्रिया के केंद्र में थे अयोध्या विकास प्राधिकरण के चेयरमैन विशाल सिंह, जिनके नाम से किसानों को धमकीभरे नोटिस भेजे गए थे। किसानों को लगातार यह बताया जा रहा था कि उनकी जमीन अधिग्रहित की जाएगी और कोई विकल्प नहीं होगा।

लेकिन असली खेल तब सामने आया जब किसानों के हाथ से जमीन निकल चुकी थी। जमीन खरीदने के ठीक बाद, अयोध्या विकास प्राधिकरण ने अचानक वह विकास योजना ही रद्द कर दी, जिसके नाम पर किसानों से जमीन छीनी गई थी। इसके बदले लोधा ग्रुप को अयोध्या में अपना प्राइवेट प्रोजेक्ट विकसित करने की अनुमति दे दी गई।

यहीं से घोटाले का सबसे बड़ा सच सामने आता है—

जिस जमीन को प्राधिकरण 4 लाख की बता रहा था, और जो लोधा ने किसानों से 5 लाख में खरीदी…

उसी जमीन की कीमत अब कागज़ों पर 1 बिस्वाह = 1.77 करोड़ रुपये बताई गई है!

यानी गरीब किसानों की जमीन को ‘विकास’ का डर दिखाकर छीना गया, और फिर उसे अरबों रुपये के प्रोजेक्ट में बदल दिया गया। यह पूरा मामला न सिर्फ भ्रष्टाचार का, बल्कि किसानों को धोखे में रखकर उनकी जमीन हड़पने का भी बेहद गंभीर उदाहरण है।

संजय सिंह ने कहा कि यह घोटाला बताता है कि ‘विकास’ की आड़ में किस तरह सत्ता-प्रशासन और निजी कंपनियां मिलकर किसानों के अधिकारों का खुला शोषण कर रही हैं। उन्होंने मांग की है कि इस मामले की CBI जांच हो और किसानों के साथ हुए अन्याय को तत्काल सुधारा जाए।

अभी सवाल यह है —

  1. क्या अयोध्या का विकास इसी तरीके से होगा?
  2. क्या गरीब किसानों की पुश्तैनी जमीन इस तरह 3. कॉरपोरेट प्रोजेक्ट्स की बलि चढ़ती रहेगी?

देश इस जवाब का इंतजार कर रहा है।

 

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