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39 रुपये बढ़ी सैलरी, 5000 रुपये का सिलेंडर… नोएडा के मजदूरों का फूटा गुस्सा, सड़कों पर उतरे हजारों कर्मचारी

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राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नोएडा | 13 अप्रैल 2026

नोएडा के औद्योगिक क्षेत्र में काम करने वाले हजारों गारमेंट फैक्ट्री कर्मचारियों का गुस्सा आखिरकार सड़कों पर फूट पड़ा। मामूली वेतन वृद्धि और लगातार बढ़ती महंगाई के बीच खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे मजदूरों ने जोरदार प्रदर्शन करते हुए अपनी पीड़ा जाहिर की। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जहां एक ओर उनकी सैलरी में सिर्फ 39 रुपये की बढ़ोतरी की गई है, वहीं दूसरी ओर रसोई गैस सिलेंडर की कीमत 5000 रुपये तक पहुंच चुकी है, जिससे उनका घर चलाना लगभग नामुमकिन हो गया है।

प्रदर्शन में शामिल मजदूरों ने बताया कि फैक्ट्री मालिकों और प्रबंधन द्वारा लंबे समय से उनकी अनदेखी की जा रही है। कई कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि काम के घंटे लगातार बढ़ाए जा रहे हैं, लेकिन वेतन में कोई ठोस बढ़ोतरी नहीं की जा रही। उनका कहना है कि महंगाई की मार ने उनकी कमर तोड़ दी है—किराया, राशन, बच्चों की पढ़ाई और इलाज जैसे बुनियादी खर्च पूरे करना भी अब मुश्किल हो गया है।

महिला कर्मचारियों ने भी अपनी समस्याएं खुलकर सामने रखीं। उनका कहना था कि फैक्ट्रियों में काम का दबाव तो बढ़ता जा रहा है, लेकिन सुविधाएं और सुरक्षा के इंतजाम बेहद कमजोर हैं। कई महिलाओं ने आरोप लगाया कि उन्हें ओवरटाइम का पूरा पैसा नहीं दिया जाता और शिकायत करने पर नौकरी से निकालने की धमकी दी जाती है।

मजदूरों का कहना है कि वे बार-बार प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन से अपनी मांगें रखते रहे हैं, लेकिन हर बार उन्हें आश्वासन ही मिला। अब हालात ऐसे हो गए हैं कि उन्हें सड़कों पर उतरकर विरोध करना पड़ा। प्रदर्शनकारियों ने साफ चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगों पर जल्द ध्यान नहीं दिया गया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

इस प्रदर्शन ने एक बार फिर देश के औद्योगिक क्षेत्रों में काम करने वाले मजदूरों की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। गारमेंट इंडस्ट्री, जो बड़े पैमाने पर रोजगार देती है, वहीं अपने कर्मचारियों को न्यूनतम सुविधाएं देने में भी पीछे नजर आ रही है। मजदूरों की मांग है कि न्यूनतम वेतन में वास्तविक बढ़ोतरी की जाए, महंगाई के हिसाब से वेतन तय किया जाए और श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जाए।

फिलहाल प्रशासन की ओर से बातचीत का आश्वासन दिया गया है, लेकिन मजदूरों का कहना है कि अब उन्हें केवल वादे नहीं, ठोस कार्रवाई चाहिए। नोएडा की सड़कों पर गूंजते इन नारों ने साफ कर दिया है कि अगर हालात नहीं बदले, तो यह असंतोष एक बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है।

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