सरोज सिंह | पटना 17 नवंबर 2025
बिहार विधानसभा चुनाव में Rashtriya Janata Dal (RJD) की बुरी हार के बाद पार्टी के भीतर भूचाल मचा हुआ है। सोमवार को RJD के समर्थक सड़कों पर उतर आए और पार्टी के सांसद एवं प्रमुख सलाहकार Sanjay Yadav के खिलाफ एक जोरदार एंटी-कैंपेन शुरू किया। पटना में पूर्व मुख्यमंत्री Rabri Devi के आवास के बाहर RJD कार्यकर्ताओं ने संजय यादव के खिलाफ नारेबाजी की, सरकार से इस्तीफे की मांग की और कहा कि पार्टी की कमजोर सीट-परफ़ॉर्मेंस के लिए वे जिम्मेदार हैं।
इस विरोध की जड़ें गहरी हैं। टिकट बंटवारे, गठबंधन समझौतों और रणनीतिक निर्णयों पर पार्टी कार्यकर्ताओं और तयशुदा हिस्सेदारों का गुस्सा संजय यादव पर केंद्रित है। RJD के अंदरूनी सूत्र बताते हैं कि संजय यादव ने टिकट वितरण और प्रचार रणनीति दोनों पर काफी प्रभाव जमाया था—जिसका परिणाम अंततः पार्टी की 2025 के चुनाव-परिणाम में भारी नुकसान के रूप में सामने आया। रोहिणी आचार्य (राबड़ी का परिवार) ने सोशल मीडिया पर खुलकर आरोप लगाया कि संजय यादव ने उन्हें अपमानित किया, उनका नाम सार्वजनिक मंच पर लिया गया और उन्हें पार्टी छोड़ने को मजबूर किया गया—जिसने RJD नेतृत्व में विभाजन की चिंगारी फैलाई।
राजनीतिक विश्लेषक इस घटनाक्रम को RJD के अंदर बड़े स्तर पर नेतृत्व-संघर्ष और यथास्थिति के टूटने का संकेत मान रहे हैं। जब पार्टी का सबसे करीबी सलाहकार, जो कभी रणनीतिक रूप से पार्टी की कामयाबी का हिस्सा रहा था, अब खुद विरोधियों की निशाना बनने लगा है—तो यह सिर्फ एक व्यक्ति की समस्या नहीं, बल्कि संगठनात्मक संकट की तस्वीर है। RJD को अब चुनावी पुनरावलोकन, संगठनात्मक पुनर्संरचना और विश्वास बहाली की चुनौती का सामना करना होगा—वरना इस विरोध ने सिर्फ संजय यादव को घेरा है, बल्कि पूरी पार्टी को अस्थिरता के खड़े मोड़ पर ला खड़ा किया है।





