संजीव कुमार । नई दिल्ली 4 दिसंबर 2025
टीम इंडिया के पूर्व मुख्य कोच रवि शास्त्री अपने साफ-साफ बोलने के लिए जाने जाते हैं, और इस बार भी उन्होंने कोई मुलायम भाषा नहीं अपनाई। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ जारी वनडे सीरीज़ के बीच शास्त्री ने विराट कोहली और रोहित शर्मा के पक्ष में जिस तरह की मुखर और तीखी टिप्पणी की है, उसने भारतीय क्रिकेट के गलियारों में बड़ा तूफ़ान खड़ा कर दिया है। शास्त्री ने साफ कहा—“विराट कोहली और रोहित शर्मा ‘दादा खिलाड़ी’ हैं… वाइट-बॉल क्रिकेट के दिग्गज। ऐसे खिलाड़ियों के साथ खिलवाड़ नहीं होता।” उनकी यह टिप्पणी केवल प्रशंसा नहीं बल्कि एक चेतावनी थी—किसके लिए, यह उन्होंने खुलकर नहीं बताया, लेकिन संकेत इतने स्पष्ट थे कि क्रिकेट जगत में सवाल उठने लगे हैं।
कौन कर रहा है यह सब?—शास्त्री के बयान ने खड़ा किया बड़ा सवाल
जब शास्त्री से पूछा गया कि आखिर कौन इन दिग्गज खिलाड़ियों के साथ ‘मेसिंग अराउंड’ कर रहा है, तो उन्होंने बिना नाम लिए एक और धमाकेदार बात कही—“कुछ लोग ऐसा कर रहे हैं। लेकिन अगर ये दोनों (विराट और रोहित) सही मोड में आ गए, सही बटन दबा दिए, तो जो लोग इधर-उधर सेखा मार रहे हैं… वे सब सीन से बहुत जल्दी गायब हो जाएंगे।” यह बयान ऐसे समय आया है जब टीम इंडिया के भीतर 2027 वर्ल्ड कप को लेकर ‘युवा बनाम अनुभवी’ की बहस तेज है। क्रिकेट हलकों में पहले से ही चर्चा है कि कुछ लोग सीनियर खिलाड़ियों की भूमिका को सीमित करना चाहते हैं। शास्त्री की टिप्पणी को उसी संदर्भ में देखा जा रहा है—यानि वह खुलकर बता रहे हैं कि टीम के भीतर कुछ ताकतें बदलाव को धक्का दे रही हैं, और यही दिग्गजों के सम्मान पर असर डाल रहा है।
कोहली और रोहित का “दादा स्टेटस”—शास्त्री ने गिनाई उपलब्धियां
शास्त्री ने अपने बयान में जब कोहली और रोहित को ‘दादा प्लेयर्स’ कहा, तो उनके तर्क भी उतने ही मजबूत थे। रोहित शर्मा की ODI विरासत—डबल सेंचुरी का रिकॉर्ड, ICC टूर्नामेंटों में उनकी लगातार रन-मशीन जैसी परफॉर्मेंस—उन्हें वाइट-बॉल क्रिकेट का सबसे भरोसेमंद स्तंभ बनाती है। वहीं विराट कोहली के 14,000+ ODI रन, 2023 वर्ल्ड कप जैसी बड़ी प्रतियोगिताओं में उनका अद्वितीय प्रदर्शन, और दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ हालिया शतक—यह सब शास्त्री के तर्कों को और मजबूती देता है। शास्त्री ने यह भी याद दिलाया कि “इन दोनों का बिग-मैच अनुभव टीम इंडिया की रीढ़ है, खासकर तब जब युवा खिलाड़ियों पर लगातार दांव लगाया जा रहा है।”
ड्रेसिंग रूम whispers और टीम इंडिया का बदलता समीकरण
भारतीय क्रिकेट में पिछले कुछ महीनों से एक अजीब बेचैनी देखी जा रही है। चयन प्रक्रिया पर सवाल, सीनियर खिलाड़ियों के भविष्य को लेकर कयास, और युवा खिलाड़ियों को लेकर अचानक बढ़ा उत्साह—इन सबने एक तनावपूर्ण माहौल बना दिया है। सूत्र बताते हैं कि टीम के भीतर फुसफुसाहटें बढ़ी हैं, जिनमें कुछ लोग 2027 वर्ल्ड कप की योजना के नाम पर सीनियरों को धीरे-धीरे साइडलाइन करने की कोशिश कर रहे हैं। शास्त्री के बयान ने मानो इन्हीं whisper campaigns पर ताला खोल दिया है। उनका “कुछ लोग कर रहे हैं” वाला वाक्य किसी एक व्यक्ति पर आरोप नहीं था, बल्कि एक व्यापक असंतोष का संकेत था—और शायद यह चेतावनी भी कि भारतीय क्रिकेट में सत्ता के खेल को वे खूब पहचानते हैं।
सीरीज़ का निर्णायक मैच और माहौल की गर्मी
दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 1–1 से बराबर हुई सीरीज़ का आख़िरी मुकाबला अब केवल एक खेल नहीं रह गया है। विराट के शतक और मार्कराम की बराबरी ने इस टकराव को और रोमांचक बना दिया है। लेकिन शास्त्री के बयानों के बाद यह मैच अब टीम इंडिया की आंतरिक राजनीति, खिलाड़ियों की स्थिति और चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता दिख रहा है।
जो भी हो—रवि शास्त्री एक बार फिर भारतीय क्रिकेट के शांत पानी में बड़ा पत्थर फेंक चुके हैं। अब देखने वाली बात यह है कि यह लहरें किसे डूबोती हैं और किसे एक नई ताकत देती हैं।





