एबीसी वर्ल्ड न्यूज | वॉशिंगटन डीसी | 7 फरवरी 2026
विवाद की शुरुआत: सोशल मीडिया पर साझा हुआ आपत्तिजनक वीडियो
अमेरिका में उस समय बड़ा राजनीतिक और सामाजिक विवाद खड़ा हो गया, जब पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सोशल मीडिया अकाउंट से एक ऐसा वीडियो साझा किया गया, जिसमें पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा और उनकी पत्नी मिशेल ओबामा को बंदरों के रूप में दर्शाया गया था। इस वीडियो को नस्लवादी प्रतीकों से भरा और घोर आपत्तिजनक बताया गया। खास बात यह रही कि यह क्लिप ऐसे समय पर सामने आई, जब अमेरिका में अश्वेत इतिहास और अधिकारों को लेकर संवेदनशील माहौल बना हुआ है, जिससे लोगों का आक्रोश और तेज़ हो गया।
तीखी आलोचना के बाद वीडियो हटाया गया
वीडियो सामने आते ही सोशल मीडिया पर जबरदस्त विरोध शुरू हो गया। नागरिक अधिकार संगठनों, डेमोक्रेट नेताओं और कई स्वतंत्र विश्लेषकों ने इसे खुले तौर पर नस्लवादी करार दिया। चौतरफा आलोचना बढ़ने के बाद ट्रंप की टीम ने आखिरकार उस वीडियो को सोशल मीडिया से हटा दिया। हालांकि, वीडियो हटाए जाने के बावजूद ट्रंप की ओर से कोई औपचारिक माफी नहीं दी गई, जिस पर विवाद और गहराता चला गया।
ट्रंप की सफाई, लेकिन सवाल बरकरार
मामले के तूल पकड़ने के बाद ट्रंप की ओर से सफाई दी गई कि वीडियो का विवादित हिस्सा उनके संज्ञान में नहीं था और यह एक सामान्य इंटरनेट कंटेंट की तरह साझा हो गया। हालांकि, आलोचकों ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि इतने संवेदनशील और अपमानजनक प्रतीकों का इस्तेमाल “अनजाने में” होना मुश्किल है। उनका कहना है कि सार्वजनिक जीवन में रहे किसी भी नेता को ऐसी सामग्री साझा करने से पहले उसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए।
विपक्ष और नागरिक संगठनों का कड़ा रुख
इस पूरे प्रकरण पर अमेरिकी विपक्ष ने ट्रंप पर तीखा हमला बोला। डेमोक्रेट नेताओं ने कहा कि यह घटना अमेरिका में नस्लीय विभाजन को और गहरा करने वाली है। कई नागरिक अधिकार संगठनों ने इसे अश्वेत समुदाय का अपमान बताते हुए कहा कि ऐसे वीडियो समाज में नफरत और भेदभाव को बढ़ावा देते हैं। यहां तक कि ट्रंप के ही कुछ राजनीतिक सहयोगियों ने भी इस वीडियो को “गलत और अनुचित” बताया।
अमेरिकी राजनीति में नस्लीय बहस फिर तेज
इस घटना ने अमेरिका में नस्लवाद और राजनीतिक भाषा की मर्यादा को लेकर चल रही बहस को एक बार फिर तेज कर दिया है। विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद सिर्फ एक वीडियो तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अमेरिकी राजनीति में गहराई से मौजूद नस्लीय तनाव और सोशल मीडिया के गैर-जिम्मेदाराना इस्तेमाल की ओर भी इशारा करता है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा अमेरिकी राजनीति और चुनावी बहसों में और ज्यादा उछल सकता है।
ओबामा दंपत्ति की गरिमा बनाम सियासी बयानबाज़ी
हालांकि इस पूरे विवाद पर ओबामा दंपत्ति की ओर से कोई तीखी प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन समर्थकों का कहना है कि ऐसे हमले उनकी गरिमा और लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ हैं। कुल मिलाकर, ट्रंप द्वारा साझा किए गए और बाद में हटाए गए इस वीडियो ने अमेरिका में नस्लवाद, अभिव्यक्ति की आज़ादी और राजनीतिक जिम्मेदारी को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है।




